Betul Congress News: वागद्रे फूंकेंगे कांग्रेस में जान, पार्टी ने बनाया फुलफ्लैश अध्यक्ष
Betul Congress News: Vagadre will breathe life into Congress, party made fullflash president

गुटबाजी को खत्म करना और लोस चुनाव में पार्टी का वोट बैंक बढ़ाना चुनौती
Betul Congress News: बैतूल। चुनावी सैलाब के बीच किनारा ढूंढ रही कांग्रेस के कुछ सिपाही तो जहाज से कूदकर भाजपा के जहाज में सवार हो गए, लेकिन कांग्रेस में अब नई जान फूंकने की जिम्मेदारी जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष हेमन्त वागद्रे को सौंप दी है। अब वागद्रे कांग्रेस को कितनी मजबूती प्रदान करते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन जिस तरह से भाजपा कांग्रेस में सेंध लगाने में कामयाब हुई है, उससे ऐसा नहीं लग रहा कि हेमन्त वागद्रे कुछ खास कर पाएंगे और कांग्रेस के उस असंतुष्ट वर्ग को भी काबू में करने में कामयाब हो पाएंगे, जो रामू की शुरू से खिलाफत करने पर उतारू हैं।
जिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष गुड्डू शर्मा के इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामने के बाद कांग्रेस ने ग्रामीण जिलाध्यक्ष हेमंत वागद्रे को फुल फ्लैश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। वागद्रे को पार्टी ने अब जिला कांग्रेस कमेटी का पूरा दायित्व सौंप दिया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अब एकमात्र अध्यक्ष के रूप में वे काम करेंगे। प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष और संगठन प्रभारी राजीव सिंह ने इस आशय के आदेश जारी कर हेमंत को जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष मनोनीत कर दिया है। पत्र में राजीव सिंह ने कहा कि वे जिला स्तर पर पार्टी संगठन की मजबूती के लिए सौंपे गए दायित्व का निर्वहन करेंगे।
गुटबाजी से लड़ना सबसे बड़ी चुनौती
भले ही पार्टी ने हेमन्त वागद्रे को जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के उन दिग्गजों को विश्वास में लेने की होगी जो लोकसभा चुनावों को दरकिनार कर अपने घरों में बैठ राजनीतिक चाल चल रहे हैं। कांग्रेस के इस गुट ने कभी भी हेमन्त वागद्रे की उपस्थिति को स्वीकार नहीं किया है। विधानसभा चुनावों में एक वक्त ऐसा आया था, लग रहा था कि कांग्रेस में अब एकजुटता दिख रही है पर कुछ ही दिनों के भीतर फिर दूरियां बढ़ गई।
ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है कि रामू टेकाम को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद हेमन्त वागद्रे ने तो पार्टी के इस निर्णय को स्वीकार किया था , लेकिन दूसरा गुट रामू का विरोध करने दूसरे दिन ही राजधानी पहुंच गया था। कुल मिलाकर यह तय है कि इस असंतुष्ट खेमे को हेमन्त वागद्रे फूटी आंख ना सुहाए थे और ना सुहाएंगे। अब लोकसभा चुनावों के दरम्यान हेमन्त किस रणनीति के तहत पार्टी को मज़बूती प्रदान करते हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करते हैं, यह सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
अन्य दावेदारों के अरमानों पर फिरा पानी
लोकसभा चुनावी माहौल में कांग्रेस संगठन ने बिना किसी विवाद के सीधे हेमंत को शहर और ग्रामीण कांग्रेस की जिम्मेदारी देकर गुटबाजी खत्म करने का पैतरा खेला है। यदि चुनावी समय में किसी और को शहरी जिला अध्यक्ष बनाया जाता तो संगठन खड़ा करने में ही समय लग सकता था, इसलिए एक तीर से दो निशाना साधते हुए हेमंत को फुल फ्लैश अध्यक्ष बनाया गया है। पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के विश्वास पात्र होने का फायदा भी हेमंत को मिला है।





