Betul News : आवेदन देने के पांच वर्ष बाद भी नहीं मिले शासकीय आवास
Betul News: Housing not available even after five years of application

पुलिस विभाग में एक अनार, सौ बीमार जैसे हालात, 300 अधिकारी- कर्मचारी प्रतीक्षा सूची का कर रहे इंतजार
Betul News : (बैतूल)। पुलिस विभाग में शासकीय आवास मिलना डेढ़ी खीर साबित हो रहा है। भले ही आवास आवंटन के लिए कमेटी बनी हुई है, लेकिन पिछले कई वर्षों से हालात ऐसे हैं कि जिनके आवास नहीं है, ऐसे पुलिसकर्मियों को भी कई बार आवेदन देने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें आवास योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।
पुलिस लाइन में बनने वाले नवीन आवास गृह आवंटन को लेकर जनवरी 2023 में तत्कालीन एसपी ने वरीयता के अनुसार आवास आवंटन देने के लिए आदेश जारी किए थे। इस आदेश में लगभग तीन सैकड़ा अधिकारी-कर्मचारी के नाम सामने आए थे। इधर कमेटी द्वारा जो आवास आवंटित किए गए हैं उनमें अधिकांश कर्मचारियों के नाम नदारद है। ऐसे में वरीयता क्रम को दरकिनार करते हुए आवास आवंटन की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।
सूत्र बताते हैं कि पुलिस विभाग में शासकीय आवास लेने की प्रक्रिया काफी जटिल होते जा रही है। एक अनार सौ बीमार की तर्ज पर शासकीय आवास लेने के लिए पिछले पांच वर्षों से अधिकारियों के पास जिले के लगभग तीन सौ अधिकारियों और कर्मचारियों के आवेदन लंबित है। सभी ने अलग-अलग तिथियों में आवेदन दिए। चूंकि पुलिस लाइन में मप्र पुलिस हाउसिंग कारर्पोरेशन द्वारा 60 नए आवास बनाए हैं।
इसका निर्माण शुरू होने के पहले ही अधिकारियों और कर्मचारियों ने ताबड़तोड़ आवेदन देना शुरू किया था। देखते ही देखते यह सूची लगभग तीन सौ पर पहुंच गई। यही वजह है कि आवास न मिलने के बाद कई कर्मचारियों ने गुप्त रूप से भी शिकायतें कर डाली। हाल ही में आरआई के पास भी एक गुप्त शिकायत पहुंची है, जिसकी जांच अभी की जा रही है।
पुलिस मुख्यालय के आदेश का कितना पालन
जानकार सूत्र बताते हैं कि जिला इकाई में पदस्थ अधिकारी और कर्मचारियों को आवास आवंटन के लिए निर्धारित समिति के पास आवेदन देने के बाद वरीयता के आधार पर नए आवास देना है। जनवरी 2023 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सिमाला प्रसाद ने एक आदेश जारी कर पुलिस मुख्यालय के आदेश का हवाला देकर वरीयता सूची के आधार और जिनके पास पूर्व से आवास नहीं है।
ऐसे अधिकारी और कर्मचारियों को नवीन आवास आवंटन में वरीयता देने के निर्देश दिए थे। स्थानांरित होकर आने वाले अधिकारी और कर्मचारियों को शासकीय आवास में नियम के अनुसार पात्रता देने का उल्लेख किया गया था। उनके आदेश से तीन सौ कर्मचारियों के नाम वरीयता सूची के अनुसार दर्शाए गए थे। इन नामों में कितने कर्मचारी पीएचक्यू के आवास आवंटन की प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं। यह तो भगवान ही जाने।
जिनका नाम नीचे, अचानक कैसे हो गया सबसे ऊपर?
सूत्र बताते हैं कि पूर्व एसपी द्वारा आवास आवंटन के लिए वरीयता सूची बनाई गई थी। इस सूची में जिनके नाम नीचे थे। दूसरी सूची में उनके नाम ऊपर आ गए। कई कर्मचारी ऐसे थे, जिनके नाम ऊपर से नीचे खिसक गए। सूत्रों ने बताया कि कुछ महिला आरक्षकों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उन्हें अनुकंपा नियुक्ति मिली है। छोटे बच्चों के साथ किराए के मकान में रहना पड़ रहा है।
आवास आवंटन में महिला आरक्षण को कही भी वरीयता नहीं दी गई। इतना ही नहीं शपथ पत्र के आधार पर आरआई आवास आवंटन प्रक्रिया पूरी करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया में आरोप लगने के बाद पूरी सूची विवादों में घिरती जा रही है। ताज्जुब की बात यह है कि आवास आवंटन की जांच को लेकर आरआई दिनेश उइके भ्रमित करने वाली बात कह रहे हैं। गुरुवार को तो उन्होंने इस मामले में चर्चा ही नहीं की और इस प्रतिनिधि द्वारा नाम बताते ही मोबाइल काट दिया।




