Rashan Black Marketing : राशन दुकानों पर कथित व्यापारियों का कब्जा, 17 रुपए किलो खरीद रहे अनाज

Rashan Black Marketing: Alleged traders occupy ration shops, buying grains for Rs 17 a kg

प्रत्येक दुकानों पर तत्काल किया जा रहा लेनदेन

Rashan Black Marketing : (बैतूल)। भले ही सरकार गरीबों को उनका पेट भरने के लिए राशन दुकानों से 1 रुपये किलो चावल प्रदान कर रही है, पर हकीकत में सरकार की यह योजना उन व्यापारियों के लिए वरदान साबित हो रही है जो एक रुपये किलो का चावल 16 से 17 रुपये किलो में खरीद कर इसी चावल को दूसरे व्यापारियों को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।

हालांकि इसमें फायदा उन गरीबों का भी हो रहा है जो 1 रुपये किलो का चावल पूरे 17 रुपये प्रति किलो में बेच रहे हैं। इसके ठीक विपरीत खाद्य विभाग के अधिकारी आंखें मूंदें बैठे हैं। राशन दुकानों पर सरेआम कतिथ व्यापारी खुल्लम खुल्ला खरीदी कर रहा है पर अधिकारी हैं कि चैकिंग करने से भी परहेज कर रहे हैं। इससे लगता है कि कहीं ना कहीं कतिथ व्यापारियों के साथ अधिकारियों की भी सांठ गांठ हो सकती है।

5500 क्विंटल प्रति माह आवंटन

जानकारी के मुताबिक जिले की 667 राशन दुकानों में प्रति माह लगभग 5500 क्विंटल प्रति माह का आवंटन खाध एवं आपूर्ति विभाग द्वारा जारी किया जाता है। इसमें गेहूं का वितरण लगभग बन्द ही हो चुका है। केवल गरीबी रेखा में जीवन यापन करने वाले प्रत्येक सदस्य को 3 किलो चावल का वितरण राशन दुकानों के माध्यम से हो रहा है। पिछले कुछ दिनों से यह देखने मे आ रहा है कि उपभोक्ता 1 रुपये किलो चावल खरीद कर इसे खुले बाजार में 17 रुपये किलो के हिसाब से बेच रहे हैं।

इस तरह से यदि हिसाब लगाया जाए तो पी डी एस का लगभग 5000 हजार क्विंटल चावल प्रति माह अनाज व्यापारियों द्वारा खरीदा जा रहा है। 17 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से व्यापारी प्रति माह लाखों रुपये का अनाज खरीद कर अपना मुनाफा भी कमा रहा है। लेकिन इस गोरखधंधे को रोकने टोकने के लिए कोई भी अधिकारी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। हालांकि ये भी सच है कि, पीडीएस के अनाज की यह खरीद बिक्री गरीब के लिए भी फायदे का सौदा साबित हो रही है।

असहाय नजर आ रहा खाद्य विभाग (Rashan Black Marketing)

इस पूरे मामले में खाद्य विभाग कार्यवाही करने में अपने आप को असहाय महसूस कर रहा है। राशन दुकानों के आसपास खरीदी करने वाले व्यापारी लोडिंग ऑटो लिए खड़ेे आसानी से नजर आ जाते हैं। कई व्यापारियों ने तो बकायदा अनाज के स्टोरेज के लिए राशन दुकानों के पास ही किराए से दुकानें ले रखी हैं। जैसे ही उपभोक्ता अनाज खरीदकर दुकान से बाहर निकलता है व्यापारी तुरंत यह अनाज खरीदकर किलो के हिसाब से उपभोक्ता को नगद भुगतान कर देता है। ऐसा नहीं है कि, खाध विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है लेकिन कार्यवाही को लेकर कोई दिशा निर्देश या नियम नहीं होने की वजह से अधिकारी भी बेबस दिखाई दे रहे हैं।

इनका कहना….

इस संबंध में विभागीय स्तर पर कोई भी दिशा निर्देश नहीं दिए गए हैं। पात्र उपभोक्ता अनाज लेने के बाद उसका उपयोग करता है या फिर मुनाफे में बेच देता है ये उसका अधिकार है।

केके टेकाम, प्रभारी खाद्य अधिकारी , बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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