Betul College News: कॉलेजों में एक वर्ष से जनभागीदारी समिति का गठन नहीं, कामकाज ठप

कलेक्टर पदेन अध्यक्ष, लेकिन व्यवस्तता के कारण बैठकें नहीं, विद्यार्थियों की बड़ी परेशानी

Betul College News: बैतूल। बीते 30 नवंबर को कालेजों में जनभागीदारी समिति का अस्तित्व खत्म हो गया है। एक साल बीत जाने के बाद राज्य शासन न केवल बैतूल, बल्कि प्रदेश में भी जनभागीदारी समिति गठित नहीं की है। इसका सीधा असर जेएच कालेज के लगभग 13500 और शेष जगह के 7 हजार से अधिक विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।

जनभागीदारी समिति नहीं होने के कारण विद्यार्थी हित में कई फैसले एक वर्ष से नहीं लिए जा सके हैं। कहने को तो कालेजों में फिलहाल कलेक्टर पदेन अध्यक्ष है, लेकिन अत्यधिक व्यवस्तता के कारण एक भी बैठक आयोजित नहीं हो सकी है। कुछ कालेजों में प्राचार्य अपनी मानमानी कर रहे हैं। इससे छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है।

राज्य शासन ने 4 वर्ष पहले अधिकांश जिलों में जनभागीदारी समिति की घोषणा कर भाजपा और अभाविप से जुड़े लोगों को जनभागीदारी समिति में एडजेस्ट किया था। यह नियुक्तियां होने के बाद कालेजों में निर्माण कार्यों से लेकर छात्र हित में कई निर्णय लिए गए। विद्यार्थियों को माकुल सुविधाएं भी मिली।

लगभग 3 माह में जनभागीदारी की एक बैठक होने से विद्यार्थियों की मांग के अनुसार जनभागीदारी अध्यक्ष और सदस्यों ने बैठकों में कई प्रस्ताव रखे। यदि जिले के सबसे बड़े कालेज जेएच कालेज की बात करें तो यहां घनश्याम मदान के अध्यक्षीय कार्यकाल कई साहसिक और छात्र हित में निर्णय लिए गए।

छात्रों के लिए फर्नीचर और पुस्तकों के क्रय करने को लेकर कई निर्णय होते रहे। ऐसे ही निर्णय मुलताई, आमला, भैंसदेही, आठनेर, शाहपुर, बगडोना, चिचोली, भीमपुर आदि क्षेत्र में बैठक लेकर छात्र हित में निर्णय लिए गए।

प्राचार्य हुए पावरफुल, कई जगह शिकायत

इधर सूत्र बताते हैं कि जनभागीदारी अध्यक्ष का पद एक वर्ष से अस्तित्व में न होने के कारण कुछ कालेजों में प्राचार्य पावरफुल हो गए हैं। गुपचुप तरीके से कुछ निर्माण कार्य और अन्य स्वीकृतियां दी जा रही है, जबकि कई ऐसे काम भी है जो कलेक्टर के बिना स्वीकृति के कर लिए गए है।

हालांकि इन कामों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है, लेकिन दबी जुबान से जिले के 2-3 कालेजों में प्राचार्यों में अपना सिक्का चलाए जाने की चर्चा चल रही है। जबकि अधिकांश कालेजों में राज्य शासन द्वारा प्रभारी प्राचार्यों की नियुक्तियां की गई हैं। कहीं भी स्थाई प्राचार्य नियुक्त नहीं किए गए हैं।

जनभागीदारी अध्यक्षों की नियुक्ति में लंबा विलंब

इधर जानकार बताते हैं कि कालेजों में नए जनभागीदारी अध्यक्षों की नियुक्ति को और अधिक समय लग सकता है। सरकार एक साथ जनवरी माह तक जिले के बड़े और छोटे शासकीय कालेजों में जनभागीदारी अध्यक्षों की नियुक्ति कर सकती है। इसके लिए भाजपा से जुड़े और अनुभवी लोगों की सूची पूर्व में ही जिला मुख्यालय से भोपाल भेजी जा चुकी है। इन पर अभी मंथन चल रहा है।

बड़े कालेजों में अनुभवी छात्र नेताओं को तवज्जों देकर छात्र हित में निर्णय लेने के लिए जनभागीदारी समितियों के गठन पर फिलहाल ब्रेक लगा है। अगले दो माह कालेजों में जनभागीदारी अध्यक्षों की नियुक्ति संभव दिखाई नहीं दे रही है।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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