Aaj Betul Ki Khabar: वाह डोनीवाल साहब! 210 रुपए की दीवार घड़ी 1हजार में खरीद डाली
Today's true news: Wow Doniwal sir! Bought a wall clock worth Rs 210 for Rs 1,000.

एकलव्य आवासीय विद्यालय में फर्जीवाड़े की सारी हदें पार…
Aaj Betul Ki Khabar:(बैतूल)। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा किस तरह लांघी जाती है यह देखना और समझना हो तो एकलव्य आवासीय विद्यालय की वो जांच रिपोर्ट देख लें, जिसमें प्राचार्य एसके डोनीवाल और टीम ने आवासीय विद्यालय के संचालन के लिए आए करोड़ों रुपयों को ठिकाने लगाने का काम किया है। खास बात तो यह है कि दीवारों पर लगाने वाली घड़ी की खरीदी पर गौर करें तो सबकुछ साफ हो जाएगा कि गोलमाल किस तरह से किया जाता है। प्राचार्य ने बाजार मूल्य से 4 गुना अधिक भुगतान कर दीवार घड़ियों की खरीदी की है।
210 की घड़ी के चुकाए 1000 रुपए दाम
वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्राचार्य ने भोपाल के दीवासु इंटरप्राइजेस से कुल 21 दीवार घड़ियों की खरीदी की। इन घड़ियों की कीमत सुनकर हैरानी होना लाजिमी है। दीवार घड़ी की कीमत खुले बाजार में मात्र 210 रुपए है, वही घड़ी 1 हजार रुपए प्रति नग के हिसाब से खरीदी गई है। यानीएक घड़ी पर सीधे तौर पर 790 रुपए का ज्यादा भुगतान किया गया है। इस हिसाब से एजेंसी को 16590 रुपए ज्यादा भुगतान किया है। अब शासन को प्राचार्य और भ्रष्टाचार में लिप्त टीम से यह पूछे जाने की जरूरत है कि आखिर एजेंसी को तीन गुना ज्यादा भुगतान किस आधार पर और कैसे कर दिया गया है?
पैकिंग पर लिखी घड़ी की ओरिजनल कीमत
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश के बाद जब तीन सदस्यीय जांच दल ने इसकी पड़ताल की तो प्राचार्य का फर्जीवाड़ा खुद ही सामने आ गया। जांच अधिकारी सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग ने जांच प्रतिवेदन में इस बात का उल्लेख किया है कि क्रय की कार्यवाही तो जेम पोर्टल के माध्यम से की गई है। माह जुलाई 2023 में राशि रुपए 21 हजार की दीवार घड़ी क्रय की गई है। जांच के दौरान क्रय की गई दीवार घड़ी का अवलोकन किया, जो कि निश्चित माप दंड के अनुसार क्रय नहीं की गई है। घड़ी की कीमत रुपए 1000- प्रति नग क्रय की गई है, किन्तु घड़ी की क्वालिटी न्यूनतम पाई गई है । भुगतान की गई कीमत के अनुरूप दीवार घड़ी नहीं पाई गई । संस्था में उपलब्ध घड़ी क्वेटोवा कंपनी की है, जिसके बाक्स पर घड़ी की कीमत 210 रुपए प्रति नग अंकित है । बायलॉज के अनुसार विद्यालयीन स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अध्यक्षता में गठित समिति से क्रय सामग्री का सत्यापन एवं भुगतान की अनुशंसा भी नहीं कराई है । इससे पता चलता है कि प्राचार्य एन्ड कम्पनी ने एकलव्य आवासीय परिसर को अपने लिए कुबेर का खजाना समझकर इसका दोहन करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।





