प्रशासनिक कोना: आखिर थानेदार को हटाने पहले ही क्यों लिखी जा चुकी थी स्क्रिपट?? कौनसे साहब है, जिनकी अपने शीर्ष अधिकारी से 36 का आंकड़ा??? कौनसे अधिकारी माननीयों का फोन भी उठाने में कर रहे परहेज???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

थानेदार को हटाने पहले ही लिखी जा चुकी थी स्क्रिप्ट

हाल ही में एक क्षेत्र में फसाद के बाद थानेदार को हटाया गया। इसकी स्क्रिप्ट 15 दिन पहले ही लिखी जा चुकी थी। यह बदलाव दिवाली के बाद प्रस्तावित किया गया था, लेकिन अचानक हुए घटनाक्रम की वजह से पहले ही थानेदार के तबादले के बम फूट गया। चर्चा है कि इसके पीछे उस क्षेत्र के माननीय के हरिराम का बड़ा रोल है, जिसे वहां भेजा गया है, उसने हरिराम के माध्यम से तीन पेटी हर माह का आफर दिया था।

चर्चा यह भी है कि इसके साथ ही ओपन-क्लोज और गुल-बेगम और बादशाह के लिए ओपन रखने का आश्वासन भी मिला था। यही वजह है कि घटना वाले दिन माननीय का एक फोन घनघनाया और सांप भी मर गया, लाठी भी टूटी की तर्ज पर थानेदार की रवानगी हो गई और चहेते अधिकारी की माननीय ने पदस्थापना करवा दी। पूरे महकमे में इसको लेकर जमकर चर्चा चल रही है।

इनकी किसी से नहीं बैठ रही पटरी

राजस्व विभाग में मुख्यालय पर स्थित एक अधिकारी की अपने वरिष्ठ से पटरी नहीं बैठ रही है। उनके शीर्ष दो अधिकारी एक के बाद एक बदल गए। जब तीसरे ने शाहपुर ने यहां पर आमद दी तो उनके आदेश को भी तवज्जों नहीं दे पा रहे हैं। वे राजस्व विभाग को अपनी पुरानी नौकरी आबकारी की तरह चलाना चाह रहे हैं।

उक्त साहब को लगता है कि राजनीति वरदहस्त के कारण उनका बाल भी बांका नहीं हो सकता है। इसी वजह अपने वरिष्ठ अधिकारी को रिपोर्टिंग करने के अलावा उनके आदेशों की अवहेलना करना आम बात हो गई है। उनकी इसी विवादित छवि के कारण पुराने साहब को राजनैतिक साहब को मुलताई भेज दिया गया था।

साहब का यह कैसा फरमान

कुछ माह पहले लंबी पारी खेलकर इंदौर विदा होने वाली मोहतरमा का स्थान लेने वाले साहब का एक फरमान खूब चर्चा में है। चर्चा है कि इन साहब की जिस मंत्री ने बैतूल में पदस्थापना कराई है, उन्होंने साफ बोल दिया है कि यहां केवल केंद्रीय मंत्री और पार्टी के प्रदेश मुखिया के अलावा किसी को तवज्जों नहीं दी जाए।

मंत्री जी के आदेश पर यह साहब इतने तुर्रम खां बन गए हैं कि शेष माननीयों और अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के मोबाइल तक रीसिव नहीं कर पा रहे। इसके अलावा उनके चेंबर में मिलने जाने वाले कई लोगों को बैरंग लौटाया जा रहा है। साहब की इस करतूत के खिलाफ सत्तारूढ़ पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने भी मोर्चा खोल लिया है। बताते चले कि इन साहब का कार्यालय पुराने कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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