Betul Samachar: वन विभाग में अपना नियम, एक ही रेंजर को 2-2 प्रभार

कई सीनियर वर्षों से लूप लाइन में बैठे कर भोग रहे वनवास, अधिकारियों का भी ध्यान नहीं

Betul Samachar: बैतूल। जिले के वनवृत में इन दिनों पदस्थापनाओं को लेकर कर्मचारियो में गंभीर असंतोष व्याप्त है। विभाग के उच्च अधिकारियों पर मनमानी, बदनीयती और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने के आरोप लग रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सेकंड लाइन में शामिल चहेते अधिकारियों को नियम ताक पर रख मनचाही और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जबकि कई काबिल और अनुभवी अधिकारियों को जानबूझकर लूप लाइन में बैठाकर वनवास झेलने को मजबूर किया जा रहा है।

इस स्थिति ने विभाग के भीतर कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और अधिकारियों की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि पदस्थापनाओं में नियमों और आवश्यकता की अनदेखी करते हुए कुछ रेंजरों को दो-दो महत्वपूर्ण प्रभार सौंप दिए गए हैं, जबकि अन्य योग्य अधिकारी उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें जिम्मेदारी नहीं दी जा रही। इससे न केवल प्रशासनिक संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि कार्य भी प्रभावित हो रहा है।

रेंजरों को सामान्य और उत्पादन सहित दे दिए दो-दो प्रभार

सूत्रों के जानकारी के अनुसार भैसदेही परिक्षेत्र अधिकारी गुमान सिंह नरगेस की मूल पदस्थापना उत्पादन की है, लेकिन लम्बे समय से यह भैंसदेही सामान्य परिक्षेत्र अधिकारी की दोहरी भूमिका निभा रहे हैं। जबकि इनके कार्यकाल में जंगलों में अतिक्रमण और कर्मचारियो के कार्यालय में ही जुआ खेलने जैसे प्रकरण विभाग की छवि को बट्टा लगा चुके हैं। ऐसे में एक ही अधिकारी को दोहरी जिम्मेदारी देना प्रशासनिक समझ पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

इसी तरह भौरा रेंज के अधिकारी विजेंद्र तिवारी को परिक्षेत्र भौंरा (सामान्य) के साथ-साथ भौंरा डिपो का भी प्रभार दे दिया गया है। दो अलग-अलग सेक्शनों का कार्यभार होने से दोनों ही जगहों के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। भैंसदेही रेंजर को जहां सामान्य और उत्पादन दोनों के लिए अलग-अलग डीएफओ को रिपोर्ट करना पड़ रहा है, वहीं भौरा रेंजर के सामने भी समन्वय की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।

 आधा दर्जन उप वन क्षेत्रपाल बैठे लूप लाइन में

वन विभाग में इस तरह की व्यवस्था से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सूत्रों का कहना है कि विभाग में मुंह देखकर पदस्थापना की जा रही हैं। डिप्टी रेंजर नामदेव कवड़े को मुलताई उत्पादन से हटा दिया गया, जबकि उप वन क्षेत्रपाल राजकुमार आर्य वरिष्ठ होने के बावजूद लूप लाइन में बैठे हैं।

इसी तरह कैलाश खातरकर इन्हें भी भौरा सामान्य से उठाकर चिचोली उत्पादन भेज दिया गया, कमल किशोर खतारे और गुलाब सिंह उइके जैसे कई सक्षम और नियमों के अनुसार योग्य कर्मचारी जिम्मेदारी मिलने के हकदार हैं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।

कर्मचारियों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो न केवल विभागीय कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है, बल्कि कर्मचारियों का मनोबल भी टूट रहा है। अब जरूरत है कि उच्च अधिकारी पदस्थापनाओं में पारदर्शिता अपनाएं और योग्यता व अनुभव के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लें। मामले को लेकर मुख्य वन संरक्षण वासु कनोजिया से सम्पर्क किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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