administrative corner : प्रशासनिक कोना: बड़े साहब से कैसी गुस्ताखी कर बैठे जूनियर? क्या मिली सजा?? थानेदार की आंखों के सामने आखिर सटोरिया क्यों दे रहा आमद???? चक्काजाम को रोकने में हुई नाकामयाबी के लिए कौन जिम्मेदार???? पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक कोना में विस्तार से……

administrative corner : What kind of audacity did the junior do to the elder sir? What punishment did you get?? Why is the bookie paying in front of the police station???? Who is responsible for the failure to stop the traffic jam? Read our popular column in detail in Political Corner...

administrative corner : एक बड़े साहब को जिले में आमद दिए हुए कुछ ही दिन बीते हैं, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली में लोगों का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आम लोगों की शिकायत और समस्याओं पर वे त्वरित कार्रवाई करते हैं। ऐसा ही एक मामला एक तहसील क्षेत्र के प्रमुख कहे जाने वाले साहब के बारे में संज्ञान में आते ही उन्होंने अपने दो नंबर और तीन नंबर का पावर रखने वालों को साथ लेकर वहीं पहुंच गए। उस समय तहसील के प्रमुख कहे जाने वाले साहब मौके पर नहीं थे। जब बड़े साहब के आने की इत्तला उन्हें दी तो भी उन्होंने काफी हल्के में लिया। विलंब से पहुंचने के बाद जब बड़े साहब ने उनके क्षेत्र से आ रही लंबी शिकायतों के बारे में पूछताछ शुरू की तो तहसील के प्रमुख कहे जाने वाले साहब बड़े साहब पर ही बिफर पड़े और कहने लगे कि आपके आने का इंटेशन गलत है, मुझे निलंबित कर दीजिए। उनके इतना कहते ही पूरे तहसील कार्यालय में सन्नाटा पसर गया।

चूंकि यह बात किसी और से नहीं बल्कि बड़े साहब से की थी। हालांकि उस समय कड़क मिजाज वाले बड़े साहब ने नरम दिल दिखाते हुए कोई एक्शन नहीं लिया, लेकिन तहसील क्षेत्र से लौटने के अगले ही दिन क्षेत्र के साहब को वहां से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया। कहा जा रहा है कि साहब चाहते तो उनके निलंबन का भी प्रस्ताव भेज सकते थे, लेकिन यहां पर भी दरियादिली दिखाते हुए संबंधित साहब की पत्नी की बीमारी का पता चलने पर उन्होंने कड़ा एक्शन नहीं लिया। बताते चले कि जिस क्षेत्र में यह कार्रवाई हुई वह बैतूल से 35 किमी दूर तहसील मुख्यालय है और वहां अनुविभागीय कार्यालय नहीं है।

थानेदार की आंखों के सामने काला खेल

बैतूल अनुविभाग के एक चर्चित और सबसे महत्वपूर्ण थाने में इन दिनों कुछ दिन पहले पदस्थ हुए थानेदार साहब की आंखों के सामने ही काला खेल हो रहा है। थाने में हर दिन साढ़े पांच बजे एक नामी सटोरी जो संबंधित क्षेत्र के सबसे व्यवस्तम क्षेत्र में अपना कारोबार संचालित करता है, आमद दे रहा है। उसकी रोज थाने में आमद से आसपास के लोग भी हतप्रद है। माजरा का लोगों ने पता लगाया तो वस्तु स्थिति सामने आई है कि काले खेल का नजराना पेश करने थानेदार साहब के पास जाता है। लगे हाथ वह यहां के कुछ सट्टा प्रेमी कर्मियों से पर्ची भी ले आता है। यदि बड़े साहब थाने मेें लगे सीसीटीवी कैमरे और अपने नेटवर्क से पता लगाए तो उन्हेें सौ आने सच्चाई सामने मिल जाएगी। जिस थाने की बात कर रहे हैं वह चर्चित चौराहें से महज 100 से 125 मीटर की दूरी पर स्थित है।

चक्काजाम पर छिड़ी राजनीति

पिछले दिनों अपनी मांगों को लेकर एक छात्र संगठन के नेतृत्व में कालेज के विद्यार्थियों ने चक्काजाम कर नई राजनीति छेड़ दी है। इसके 2-3 पहलू सामने आ रहे हैं। पहला यह कि जब जाम लगाया था तो एनएसयूआई कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन पर पूर्व में एफआईआर हुई, फिर यहां अभयदान क्यों दिया गया? पुलिस के दो मुंहे रवैए की जमकर आलोचना हो रही है, जबकि क्षेत्र के पुलिस अधिकारी खुद जाम को अवैध करार देते हुए प्रदर्शन कारियों से उलझ रहे थे, लेकिन बात नहीं बनी। दूसरा पहलू यह है कि बड़े अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझाइश देने में नाकाम रहे। जब बड़े साहब मौके पर पहुंचे तब जाम खत्म हुआ। यानी अधीनस्थ कर्मचारियों और पुलिस के जिम्मेदारों की इसे नाकामी से जोड़कर देखा जा रहा है।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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