Betul News: रेरा-टीएनसीपी से अनुमति नहीं मिली, कैसे बन रही कालोनियां?

Betul News: Permission not received from RERA-TNCP, how are the colonies being built?

सबसे बड़ा सवाल: अधिकारियों ने निरीक्षण क्यों नहीं किया, सीएम के आदेश की सरेआम अवहेलना

Betul News: बैतूल। जिले में कालोनाइजरों को कहीं न कहीं अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, यह बात दावे के साथ कही जा सकती है। दरअसल एक सैकड़ा से अधिक कालोनियों में से शासन की गाइड लाइन के अनुसार कितनी कालोनियों वैध और अवैध है। यह बात खुद क्षेत्र के अधिकारी नहीं जानते हैं। अलबत्ता यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि 90 प्रतिशत कालोनियों में रेरा और टीएनसीपी की अनुमति नहीं है। यदि अनुमति नहीं थी तो फिर कालोनाइजरों ने किस आधार पर प्लाट और फ्लैट बेच डाले। सबसे बड़ा जांच का विषय यही हो सकता है।

जिले में कुकुरमुत्तों की तरह कालोनियों को बनाने का खेल चल रहा है। कालोनाइजरों ने पार्टनरशिप में सड़क किनारे या अंदर औन-पौने दाम पर खेत खरीद डाले। इन खेतों को लेबल कर मनमाफिक ढंग से प्लाट काट दिए। चौकाने वाली बात तो यह उजागर हो रही है कि जिले के पांच अनुविभागों में कुकुरमुत्तों की तरह कालोनियां बनाकर प्लाट काट दिए गए। इसके लिए न तो टीएनसीपी और न ही रेरा की अनुमति ली गई है। लोगों ने आसान किस्तों और कम रेट के कारण एक अपने घर का सपना को महत्व देते हुए प्लाट तो खरीद डाला, लेकिन अब वे विकास कार्य नहीं होने से अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।

नियम-कायदें ताक पर रखे

सांझवीर टाईम्स को मिली जानकारी पर यकीन करें तो जिले में करीब 150 कालोनियां पिछले कुछ वर्षों में या तो बनाई जा चुकी है या बन रही है। इनमें से केवल 10 प्रतिशत को छोड़ दे तो शेष कालोनियां कही न कहीं नियमों की अनदेखी कर रही है। शासन की गाइडलाइन के अनुसार कालोनी बनाने के लिए टीएनसीपी से अनुमति के अलावा रेरा भोपाल से भी अनुमति आवश्यक है। इसके बाद बची प्रक्रिया में डायवर्सन होना भी अनिवार्य है।

प्लाट बेचने के पहले कालोनाइजर को कालोनी में सड़क अनिवार्य रूप से बनाना है। इसके पूर्व बिजली के पोल और नाली निर्माण भी जरूरी है, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर अधिकांश कालोनाइजरों ने एक भी नियमों का पालन न करते हुए खेतों में लाइनिंग कर प्लाट काटकर बेच डाले हैं। यह लोगों के लिए बड़े खतरे की घंटी है कि कालोनी यदि वैध नहीं हुई तो उनकी मेहनत की कमाई डूब जाएगी।

अब तक नींद में थे जिम्मेदार अधिकारी

सूत्र बताते हैं कि कालोनी के लिए शिवराज सरकार ने नीतियां बदली थी, लेकिन डॉ मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनते ही इसके लिए नियम सख्त कर दिए गए। मुख्यमंत्री ने अपने एजेंडे में साफ शब्दों में कहा था कि मंदिर- मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाए। अवैध माफियाओं पर शिकंजा कसे, अतिक्रमण माफियाओं पर कार्रवाई करें और अवैध कालोनियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर मंदिर और मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जा रहे, लेकिन चार माह पहले कालोनाइजरों के लिए जो गाइडलाइन बनाई गई है, उसका कछुआ चाल से पालन किया जा रहा है। पिछले दिनों वीसी में सीएम ने सभी कलेक्टरों को अवैध कालोनियों को लेकर सख्त निर्देश दिए, लेकिन बैतूल जिले में कलेक्टर के निर्देश पर अधीनस्थों की कार्रवाई कछुआ चाल बनने से औपचारिकता बन गई है।

इनका कहना…

सीएम के हर निर्देशों का सख्ती के साथ पालन किया जा रहा है। धार्मिक स्थलों से सख्ती से लाउडस्पीकर हटाए जा रहे हैं। अवैध कालोनियों पर भी कार्रवाई तय की जा रही है। अधिकारियों की रिपोर्ट आते ही इसके परिणाम सामने आएंगे।

नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर बैतूल।

whatsapp

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

Related Articles

Back to top button