Betul Samachar : वर्षो से रैलिंग विहीन करबला पुलिया का मामला पहुंचा कोर्ट
Betul Samachar: The case of Karbala culvert which has been without railing for years reached the court.

पीडब्ल्यूडी सहित प्रशासन को बनाया गया पार्टी
Betul Samachar : बैतूल। भले ही शहर के चारों ओर की सड़कें हाईवे फोरलेन से जुड़ चुकी हो, लेकिन महाराष्ट्र की तरफ जाने वाले मार्ग पर अंग्रेजों के जमाने की बनाई गई करबला घाट की पुलिया आज भी रैलिंग विहीन पड़ी हुई है। रैलिंग न होने से यहां कई बार गंभीर सड़क हादसे घटित होने के बाद नागरिकों ने पुलिया पर रैलिंग लगाने की मांग भी की, लेकिन जब कहीं कुछ नहीं हुआ तो आखिर जनहित को दृष्टिगत रखते हुए अब मामला कोर्ट में पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि एक अधिवक्ता ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए अदालत में याचिका दायर की। जिसमें प्रशासन सहित लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को भी पार्टी बनाया गया है।
बैतूल के पाथाखेड़ा निवासी अधिवक्ता और समाजसेवी धीरज गव्हाड़े ने इस मामले में बैतूल की स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कलेक्टर बैतूल और लोक निर्माण विभाग के ईई के खिलाफ कोर्ट में धारा 22 सी विधिक सहायता अधिनियम के तहत अर्जी पेश की है। जिसमें पुल के दोनों ओर रेलिंग सहित निर्धारित माप दण्डों के अनुसार उच्चगुणवत्ता और अच्छे मटेरियल से निर्माण नवीनीकरण और चौड़ीकरण के कराए जाने और पुल पर लाइट की व्यवस्था करने की गुहार लगाई गई है।

यह पुल बैतूल को अमरावती परतवाड़ा भैंसदेही, चिचोली, भीमपुर, हरदा, इंदौर और अनेक गांवों को जोड़ने वाला पुल माचना नदी पर सदर और दनोरा के रास्ते पर स्थित है। इस पुल के नीचे से माचना नदी बहती है जिसमें लगभग साल भर पानी रहता है। यह पुल लगभग 70-80 साल से पहले बनाया गया था।
जिसकी क्षमता वर्तमान भारी आवागमन को सहन किए जाने योग्य भी नहीं है। इस पुल पर से प्रतिदिन 100 से 150 यात्री बसें, भारी वाहन, दो पहियों और चार पहियों वाहनों का भी लगातार आवागमन होता है। इस पुल पर वाहनों और राहगीरों के आवागमन और सुरक्षा के लिए सड़क के दोनों किनारों पर मतलब नदी की ओर किसी भी तरह की कोई रैेलिंग निर्मित नहीं की गई है। साथ ही पुल की चौड़ाई वाहनों और राहगीरों के आवागमन के लिए पूर्णत: अपर्याप्त भी है।





