Betul News: जहां सफाई थी, वहां अधिकारियों ने मंत्री जी से निरीक्षण करवाकर थपथपाई पीठ
Betul News: Wherever there was cleanliness, the officials got the minister to inspect it and pat them on the back.

एक वार्ड का निरीक्षण और व्यवस्था देखकर प्रभारी मंत्री खुश, कलेक्टर गैर मौजूदगी में सीएमएचओ कर रहे थे अगुवाई
Betul News: बैतूल। जिले के प्रमुख शासकीय अस्पताल में शनिवार रात प्रभारी मंत्री के निरीक्षण चर्चा का विषय बन गया। 350 बिस्तरीय अस्पताल का निरीक्षण अधिकारियों की पीठ थपथपाने की करतूत से चंद मिनटों में ही निपट गया। बताया जा रहा है कि रात्रि करीब 10 बजे सीएमएचओ डॉ मनोज हुरमाड़े, प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल को लेकर अस्प्ताल पहुंचे। मंत्री के साथ ना कलेक्टर मौजूद थे और ना अन्य लोग। यही वजह है कि प्रभारी मंत्री, सीएमएचओ जहां लेकर गए वहीं पहुंचे और अस्पताल की व्यवस्था देखकर इतने खुश हुए कि पूरे प्रबंधन को शाबासी दे डाली। यदि प्रभारी मंत्री वार्ड नंबर 14 के अलावा अन्य वार्ड में जाकर मरीजों का हाल पूछते और यहां की व्यवस्था देखते तो जिला अस्पताल की वास्तविकता की पोल खुल जाती। सांझवीर टाईम्स का सुझाव है कि यदि मंत्री छिंदवाड़ा प्रवास से बैतूल मार्ग से ही भोपाल लौटते हैं तो जिला अस्पताल के अन्य किसी वार्ड का औचक निरीक्षण करें अव्यवस्थाओं की पोल खुल जाएगी।

अन्य वार्डों में मरीज देखते रहे रास्ता, मंत्री वापस लौटे
प्राप्त जानकारी के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन और अधिकारियों ने मंत्री के आगमन को लेकर ग्राउंड फ्लोर पर साफ-सफाई से लेकर व्यवस्था तक दुरुस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दवाई काउंटर पर बकायदा यूनिफार्म पर केमिस्ट तैनात कर दिए गए थे। सुरक्षाकर्मी जिम्मेदारी से ड्यूटी पर तैनात थे, लेकिन जब मंत्री पहुंचे तो उनका निरीक्षण मात्र औपचारिकता तक सीमित रहा। मंत्री ने अस्पताल पहुंचते ही एक ग्राउंड फ्लोर पर स्तिथ वार्ड नम्बर 14 में प्रवेश किया वहां मौजूद दो-तीन मरीजों से हाल-चाल पूछा और डॉक्टरों से औपचारिक बातचीत कर वापस लौट गए। पूरे अस्पताल का निरीक्षण करने या मरीजों की समस्याओं को विस्तार से जानने का समय उन्होंने नहीं लिया। जबकि मरीजों और उनके परिजनों को उम्मीद थी कि मंत्री अस्पताल की वास्तविक स्थिति देखकर जरूरी सुधारों के निर्देश देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इधर मंत्री का लौटना, उधर फिर पुरानी व्यवस्था
जानकारी के मुताबिक अस्पताल में लंबे समय से जैसी शिकायतें हैं, जिनका समाधान तो किया जाता है, लेकिन यह सुधार ज्यादा दिनो तक दिखाई नहीं देता। इन मुद्दों पर मंत्री का ध्यान न जाना लोगों में निराशा का कारण बना। कई मरीजों ने कहा कि हर बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का दौरा सिर्फ दिखावे तक सीमित रह जाता है, असल सुधार कभी नहीं होता जो स्थाई रूप से होना चाहिए। मंत्री के जाने के बाद अस्पताल की वही पुरानी स्थिति वापस नजर आने लगी। निरीक्षण के दौरान जो सफाई और व्यवस्था दिखाई दी, वह महज कुछ घंटों की थी। लोगों का कहना है कि अगर मंत्री पूरे अस्पताल का निरीक्षण करते और वास्तविक हालात देखते, तो सुधार की उम्मीद बनती, लेकिन उनका यह दौरा सिर्फ औपचारिकता निभाने तक ही सीमित रहा।




