Today Betul News: जिला अस्पताल का टोकन सिस्टम कटघरे में, मरीजों की कतार ओपीडी के सामने इलाज के लिए मरीजों को करना पड़ता है इंतजार
Today Betul News: Token system of district hospital in dock, queue of patients in front of OPD, patients have to wait for treatment

विभाग का तर्क- मरीजों की अज्ञानता से सिस्टम का मतलब नहीं…
Today Betul News: (बैतूल)। जिला अस्पताल में मरीजों को लंबी कतार से राहत देने के लिए जोर-शोर से टोकन सिस्टम की शुरुआत की गई थी। शुरुआत में इसके सकारात्मक परिणाम भी मिले, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यवस्था बेपटरी हो गई। इसके पीछे तर्क दिए जा रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को टोकन सिस्टम के बारे में संज्ञान नहीं होने के कारण व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी। इसी तर्क के आधार पर टोकन सिस्टम के लिए लगाई गई मशीनें भी महीनों से बंद है। हालात यह है कि हर दिन जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को ओपीडी के सामने कतार लगाकर इलाज कराना मजबूरी बन गई है। इससे पूरी व्यवस्था चौपट नजर आ रही है। जिला चिकित्सालय में करोड़ों की लागत से इमारत बनकर तैयार की गई है।
प्रतिदिन यहां 800 से 900 मरीज जिले भर से इलाज कराने पहुंचते हैं। इसी समस्या के निदान के लिए लाखों रूपए खर्च कर एलईडी टीवी सहित मशीनें लगाकर टोकन सिस्टम की शुरूआत की गई थी। शुरूआत के कुछ महीने के बाद ही सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। हालात यह है कि कई महीनों से यह टोकन सिस्टम बंद पड़ा हुआ है। एलईडी टीवी अस्पताल की शोभा बढ़ा रही है। लाखों रूपए खर्च करने के बाद भी नतीजा कुछ नहीं निकल पाया है। डॉक्टरों के रूम के सामने मरीज लंबी कतार में खड़ा होकर मरीज अपनी बारी का इंतजार करते है। टोकन सिस्टम लागू होने के बाद भी अस्पताल की व्यवस्था पुराने ढर्रे पर संचालित हो रही है। डॉक्टर भी टोकन सिस्टम का इस्तेमाल नहीं करते है।
टोकन सिस्टम से डॉक्टर के पास में एक रिमोट रहता था वह बारी-बारी से टोकन सिस्टम के माध्यम से मरीजों को अपने पास बुलाते थे। मशीन के माध्यम से टोकन नंबर का अनाउंस किया जा रहा था। अनाउंस होने के बाद मरीज को डॉक्टर के पास पहुंचना होता था। अपनी बारी का इंतजार करते मरीज आराम से बैठे रहते थे, लेकिन अब मरीजों को कतार में लगना पड़ता है। सिस्टम को दुरूस्त करने नहीं दिलचस्पी लाखों रूपए की लागत से लगाए गए टोकन सिस्टम को सुधारने के लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। टोकन सिस्टम सुधारा जाता है तो मरीजों को फिर से लाईन में लगने से निजात मिल सकती है। अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम सुधारने के लिए इंजीनियर की आवश्यकता होती है और इसके लिए कंपनी से इंजीनियर आते है। कई दिनों से सिस्टम बंद होने के बावजूद भी इसे नहीं सुधारा गया। कुछ जगह सिस्टम की कनेक्टविटी बंद है तो कुछ एलईडी तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी है। कुल मिलाकर सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है।
800 के पार ओपीडी, हालात बेकाबू अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते है। सोमवार से लेकर शुक्रवार तक ओपीडी का आंकड़ा 800 के पार पहुंच जाता है। ओपीडी पर्ची खरीदने के बाद अधिकतर मरीज उपचार करवाने के लिए लाईन में खड़े रहते है। कई वृद्ध मरीज होने पर उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। घंटो तक लाईन में लगे मरीजों का नंबर नहीं आ पाता है। कई बार डॉक्टर के इधर उधर दूसरे वार्ड में चले जाने के कारण मरीज परेशान होते है और लाईन में ही खड़े रहते है। मरीजों का कहना है कि लाईन से एक बार हटने पर जल्द नंबर नहीं लग पाता है। इसलिए कक्ष में डॉक्टर मौजूद रहे या नहीं रहे, रूम के सामाने कतार लगाकर खड़े रहना पड़ता है। विभागीय तर्क है कि कतार में लगने के पीछे खुद मरीज जिम्मेदार है, क्योंकि अंचलों के मरीज को यह व्यवस्था समझ नहीं आ रही है। यही कारण है कि ओपीडी के बाहर मरीजों का मजमा लगा रहता है।
इनका कहना…
कन सिस्टम नंबर से चलते हैं, लेकिन मरीजों को इसकी समझ नहीं है। खासकर ग्रामीण मरीज यह व्यवस्था समझ ही नहीं पा रहे हैं। इसी वजह व्यवस्था चौपट हो गई है। इसमें अस्पताल प्रबंधन की कोई जिम्मेदार नहीं है।
अशोक बारंगा, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल





