Betul News : मंत्रिमंडल में फिर हमारा जिला उपेक्षा का शिकार
Betul News: Our district again a victim of neglect in the cabinet

5 विधायक जीतने के बाद भी किसी को नहीं मिला स्थान, कार्यकर्ताओं और लोगों में फिर मायूसी
Betul News : (बैतूल)। विधानसभा चुनावों के बाद पूर्ण बहुमत के आंकड़े से काफी ज्यादा सीटें जीतकर भाजपा एक बार फिर प्रदेश में अपनी सरकार बनाने में कामयाब हो गईं। मुख्यमंत्री बनाने के बाद अब मंत्रिमंडल का गठन सोमवार हो रहा है। जिले की जनता आस लगाए बैठी थी कि इस बार जिले की पांच विधानसभा सीटों से जीतकर आए किसी भी भाजपा विधायक को मंत्रिमंडल में जरूर शामिल कर लिया जाएगा, लेकिन हर बार की तरह एक बार फिर बैतूल जिले को उपेक्षा का शिकार होना पड़ा है।
मतलब साफ जाहिर है कि भाजपा के राज में मंत्रिमंडल में सुखा बना रहेगा । जिले में 5 विधायकों में से यदि घोड़ाडोंगरी विधायक गंगा सज्जन सिंह उइके को छोड़ दिया जाए तो जीते हुए सभी विधायक वरिष्ठ कहे जा सकते है। इसके बावजूद मंत्रिमंडल में जिले को तवज्जो नहीं दिया जाना कहीं ना कहीं इन जनप्रतिनिधियों के साथ भी नाइंसाफी कही जा सकती है।
हर बार जिले को मिली उपेक्षा
वर्ष 2013 के विधान सभा चुनावों में जिले की पांचों विधान सभा सीटों पर भाजपा के विधायक जीतकर आए थे। जिनमे बैतूल से हेमंत खण्डेलवाल, आमला से चैतराम मानेकर , मुलताईं से चन्द्रशेखर देशमुख, घोड़ाडोंगरी से गीता बाई उइके और भैसदेही से महेंद्र सिंह चौहान ने चुंनाव जीता था। इस दरम्यान भी यह कयास लगाए जा रहे थे कि भले ही किसी भी विधायक को मंत्री पद ना मिले लेकिन निगम या मंडलों में जगह तो मिल ही जाएगी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका।जिसका परिणाम यह निकला कि वर्ष 2018 के चुंनाव में भाजपा को जिले में विपरीत स्थिति का सामना करना पड़ा। और 5 विधान सभाओं में से 4 विधान सभा सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा कर लिया। यहां यह उल्लेखनीय होगा कि कांग्रेस ने जिले को उपेक्षा से बाहर निकालकर मुलताईं विधायक सुखदेव पांसे को मंत्री पद से नवाजा था, लेकिन कांग्रेस की सरकार और मंत्री सरकार संभाल नहीं पाए और महज 15 महीने के कार्यकाल के बाद भाजपा ने कांग्रेस की सरकार को चलता कर दिया।
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हेमंत ने निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका
वर्ष 2018 में कांग्रेस की सरकार के खिलाफ वरिष्ठ कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की खिलाफत के बाद सिंधिया खेमे के 22 विधायकों ने कांग्रेस से बगावत कर दी थी। उस समय प्रदेश में भाजपा की सरकार को प्रदेश में पुनः काबिज करवाने में बैतूल विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।कांग्रेस से बागी हुए 22 विधायकों को सम्भालने और सहेजने में विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने का महत्वपूर्ण रोल अदा किया था।
इस बार फिर अपनी सफल रणनीति के बल बूते हेमंत खण्डेलवाल ने लगभग 15 हजार मतों के अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी निलय डागा को चुंनाव हराकर बैतूल विधान सभा की विधायकी हासिल की। माना जा रहा था कि इस बार भाजपा से दूसरी बार विधायक बने, प्रदेश भाजपा के कोशाध्यक्ष रहे, कुशाभाऊ ठाकरे न्यास के अध्यक्ष सहित विभिन्न पदों पर रहकर पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा साबित करने वाले हेमंत खण्डेलवाल को मंत्री बनाया जाएगा । लेकिन एक बार फिर जनता को मायूसी का सामना करना पड़ा।
5 बार के आदिवासी विधायक महेंद्र सिंह भी नजर अंदाज
बैतूल जिले को मंत्री पद मिलने की फेहरिस्त में भैसदेही विधायक महेंद्र सिंह चौहान का दावा भी काफी मजबूत माना जा रहा था। लेकिन 5 बार के विधायक महेंद्र सिंह को भी मंत्री मण्डल में शामिल नहीं किये जाने से लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। महेंद्र सिंह को राजनीति विरासत में मिली है। उनके दादा दद्दू सिंह चौहान ओर पिता केसर सिंह चौहान दोनों ही इस विधान सभा से विधायक रहे हैं। महेंद्र सिंह की बात की जाए तो पांचों विधान सभाओं में वे सबसे वरिष्ठ विधायक हैं जो चौथी बार विधायक बनकर इस विधान सभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। महेंद्र ने इस विधान सभा से कुल 6 चुंनाव लड़े जिनमे से 4 बार उन्होंने जीत हासिल की। लेकिन बैतूल जिला पहले भी उपेक्षा का शिकार हुआ और आज भी यही स्थिति का सामना करना पड़ा है।




