लाखापुर से पानी लाने में बुरी तरह फैल हुई इंजीनियरिंग!

0.75 एमसीएम पानी एनीकट पहुंचने के पहले ही बर्बाद, अब तीसरे मोटर लगाकर बैराज से पानी का तलाशेंगे विकल्प

बैतूल। प्यास लगने पर कुंआ खोदने की बैतूल नगरपालिका की पुरानी आदत है। किसी समय पानी के लिए माकुल इंतजाम होने के बावजूद टैंकरों से शहर के लोगों को पानी उपलब्ध कराने का भी यहां के अधिकारियों ने रिकार्ड बनाया है। इस वर्ष गर्मी ने थोड़े से तीखे तेवर क्या दिखाएं नगरपालिका की जलशाखा के अधिकारियों के जिम्मेदारों की पूरी इंजीनियरिंग फेल हो गई।

दरअसल 13 दिन पहले लाखापुर से गंगूडोह होते हुए एनीकट के लिए छोड़ा गया पानी आज तक बैतूल नहीं आ सका। यानी 0.75 एमसीएम पानी जमीन खा गई या आसमान निगल गया, इसका जवाब अधिकारियों के पास नहीं है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि लाखापुर से पानी लाने में इंजीनियरिंग की डिग्री फिसड्डी नहीं पूरी तरह से फ्लाप साबित हो गई। अब बैराज में तीसरी मोटर लगाकर पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास का नया खाका तैयार किया जा रहा है।

बैतूल नगरपालिका में पदस्थ सब इंजीनियर अपने कामों के अलावा कारनामों से ज्यादा चर्चित रहते हैं। पुराने सीएमओ ने अपने कार्यकाल में ब्रजेश खानूरकर को जलशाखा की जिम्मेदारी थी दी, तब दो साल से लोगों की परेशानी कम नहीं हुई। उनके कार्यकाल में शहर को बर्बाद करने के आरोप भी कोई और ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधि लगा रहे हैं। कुछ माह पहले नए सीएमओ ने एक बार फिर नपा के सबसे वरिष्ठ और ईमानदार सब इंजीनियर नगेंद्र वागद्रे को कार्यभार सौंपा गया था, तब उम्मीद की जा रही थी कि पेयजल व्यवस्था लाइन पर आ जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उनके पास पहले से ही शहर के कई महत्वपूर्ण कामों की जिम्मेदारी होने के कारण शहर की पेयजल शाखा में ध्यान नहीं दे पाए।

नतीजा यह हुआ कि ताप्ती बैराज की एक मोटर पहले से सुधरने के लिए भोपाल भेजी गई थी। इसे लाने के प्रयास नहीं किए गए और दूसरी मोटर खराब होने से शहर में पानी की सप्लाई ठप हो गई। पिछले दिनों नपा को टैंकरों से कई वार्डों में पानी की सप्लाई करना पड़ा। इसके बाद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रडार पर आए सब इंजीनियर व्यवस्था बनाने में खूब दौड़ धूप करते रहे, लेकिन हर तरफ लापरवाही के कारण उन्हे मुंह की खानी पड़ी। शहर के लोगों को दो दिनों तक पानी से वंचित रहना पड़ा। इसके बाद व्यवस्थाएं दुरुस्त हुई, लेकिन इसे पटरी पर आने में एक सप्ताह लग गया।

हर वर्ष पानी एनीकट आया, इस बार क्यों नहीं?

लाखापुर में लगभग दो एमसीएम पानी बैतूल शहर के लिए आरक्षित किया जाता है। बैराज की मोटर खराब होने के पहले ही नगरपालिका ने 9 मई को लाखापुर से एनीकट में सपोर्ट के लिए पानी छोड़ा था। इससे पहले गंगूडोह से छोड़ा गया पानी आसानी से एनीकट पहुंच गया था, लेकिन लाखापुर से छोड़ा गया पानी आज तक एनीकट तक नहीं पहुंचा। यह पानी एनीकट तक अब न पहुंचपाना कहीं न कहीं व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहा है।

करीब 0.75एमसीएम पानी लाखापुर डैम से गंगूडोह होते हुए एनीकट तक आना था, लेकिन यह पानी गंंगूडोह तक आने तक बिना एनीकट तक पहुंचे जमीन खा गई आसमान, इसका जवाब जलशाखा प्रभारी के पास नहीं है। पानी एनीकट तक पहुंचाने के लिए पंपों की व्यवस्था भी फिसड्डी साबित हुई। जब अधिकारियों से सवाल किया कि हर साल एनीकट तक आता है, इस बार क्यों नहीं? तो उनका तर्क था कि इस बार गर्मी ज्यादा पड़ रही है। चौकाने वाली बात यह है कि इससे अधिक तापमान में पानी एनीकट तक पहुंचा है। जिस लिहाज से सब इंजीनियर तर्क दे रहे हैं कि पानी अधिक गर्मी के कारण नहीं आ पाया। इससे उनकी इंजीनियरिंग पर ही कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

अब तीसरी मोटर लगाने की कवायद

इधर लाखापुर का पानी बैतूल लाने में फेल हुई नपा अब ताप्ती बैराज की व्यवस्थाओं को सुधारने में लगी है। दो मोटर लगी होने के बाद अब तीसरी मोटर का विकल्प नपा को याद आया। यदि पहले ही तीसरी मोटर विकल्प के तौर पर मौजूद रहती तो शहर के लोगों को एक सप्ताह का पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ता, लेकिन आदत के मुताबिक नपा के जल शाखा प्रभारी को प्यास लगने पर कुंआ खोदने की आदत का यहां भी उदाहरण देखने को मिल गया।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

Related Articles

Back to top button