Betul News: शासन के विनियमिकरण के इंतजार में अटकी अवैध कालोनियों पर कार्रवाई

Betul News: Action on illegal colonies stuck waiting for government regulation

लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अवैध कालोनियों को प्रबंधन में लेगा जिला प्रशासन

Betul News: बैतूल। अवैध कॉलोनियों के कर्ता-धर्ता भले ही दावा करें कि नियम शिथिल होने के कारण उन पर कार्रवाई होना संभव नहीं है, लेकिन उनका यह दावा झूठा पड़ना तय माना जा रहा है। प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने अवैध कालोनियों को लेकर पिछले दिनों विनियमिकरण की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए राज्य शासन ने अभी तक नई गाइड लाइन नहीं बनाई। इसके लिए पूर्व और नई गाइड लाइन का अवलोकन किया जा रहा है। अगले माह के प्रथम सप्ताह तक विनियमिकरण की गाइडलाइन जारी होते ही जिले में जितनी भी अवैध कालोनियां है, उन सब पर ताबड़तोड़ कार्रवाई होना तय है।

सूत्र बताते हैं कि शिवराज सरकार के कार्यकाल में अवैध भूमाफियाओं को थोड़ी झूठ मिल गई थी। पुराने कालोनाइजरों को भी छूट देकर कालोनियों को वैध करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके पहले ही प्रक्रिया आगे बढ़ पाती, लेकिन शिवराज सिंह सरकार को पांचवां कार्यकाल नहीं मिल पाया। बदलाव की बयार में डॉ मोहन यादव को सीएम मिलने का मौका मिल गया। नए मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकार द्वारा नियमों की कालोनियों में बदलाव किया तो बैतूल जिले की माफियाओं की नस दब गई। अब अपने राजनैतिक आकाओं के सहारे अपनी कालोनियों को प्रशासन के सर्वे में शामिल न कराने के लिए हाथ पैर चला रहे हैं। इसमें उन्हें कितनी सफलता मिलती है, यह तो वक्त बताएंगा, लेकिन सरकार के नियम बदलने से कालोनाइजरों के चेहरों पर चिंता की लकीरें स्पष्ट देखी जा सकती है।

नियमों की चली तो बकरे की अम्मा की भी खैर नहीं

सूत्र बताते हैं कि राज्य शासन ने वर्ष 2016 के पूर्व की अवैध कालोनियों को अवैध माना है। इसी वजह जिला प्रशासन ने भी एसडीएम और तहसीलदारों से अवैध कालोनियों का सर्वे शुरू करवाया है। उधर जानकार सूत्र बताते हैं कि राज्य शासन ने अवैध कालोनियों के लिए नया नियम बनाया है। इस विधेयक को सरकार जुलाई में शुरू हो रहे मानसून सत्र में पटल पर रख सकती है। विनियमिकरण प्रक्रिया लागू होते ही पूरे प्रदेश में अवैध कालोनाइजरों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई होना बताया जा रहा है। इसमें अब तक कार्रवाई से छूटे जिले के कई माफियाओं के नाम भी सामने आ सकते हैं। यानी यहां पर बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएंगी वाली कहावत भी चरितार्थ होते दिखाई दे रही है।

नियमों का हवाला देकर बचने का प्रयास

जानकार सूत्र बताते हैं कि कई कालोनाइजरों का तर्क है कि अवैध कालोनी में यदि प्रशासन एफआईआर भी करता है तो थाने से जमानती मामला बनने पर कुछ नहीं होगा। इसमें सजा भी पांच साल की है। कालोनाइजर कह रहे हैं कि सात वर्ष से कम की सजा वाले मामलों में थाने से जमानत मिल जाती है, फिर डर किस बात का। यही वजह है कि प्रशासन की कार्रवाई का भय कालोनाइजरों पर नहीं दिखाई दे रहा है। राजस्व निरीक्षक और पटवारियों द्वारा बनाई जा रही सूची से भी कई कालोनाइजर भयभीत नहीं है।

कालोनाइजरों की कुंडली तैयार करने में लापरवाही, कलेक्टर भी नाराज

इधर जानकार सूत्र बताते हैं कि जिले की सभी एसडीएम और तहसीलदारों को संवेदनशील कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने बैठक लेकर अवैध कालोनाइजरों की सूची बनाने के निर्देश दिए थे। आज की स्थिति में जिले के पांच अनुविभागों में से केवल दो में ही कलेक्टर तक कालोनाइजरों की कुंडली पहुंचाई है। शेष अनुविभाग में सूची बनाने का काम कछुआ चाल से चल रहा है। कलेक्टर ने पिछले मंगलवार को जनसुनवाई में नामांतरण के अलावा अवैध कालोनियों के मामले पर भी लापरवाही के कारण राजस्व अमले पर नाराजगी जताई है। कलेक्टर की नाराजगी के बाद संभावना है कि अधीनस्थ अमला जल्द ही कलेक्टर के अवैध कालोनी की सूची भेजेगा।

इनका कहना…

जिले में जितनी भी अवैध कालोनी है। सब पर नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अभी राज्य शासन से विनियमिकरण नियमों का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही यह नियम मिलते हैं। जिले में अवैध कालोनियों पर कार्रवाई शुरू हो जाएगी।

नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर बैतूल

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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