Crime News: कोयला खदान में चोरों का आतंक, सुरक्षा गार्ड को घेरा
Crime News: Terror of thieves in coal mine, security guard surrounded

पेट्रोलिंग टीम को आता देख स्पेयर पार्ट्स लेकर भाग निकले
Crime News: सारनी। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड पाथाखेड़ा की कोयला खदानों पर कर बदमाशों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। इससे जहां कोलकर्मी डरे और सहमे हंै तो वहीं कोयला उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। खास बात यह है कि कोयला खदानों में चोरी की वारदात आए दिन हो रही है। इसकी जानकारी कंपनी के सुरक्षा विभाग से लेकर पुलिस के आला अफसर तक सभी को है। बावजूद इसके कोयला खदानों में होने वाली वारदातों पर अंकुश नहीं लगा पा रहे। यही वजह है कि खदानों में वारदात को अंजाम देने वाले चोरों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
बीती रात छतरपुर टू खदान पर चोरों ने खूब उत्पात मचाया और एक सुरक्षा गार्ड को घेर लिया। यह सब देख दूसरे सुरक्षा प्रहरी ने पेट्रोलिंग टीम और कंट्रोल रूम को सूचना दी। इस दौरान चोरों ने खदान परिसर से निकालकर स्पेयर पार्ट्स भी ले गए। पेट्रोलिंग टीम को पास आता देख कुछ चोर खदान परिसर से निकाले स्पेयर पार्ट्स को छोड़कर भाग निकले। पेट्रोलिंग टीम और सुरक्षा गार्ड्स ने सर्चिंग कर खदान परिसर के आसपास और जंगल से स्पेयर पार्ट्स एकत्रित करके पुन: खदान में जमा कराया। गौरतलब है कि छतरपुर टू खदान में दो पालियों में काम होता है।
जबकि रात्रि पाली में यह खदान बंद रहती है। इसी का फायदा चोरों द्वारा सबसे ज्यादा उठाया जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस खदान में चोर इतना आतंक मचा चुके हैं कि कई बार सब स्टेशन पर धावा बोलने और चालू लाइन काटने की वजह से खदान तक बंद रही है।

सीआईएसएफ की मांग
सभी ट्रेड यूनियनों से मिलकर बने संयुक्त मोर्चा द्वारा प्रबंधन से सुरक्षा बढ़ाने की मांग लगातार की जा रही है। कंपनी और कॉलोनी की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ की मांग भी गई है। एक सप्ताह पहले ही सीआईएसएफ के डीआईजी ने पाथाखेड़ा क्षेत्र का दौरा किया है। बताया जा रहा है कि कंपनी के 40 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को पाथाखेड़ा से दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरण करके उनके स्थान पर 110 सीआईएसएफ के जवान तैनात किए जाएंगे। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
पाथाखेड़ा क्षेत्र में है चार खदानें
वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के पाथाखेड़ा क्षेत्र में चार भूमिगत कोयला खदान है। इनमें तवा वन, तवा टू, छतरपुर वन और छतरपुर टू खदान शामिल है। इसमें से छतरपुर टू खदान को बंद करने की तैयारी कंपनी प्रबंधन द्वारा की जा रही है। हालांकि अभी इस खदान से रोजाना करीब 200 टन कोयला उत्पादन हो रहा है।
वर्तमान में इस खदान में 147 अधिकारी कर्मचारी कार्यरत है। फिलहाल कंपनी द्वारा इस खदान को बंद करने जैसी कोई बात नहीं की जा रही। खदान के जानकार बताते हैं कि छतरपुर टू खदान अभी और कुछ महीने चल सकती है। ऐसे में उसे जल्दबाजी में बंद करना पाथाखेड़ा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कोल इंडिया के लिए ठीक नहीं है। यह खदान राम सेतु में गिलहरी के योगदान की तरह कोल इंडिया में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।





