प्रशासनिक कोना: किस थानेदार को लेना पड़ा पोस्टिंग के लिए स्वजातीय पंचायत प्रतिनिधि का सहारा?? छोटे रोहित ने कौनसे साहब की करा दी बल्ले- बल्ले??? कर्मचारियों की हठधर्मिता पर तहसील राजस्व वाले यह सब क्या कह बैठे???? पढ़िए पूरी खबर विस्तार से हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…….

थानेदार को पोस्टिंग के लिए नेताजी का सहारा
राजनीतिज्ञों और थानेदारों का गठजोड़ कोई नई बात नहीं है। अपने पसंद का टीआई पदस्थ करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। पिछले दिनों जनप्रतिनिधियों की रडार पर आने के बाद कुछ थानेदारों की पदस्थापना में फेरबदल हुआ था। इनमें एक थानेदार ऐसे भी थे, जिन्हे ंलाइन भेजना पड़ा। लाइन आने के बाद इस थानेदार को फिर फील्ड के मलाईदार थाने की चाहत है, इसलिए अपने स्वजातीय और पंचायत प्रतिनिधि में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले एक नेता को साध रहे हैं। कहा जा रहा है कि पिछले दिनों थानेदार ने जुगाड़ लगाकर अपने स्वजातीय पंचायत प्रतिनिधि के साथ बड़े जनप्रतिनिधि के दरबार में हाजिरी लगाई है। हाजिरी के बाद थानेदार साहब के चेहरे की रंगत बता रही थी कि उन्हें फील गुड जैसा संदेश मिला है।
छोटे रोहित ने साहब को कराया फीलगुड
असत्य के नाम, सत्य काम करने वाले एक थानेदार साहब ने छोटे रोहित नाम से मशहूर एक अदने से कर्मचारी को बड़ी जिम्मेदारी सौंपकर अपने आप को फीलगुड महसूस कर रहे हैं। छोटे रोहित के नाम से मशहूर इस कर्मचारी ने पिछले दिनों अपने थानाक्षेत्र में एक जुएं की फड़ पकड़कर साहब का कद तो बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन पर्दें के पीछे इसकी असलियत सामने आ रही है। करीब एक दर्जन बाइक के साथ कुछ जुआरियों को पकड़कर थाने ले आए। यहां पर जिस काम के लिए छोटे रोहित को रखा है, उसने चुटकियों में कर दिखाया और बाइक समेत जुआरियों की टीम को छोड़ दिया। मतलब बिना मामला कायम किए छोटे रोहित ने सत्य की राह चलने वाले साहब के लिए एक और काम कर अपने साथ साहब को भी मलाई खिला दी, लेकिन दोनों के मलाई खाने से थाने के शेष स्टाफ में जमकर कानाफूसी चल रही है।
आखिर साहब यह क्या बोल गए
राजस्व में एक प्रमुख तहसील के बड़े अधिकारी अपनी बेहतर वर्किंग के लिए जाने जाते हैं। ईमानदारी से काम करने की उनकी पुरानी आदत परेशानी का सबब बन चुकी है। इसके पहले भी वे अपने स्टाफ से परेशान होकर खुद ही तबादला करवाने की बात कहकर चर्चें में आए थे, लेकिन बड़े साहब के कहने पर वे मान गए। अब पिछले दिनों अपने ही मुख्यालय की एक नपा के बड़े साहब के बसस्टैंड निरीक्षण के दौरान अतिक्रमण हटाने पर दोबारा कब्जा होने पर वे नाराज हो गए। तहसील के प्रमुख कहलाएं जाने वाले इन साहब को बड़े साहब की प्राथमिकता वाले क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की बात कही तो वे आग बबूला हो गए और कह पड़े कि यहां की नपा मर चुकी है। साहब की मुंह से निकले यह शब्द श्राप नहीं बल्कि पीड़ा बता रहे हैं कि नपा के जिम्मेदार भी किस तरह काम कर रहे हैं जो उनकी भी नहीं सुन रहे।




