Betul News: संस्मरण-6: राड को निकालकर बना लिया था हथियार, इसी से ढाया विवादित स्थल…
Betul News: Memoir-6: The rod was taken out and made into a weapon, this was used to destroy the disputed site...

Betul News: संघ के जिला प्रचार मोहन नागर की उपस्थिति में नेहरू युवा केन्द्र विवेकानंद हाल में आयोजित कार्यक्रम के पश्चात रेल द्वार शाम को अयोध्या के लिए प्रस्थान 30 नवम्बर 1992 को रात्रि 11 बजे अयोध्या पहुंचे। उस समय सभी कार सेवकों में बहुत ही जुनून था। अयोध्या पहुंचने के बाद सरयू नदी के किनारे खेतों में धान की घास बिछाकर रात्रि में विश्राम किया। हम लोग लगभग उस समय अपने बड़े टेंटे से लगभग 300 कारसेवक थे। 31 नवम्बर से 6 दिसम्बर शाम 5 बजे तक हम सभी कार सेवकों ने अयोध्या राम जन्मभूमि स्थान के बारे में साधु संत एवं जानकारों से जानकारी एकत्रित की। धीरे-धीरे 5 नवम्बर की तारीख आ गई। लाखों लोग सरयू घाट पर दर्शन एवं स्नान के लिए वहां पहुंच चुके थे।(Betul News)
6 दिसम्बर को सुबह 9 बजे रामजन्म स्थान के पास गए थे। वहीं पास में ही बहुत ही विशाल मंच था। मंच को बहुत ही सजा रखा था। मंच पर अशोक सिंघल, गिरीराज किशोर, विनय कटियार, आचार्य धर्मेन्द्र महाराज, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, जयभान सिंह एवं बड़ी संख्या में साधु संत महाराज बैठे थे। सभी के गले में भगवा दुपट्टा था।(Betul News) 5 लाख के लगभग कार सेवक एकत्रित हो गए थे। सिंघल जी मंच से बार-बार कारसेवकों से अपील कर रहे थे कि ढांचे के पास नहीं जाना है। मुख्यमंत्री कल्याण सिंह अपील चल रही थी कि प्रदर्शन करना है कार सेवा नहीं। 11 बजे लोग गुम्बद पर चढ़ गए। वहीं से लोहे की राडे निकाल कर उसी के हथियार बना लिए। संचार माध्यम ज्यादा नहीं होने से परिवार के लोग भी बहुत चिंतित थे।(Betul News)
शाम 5 बजे दिसम्बर को ढांचा गिरने के बाद 5.30 बजे रामलला को वहां विराजित करके अपने टेंटों में पहुंचे। कई लोग भीड़ में बिछड़ चुके थे और संचार व्यवस्था भी ध्वस्त हो चुकी थी। सभी जगह आग और दंगे फैल चुके थे, कर्फ्यू भी लग चुका था। (Betul News) शाम को मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के त्याग पत्र की जानकारी प्राप्त हुई। भारत सरकार की गाड़ियां अयोध्या की तरफ पहुंचने लगी थी। आचार्य धर्मेर्न्द्र महाराज की ओर से अपील पहले ही हो चुकी थी कि ढांचे की कुछ सामग्री अपने साथ ले आओ। इसी बीच धीरे-धीरे सभी लोग मिलने लगे थे। अपने-अपने मठ के अनुसार जब गिनती हुई तो रामप्रसाद नागले उर्फ झिंगा के नहीं पहुंचने की खबर ने सभी को चिंतित कर दिया।(Betul News)
कई लोग के घायल एवं ढांचे में दब जाने की भी खबरें चलने लगी थी। रात 11 बजे तक अयोध्या में प्रस्थान का निर्गम हुआ। कर्फ्यू के बीच खेतों-खेतों से होते हुए फैजाबाद पहुंचे। वहां से परिवार वालोंं को कुशल होने समाचार भिजवाया पर रामप्रसाद झिंगा ने हम सबको ङ्क्षचतित कर दिया था, किंतु भगवान राम की कृपा से वह भी 15 दिन बाद बैतूल पहुंचा, जिसके बाद हम सब ने राहत की सांस ली। अंत में इतना कहना चाहूंगा भगवान राम की कृपा से अयोध्या में विशाल मंदिर बन गया, यहां बार-बार जाकर राम लला के दर्शन करते रहूं।(Betul News)
सबको जय श्रीराम….
(जैसा कारसेवक अलकेश आर्य ने सांझवीर टाईम्स को बताया)





