Prashasanik Kona: प्रशासनिक कोना: पूर्व मंत्री समर्थक बड़े नेता आखिर पाला बदलने को क्यों तैयार?? दिग्गज नेता ने आखिर पुराने समर्थक के गांव में जन्मदिन मनाकर क्या संदेश दिया???? मेले मव आखिर क्यों बिफरी विपक्षी पार्टी की पार्षद????? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…..
Prashasanik Kona: Why are the big leaders supporting the former minister ready to change sides??

पूर्व मंत्री समर्थक के बगावती तेवर
विपक्षी पार्टी के एक कद्दावर मंत्री रहे नेता के सारनी में रहने वाले कट्टर समर्थक इन दिनों बदले-बदले से दिखाई दे रहे है। उनके स्वर बदलने के पीछे सम्मान ना मिलने की बात सामने आई है। पिछले दिनों अपने प्रिय नेता के जन्मदिन पर अखबारनबीसों ने उनसे विज्ञापन की चाहत रखी तो वे बिफर पड़े। उनका कहना था कि कौन से नेता और काहे की बधाई। यदि विज्ञापन मांगना है तो…. से मांगों। इन नामों में उन्होंने पूर्व मंत्री के बैतूल में रहने वाले कट्टर समर्थकों की ओर इशारा किया।
हालांकि यह नेताजी भूल गए है कि पूर्व मंत्री ने ही उन्हें प्रदेश डेलीगेट्स जैसे पद तक पहुंचाया है, लेकिन वे यह बात भी भूल कर एहसानफरामोश हो गए। इधर, विपक्षी पार्टी के ही एक अन्य कद्दावार नेता के जन्मदिन पर पहली बार नेता जी ने सोशल मीडिया पर बधाई संदेश देकर स्पष्ट कर दिया है कि वे अब इस गुट से बगावत का रास्ता चुन चुके है। हालांकि उनके बगावती तेवर के पीछे पर्याप्त सम्मान ना मिलने की बात सामने आ रही है। इस समय विपक्षी पार्टी में इन नेता जी की नाराजगी की चर्चा जोरशोर से हो रही है।
पूर्व समर्थक के गांव में जन्मदिन का जश्न
विपक्षी पार्टी के एक दिग्गज नेता ने कुछ दिनों पहले अपने जन्मदिन पर सैकड़ों समर्थकों की शुभकामनाएं ली। जगह-जगह केक काटकर समर्थकों का उत्साहवर्धन किया, लेकिन दोपहर में वे अपने पूर्व में कट्टर समर्थक रहे युवा नेता के गृहग्राम पहुंच गए। यहां उनका स्वागत भी हुआ और समर्थकों के साथ पहुंचकर केक भी काटा गया। नेता जी जिस युवा कांग्रेस के कट्टर कार्यकर्ता के गांव पहुंचे थे, वह कुछ ही समय पहले तक उनका खास हुआ करता था, लेकिन पाला बदलते हुए उन्होंने दूसरे गुट के प्रमुख नेता का दामन थाम लिया। इसके पीछे बड़े नेता द्वारा अपमान करने की जानकारी सामने आई।
हालांकि दिग्गज नेता ने अपना जन्मदिन गांव में मनाकर युवा कांग्रेस नेता की औकात और अपनी ताकत दिखाने की चर्चाएं की जा रही है, लेकिन उनके सलाहकार यह समझ नहीं पा रहे है कि गांव में जाकर जन्मदिन मनाने से किसका कद कम हुआ और किसका कद बढ़ा। राजनीति में यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
मेले में क्यों बिफरी महिला पार्षद
जिले के एक निकाय में इन दिनों मेले की काफी धूम है। चूंकि मेले की प्रसिद्धि दूर-दूर तक है, इसलिए आस-पास के क्षेत्र के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचते है। ऐसे में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी अपने परिवार के साथ मेले का लुफ्त उठा रहे है। निकाय के सीएमओ ने पार्षदों को यहां लगाए गए झूले में बैठने के लिए 5 पास दिए। इसी दौरान एक विपक्षी पार्टी की महिला पार्षद भी परिजनों के साथ झूले का लुफ्त उठाने के लिए पहुंच गई, लेकिन संचालक ने उसे मुफ्त में झूला झुलाने से मना कर दिया।
उसका तर्क था कि पार्षद के पास पास नहीं है और यह सुविधा केवल सत्तारूढ पार्टी के पार्षदों को दी गई है। मेला संचालक की बात सुनकर महिला पार्षद भड़क गई और उन्होंने तत्काल निकाय के आरआई को बुलाकर अपनी नाराजगी जता दी। हालांकि आरआई ने मेला संचालक को फटकार लगाते हुए विपक्षी पार्टी की महिला पार्षद को पास उपलब्ध कराकर झूला झुलाने के निर्देश दिए। इसके बाद महिला पार्षद के तेवर शांत हुए।




