Betul Ki Khabar: उधारी पर निर्भर रिटायरमेंट कर्मचारी , साल बीता नहीं मिली पेंशन,

Betul Ki Khabar: Retirement employees dependent on loans, did not get pension for years,

एक पेंशनर की हो चुकी मौत, बाकी कर रहे जद्दोजहद…

Betul Ki Khabar:(बैतूल)। शासकीय सेवा में रहने वाले कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के बाद उनके और उनके परिवार के लालन पालन का एक मात्र सहारा होता है। प्रति माह पेंशन के रूप में मिलने वाली वह राशि जिससे घर का खर्च चलने के साथ साथ रिटायरमेंट कर्मचारियों की दवाइयों का भी खर्च भी निकल जाता है। कुल मिलाकर यही पेंशन बुढ़ापे में कर्मचारी के लिए संजीवनी का काम करती है, लेकिन जानकारी मिली है कि वन वृत बैतूल के अंतर्गत पश्चिम वन मण्डल के आधा दर्जन सेवानिर्वत कर्मचारियों की पूरा साल बीत जाने के बावजूद पेंशन शुरू नहीं हो पाई है। हालात यह हैं कि अब कर्मचारी उधार की जिंदगी जीने पर मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि इन कर्मचारियों में सेवानिवृत्त हुए 4 वन रक्षक और 1 डिप्टी रेंजर शामिल हैं। मामले का सबसे दुखद पहलू यह है कि अवसाद के कारण इनमें से एक वनरक्षक की मौत तक हो चुकी है। हालांकि इस पूरे मामले को लेकर अधिकारियों का कहना है कि चूंकि कुछ मामलों में न्यायालयीन प्रक्रियाओं का पालन भी करना होता है जिस वजह से इस तरह की समस्या निर्मित होती है।

जेवर बेचकर कराया इलाज पर पति को नहीं बचा सकी पत्नी

प्राप्त जानकारी के मुताबिक वन विभाग के पश्चिम वन मण्डल में लगभग 7 से 8 माह पूर्व वनरक्षक सुशील दुबे, राजेश शर्मा, मोहन मालवीय, तथा डिप्टी रेंजर दिलबर सिंह की सेवा निवर्ति्त हुई थी, लेकिन अरसा बीत जाने के बावजूद इन कर्मचारियों की पेंशन अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है कि वनरक्षक राजेश शर्मा द्वारा इसकी शिकायत सीएम हेल्प लाइन पर भी की गई थी लेकिन शिकायत के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हो पाई। लिहाजा इसी अवसाद की वजह से श्री शर्मा को गम्भीर बीमारियों ने घेर लिया था। जानकारी मिली है कि पति के इलाज के लिए उनकी पत्नी ने अपने जेवर तक बेच दिए थे लेकिन उनकी जान नहीं बच पाई और यह परिवार आज दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर है। अन्य कर्मचारियों की स्थिति भी ये है कि इतने साल की शासकीय सेवा करने के बावजूद इन कर्मचारियों को उधार की जिंदगी बिताने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। विभागीय सूत्रों की माने तो सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन किसी भी हालातों में रोकी नहीं जा सकती । यदि ऐसा किया जाता है तो यह सीधे संविधान के अनुच्छेद 19(1) घ और 31(1) प्रत्याभूत संपत्ति अधिकारों के हनन की श्रेणी में आता है।

विभाग दे रहा न्यायालयीन प्रकरणों का हवाला

पूरे मामले को लेकर जब विभागीय अधिकारियों से जवाब सवाल किए गए तो उनका कहना है कि निश्चित रूप से सेवानिवृत्त कर्मचारी सेवा समाप्ति के बाद पेंशन पाने का हकदार होता है, लेकिन कुछ विवादित प्रकरणों के चलते पेंशन प्रभावित हो जाती है। इन मामलों में भी यही स्थिति निर्मित हुई कर्मचारियों से जुड़े कुछ प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने के चलते विभागीय अधिकारियों को नियमों के विरुद्ध जाकर आदेश जारी करने का अधिकार नहीं होता। यही वजह है कि इन कर्मचारियों के अभी तक पेंशन आदेश अभी तक जारी नहीं हो पाए हैं।

इनका कहना…

इन कर्मचारियों से सम्बंधित प्रकरण न्यायालय में चल रहे थे। वर्तमान स्थिति में सभी के पीपीओ प्रकरण भेजे जा चुके हैं जल्द ही पेंशन भी शुरू हो जाएगी।

वरुण यादव वन मण्डल अधिकारी , पश्चिम सामान्य बैतूल

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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