Betul News: जल संकट की आहट के बीच गुपचुप 25 रुपए फीट तक बढ़ गए दाम

बोरिंग संचालकों की बल्ले-बल्ले, कम बारिश के कारण मशीन की इतनी मांग की एक पखवाड़े तक की वेटिंग
Betul News: बैतूल। जिले में अल्प वर्षा के चलते आगामी दिनों में गंभीर जल संकट की आशंका ने आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। घरों में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए लोग अभी से नलकूप खनन कराने में जुट गए हैं। हालात ऐसे हैं कि बोरिंग कराने वालों की संख्या अचानक बढ़ने से इस कारोबार में तेजी आ गई है।
बढ़ती मांग के बीच बोरिंग संचालकों ने भी रेट बढ़ा दिए हैं। नतीजतन जहां बोरिंग कारोबारियों के पास काम की भरमार है, वहीं आम नागरिकों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए पहले से ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है।
मांग इतनी कि मशीनों के लिए भी करना पड़ रहा इंतजार
जिले में बारिश की कमी और भूजल को लेकर बढ़ती चिंता के बीच नलकूप खनन कराने की होड़ जैसी स्थिति बन गई है। बोरिंग व्यवसाय से जुड़े कर्मचारियों के मुताबिक, जिले में करीब 15 बड़ी और आधा दर्जन छोटी बोरिंग मशीनें संचालित हैं। अचानक बढ़ी मांग के कारण एक-एक संचालक के पास 15 से 20 साइटों की वेटिंग चल रही है।
काम की अधिकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कमीशन के आधार पर किराए की मशीन लेकर काम करने वाले छोटे संचालकों को भी अब आसानी से मशीनें नहीं मिल पा रही हैं।
95 रुपए वाला बोर पहुंचा 115 रुपए प्रति फीट तक
बोरिंग और केसिंग के रेट में हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों का बजट भी बिगाड़ दिया है। जानकारी के मुताबिक, साढ़े चार इंच के बोरिंग का रेट पहले 95 से 100 रुपए प्रति फीट था, जो अब बढ़कर करीब 115 रुपए प्रति फीट तक पहुंच गया है। इसी तरह साढ़े छह इंच के बोर का पुराना रेट 100 रुपए प्रति फीट था, जो अब 120 से 125 रुपए प्रति फीट तक बताया जा रहा है।
केसिंग के दाम भी कम नहीं हैं। लोहे की केसिंग करीब 450 रुपए प्रति फीट और पीवीसी केसिंग 300 से 350 रुपए प्रति फीट तक पहुंच गई है। इसके अलावा मोटर, वायर और अन्य जरूरी सामग्री पर होने वाला खर्च अलग से उठाना पड़ रहा है। जल संकट की चिंता, जेब पर बढ़ता बोझबोरिंग व्यवसाय से जुड़े कर्मचारियों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि अचानक मांग बढ़ने से कारोबार में तेजी आई है।
हालांकि, बढ़े हुए रेट के पीछे लागत और मांग का कितना योगदान है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में नागरिकों के सामने भी असमंजस की स्थिति है। एक तरफ भविष्य में पानी की किल्लत का डर है, तो दूसरी तरफ नलकूप खनन पर बढ़ता खर्च। कुल मिलाकर, अल्प वर्षा से उपजी जल संकट की आशंका ने बोरिंग कारोबार को रफ्तार दे दी है। अब सवाल यह है कि पानी की चिंता में नलकूप खुदवाने को मजबूर लोगों को राहत मिलेगी या बढ़ती मांग के बीच उनकी जेब पर बोझ और बढ़ेगा।
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