Betul Ki Khabar: गीले फर्श पर भविष्य की तलाश, ऊपर लटक रही मौत
Betul Ki Khabar: Searching for future on wet floor, death hanging above.

विनोबा वार्ड की प्राथमिक शाला के हालात बदतर जान हथेली पर रखकर पढ़ाई करने को मजबूर नौनिहाल
Betul Ki Khabar: बैतूल। जिले में संचालित सरकारी स्कूलों के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। कहीं स्कूलों की छत से पानी टपक रहा है तो कहीं स्कूलों के छत का छज्जा ही गिर रहा है, लेकिन नौनिहाल खतरों के बीच बैठकर अपना भविष्य तलाश रहे हैं तो वहीं जिम्मेदार अधिकारी आंखे बंद कर बैठे हुए हैं। ऐसे में कब कोई अनहोनी हो जाए, इसकी फिक्र तक किसी को नहीं है।हालात यह हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में तो सरकारी स्कूलों के हाल बेहाल हैं ही खुद जिला मुख्यालय पर भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।
रिसते पानी से बचने लगा दी पन्नी,
पहला मामला जिला मुख्यालय का ही है। यहां विनोबा नगर स्थित प्राथमिक शाला का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बारिश के कारण छत से पानी टपक रहा है। हालत यह है कि शिक्षक एक कमरे में पांच क्लास लगाने के लिए मजबूर है । वहीं छत और फर्श के बीच पन्नी लगाकर पढ़ाई करवाने को मजबूर है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में स्कूल में करीब 50 बच्चे अध्ययनरत हैं और जर्जर छत के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं । ऐसे में यदि कोई हादसा होता है तो आखिर इसका जिम्मेदार कौन होगा।
इधर प्रस्ताव भेजे कई दिन बीते , नहीं हो पाई मरम्मत
दूसरा मामला भीमपुर ब्लॉक के प्राथमिक शाला आदर्श पिपरिया का है,जहां पर छत से टपकता पानी और जगह जगह से गिरते छत के प्लास्टर के बीच मासूम बच्चे पढ़ाई करने को मजबूर है।इन स्कूलों के शिक्षकों की माने तो उन्होंने कई बार विभाग के अधिकारियों को लिखित और मौखिक जानकारी दी है। लेकिन अभी तक उनकी सुनवाई नहीं हो पाई है। वही मासूम छात्रों की माने तो दहशत के बीच वह इन स्कूलों में पढ़ने को मजबूर है।बच्चों के साथ कब कोई अनहोनी घटना घटित हो जाए इसकी चिंता तक किसी को नहीं है।
मरम्मत के प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में
इस मामले में जिला शिक्षा केन्द्र के डीपीसी का कहना है कि उन्होंने जिले के 431 प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के मरम्मत कार्य के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है और अन्य मदों से भी इन शालाओं को दुरुस्त करने के प्रस्ताव भेजे गए हैं। जिनकी स्वीकृति मिलने पर ही इनका सुधार कार्य किया जाएगा। यानी कि बच्चों के भविष्य और जीवन से जुड़े प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में पड़े हुए हैं। अब देखना यह है कि कब तक मासूम बच्चे इस तरह डर और मौत के बीच शिक्षा हासिल करते हैं।
इनका कहना…..
जर्जर स्कूलों को चिन्हित कर मरम्मत के प्रस्ताव भेजे गए हैं राशि स्वीकृत होते ही स्कूलों की मरम्मत कराई जाएगी।
जितेंद्र कुमार भन्नारिया, डीपीसी, बैतूल





