Betul Samachar: अजाक में 17 वर्षों से मजदूरी से कम वेतन पर नौकरी कर रहे शिक्षक
Betul Samachar: Teachers working in Ajak at less than wages for 17 years

संविलियन को लेकर एसी ने किया गुमराह, चप्पलें घिस गई नहीं मिला न्याय…
Betul Samachar:(बैतूल)। बैतूल के जनजातीय कार्य विभाग में अधिकारियों की दबंगाई और कुछ अधीनस्थों की मनमानी का ही नतीजा है कि भीमपुर ब्लाक के करीब 32 से अधिक संविदा शिक्षक मजदूरों से भी कम वेतन पर नौकरी कर रहे हैं। यह सिलसिला आज और कल का नहीं बल्कि 17 वर्षों से चला आ रहा है। एक तरफ छात्रावासों और आवासीय विद्यालय की आड़ में लाखों रुपए के बजट की अनियमित्ताओं के मामले सामने आ रहे हैं तो दूसरी तरफ अपने ही विभागों के शिक्षकों का संविलियन न कर विभाग के अधिकारी खुद विवादों में घिर गए। मजबूरी में शिक्षक नौकरी तो करे हैं, लेकिन संविलियन की आस में दर्जनों जोड़ चप्पलें घिस गई, लेकिन अधिकारियों ने पेंच अटकाते हुए उनके अधिकार पर बड़ा कुठाराघात किया है। इस मामले में न सिर्फ सहायक आयुक्त बल्कि यहां पर पदस्थ कुछ अन्य कर्मचारी भी इस मामले में शिक्षकों के संविलियन को ठंडे बस्ते में डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
प्रताड़ना के चलते उधारी पर निर्भर हो चुका परिवार
शिक्षकों के संविलियन न होने के मामले में स्थिति यहां तक पहुंच चुकी है कि बेचारे संविदा शिक्षक ना दूसरा कोई काम कर सकते हैं और ना ही नॉकरी छोड़ सकते हैं। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर जनजातीय कार्य विभाग की माध्यमिक शाला में अपनी सेवाएं दे रहे कई शिक्षकों ने बताया कि संविलियन के लिए कई बार प्रयास किया गया, लेकिन विभाग में पदस्थ सहायक आयुक्त और लेखपाल राजू सोनारे हमारी नियुक्तियों को अवैध बताकर सेवाएं समाप्त किए जाने की चेतावनी दे रहे हैं। एक शिक्षक ने बताया कि घर में पति-पत्नी के अलावा दो बच्चे भी हैं। मात्र पांच हजार रुपए के वेतन में घर के खर्च के साथ बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी बमुश्किल वहन हो पा रहा है। दूसरी ओर विभाग द्वारा संविलियन किया जा रहा और ना ही वेतन बढ़ाया जा रहा है। घर का खर्च चलाने की मजबूरी के चलते अब पूरा परिवार उधारी पर निर्भर होकर अपना जीवन यापन करने पर मजबूर हो चुके हैं। अब स्थिति यह है कि घर का थोड़ा बहुत खर्च चल सके इसके लिए भले ही प्रताड़ित होकर काम करना पड़ रहा है, लेकिन परिवार की तकलीफें देखते हुए अन्य काम करना मजबूरी बन गया है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल जनजातीय कार्य विभाग द्वारा वर्ष 2006-7 में आदिवासी विकास खण्ड भीमपुर में 32 संविदा शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। जनजातीय कार्य विभाग की शालाओं में कार्य करते हुए इन शिक्षकों को पूरे 17 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन सभी शिक्षक संविदा नीति का लाभ प्राप्त करने से अभी तक वंचित हैं। जबकि संविदा नीति के हिसाब से इन शिक्षकों का संविलियन अभी तक हो जाना था। पीड़ित शिक्षकों का कहना है कि आज भी हम सभी शिक्षकों को 5 हजार से लेकर 7 हजार रुपये मासिक वेतन पर अपना और अपने परिवार का गुजारा करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। समझा जा सकता है कि महंगाई के इस दौर में हमें और हमारे परिजनों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा होगा। सवाल ये भी है कि जब नियुक्तियां अवैध बताई जा रही हैं तो इन शिक्षकों की सेवाएं पिछले 17 सालों से कैसे ली जा रही हैं। विभाग आखिर किस मद से इन शिक्षकों को वेतन दे रहा है और यदि नियुक्तियां अवैध नहीं है तो इन्हें संविदा नीति का लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा है। इस संबंध में सहायक आयुक्त आदिवासी शिल्पा जैन से वर्जन लेने के लिए फोन किया, लेकिन हमेशा की तरह मोबाइल ब्लाक होने के कारण इस मामले में चर्चा नहीं हो सकी।





