Betul News : तीन महीने में दो दर्जन नाबालिग हुई गर्भवती, नाबालिग के गर्भवती होने का बढ़ने लगा ग्राफ

Two dozen minors became pregnant in three months, graph of minors becoming pregnant started increasing

Betul News : बैतूल। आदिवासी बाहुल्य जिले में नाबालिग और बिना शादी के युवतियों के गर्भवती होने के मामले बढ़ने लगे है। यह बढ़ते मामले चिंता का कारण बनते जा रहे है। युवाओं में जागरूकता की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं सामने आती है। इसमें से कुछ मामले दुराचार से भी जुड़े हुए है। नाबालिग और बिना शादी के युवतियों के गर्भवती होने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती किया जाता है। इस तरह के जुड़े मामलों पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासनिक महकमा तमाम दावें करता है, लेकिन प्रशासन के दावे खोकले साबित हो रहे है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल बैतूल में अगस्त माह से लेकर अब तक दो दर्जन नाबालिग और बिना शादी के युवतियों के गर्भवती होने पर जिला अस्पताल में भर्ती की गई है। इसमें अधिकतर मामले नाबालिग के गर्भवती होने के सामने आए है। ऐसे हालत में कई बार नाबालिग के गर्भवती होने पर गर्भपात कराना होता है। इसका असर नाबालिग की सेहत पर भी पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों से जिले में इस तरह के मामले तेजी से बढ़ने लगे है।

युवाओं में जागरूकता की कमीं

युवाओं में जागरूकता की कमी के कारण इस तरह के मामले बढ़ने लगे है। प्रेम प्रसंग में युवा आपस में संबंध बनाते है और ऐसी स्थिति में नाबालिग गर्भवती हो जाती है। स्थिति यह निर्मित हो जाती है कि इसकी भनक परिजनों को भी नहीं लगती। जब नाबालिग की सेहत बिगड़ने लगती है, तब नाबालिग के गर्भवती होने की जानकारी सामने आती है। ऐसे मामलों में परिजन भी बेहद चिंतित रहते है और इस तरह के मामले में समाज के किसी कलंक से कम नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से युवाओं को जागरूक करने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे है, लेकिन यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहे है। ऐसा लग रहा है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा जागरूकता अभियान कागजों तक सिमट कर रह गया है। युवाओं में जागरूकता होती तो इस तरह के मामले सामने नहीं आते।

कई मामलों में गर्भवती होने के बाद एफआईआर

नाबालिग के गर्भवती होने की जानकारी के बाद एफआईआर होती है। कई मामलों को लोकलाज के डर से लोग दबा देते है। पहले युवाओं में प्रेम प्रसंग बढ़ता है। जब नाबालिग गर्भवती होती है, तो यह मामले दुराचार में बदल जाते है। थानों में तो कई मामले ऐसे भी आते है कि नाबालिग डर के मारे घटना के बारे में परिजनों की नहीं बताती, बाद में परिजनों को पता चलने पर इन मामलों में एफआईआर की जाती है। युवतियां बालिग होने और गर्भवती होने की स्थिति के कुछ मामलों में तो युवक-युवतियों के विवाह तक कर दिए जाते है।

सोशल मीडिया से बढ़ रहे मामले

इस मामले में जानकारों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह के मामले अधिक बढ़ रहे है। युवक-युवती सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे से आसानी से संपर्क में आ जाते है। इनकी दोस्ती प्रेम प्रसंग में बदल जाती है। शासन-प्रशासन, पुलिस अपने स्तर पर मामलों को रोकने के प्रयास तो करती है, लेकिन इन मामलों पर अंकुश लगाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को जागरूक होना पड़ेगा।

इनका कहना…

इस तरह के मामलों में कमी लाने के लिए पुलिस की तरफ से अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं की मदद से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। पिछले साल की अपेक्षा इस वर्ष इस तरह के मामलों में कमी आई है। पुलिस पूरा प्रयास कर रही है कि इस तरह के मामलों को कम किया जाएं।

निश्चल एन झारिया, पुलिस अधीक्षक बैतूल

इस तरह के मामले बढ़ने का सबसे बड़ा कारण सोशल मीडिया और इंटरनेट, मोबाइल है। मामलों को कम करने के लिए महिला बाल विकास विभाग द्वारा प्रेरणा दीदी अभियान चलाया जा रहा है। इसमें कम पढ़े-लिखे होने के कारण भी ऐसे मामले सामने आते है।

विनोद इवने, बाल संरक्षण अधिकारी, बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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