Betul Samachar: भर्ती पर सवाल, सेवा समाप्ति के नोटिस, फिर भी जंगलों में जिम्मेदारी बरकरार!

1999 की भर्ती से जुड़े 68 कर्मचारियों पर सवाल, 28 अब भी सेवाओं में, रिश्वत मांगने की शिकायत और सागौन कटाई के आरोपों पर जांच का इंतजार

Betul Samachar: बैतूल। दक्षिण वनमंडल की ताप्ती रेंज में सागौन कटाई और वनभूमि पर अतिक्रमण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई और जांच प्रतिवेदन को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। आखिर जंगलों में अवैध गतिविधियों पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही? इस सवाल के बीच वर्ष 1999 में कथित तौर पर नियम विरुद्ध तरीके से भर्ती किए गए वन कर्मचारियों की तैनाती और उनकी कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

आरोप है कि करोड़ों की वन संपदा की सुरक्षा ऐसे कर्मचारियों के भरोसे है, जिनकी भर्ती और नियमितीकरण को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है। बताया जा रहा है कि इन कर्मचारियो को डर है कि, भर्ती नियम विरुद्ध होने पर इन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी मिलने की सम्भावना कम है, लिहाजा अतिरिक्त कमाई के जरिए भविष्य तो सुरक्षित किया ही जा सकता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 1999 में बैतूल वनवृत्त में 68 कर्मचारियों की सीधी भर्ती की गई थी। आरोप है कि इन कर्मचारियों ने निर्धारित प्रशिक्षण, लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा की प्रक्रिया पूरी नहीं की थी। बाद में उन्हें नियमित भी कर दिया गया। इनमें से करीब 40 कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि 28 कर्मचारी विभिन्न वनमंडलों के अंतर्गत पदस्थ बताए जा रहे हैं।

बताया जाता है कि भर्ती और नियमितीकरण का मामला न्यायालय पहुंचा, जहां भर्ती प्रक्रिया को नियम विरुद्ध मानते संबंधित कर्मचारियों की पात्रता पर सवाल उठे। इसके बाद अप्रैल में सेवा समाप्ति के नोटिस जारी किए गए। हालांकि कर्मचारियों ने न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया, जिसके आधार पर वे फिलहाल सेवाओं में बने हुए हैं। अब सवाल यह है कि विवादित भर्ती वाले कर्मचारियों की पदस्थापना और जिम्मेदारियों की निगरानी किस तरह की जा रही है?

जनसुनवाई में रिश्वत मांगने का आरोप, जांच पर नजर

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब जनसुनवाई में झल्लार सर्किल के डिप्टी रेंजर शिवनाथ वाघमारे के खिलाफ चार वन सेवकों ने शिकायत की। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उनसे वेतन में से चार-चार हजार रिश्वत के रूप में मांगे गए। वाघमारे भी वर्ष 1999 की भर्ती से संबंधित बताए जा रहे हैं। उन पर केरपानी सर्किल में सागौन कटाई और अतिक्रमण को बढ़ावा देने के आरोप लगने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

पेंशन-ग्रेच्युटी की चिंता या जंगल की सुरक्षा से समझौता?

सूत्रों के मुताबिक, सेवा समाप्ति और भविष्य में मिलने वाले आर्थिक लाभों को लेकर कर्मचारियों में असमंजस है। इसी बीच वाघमारे के कथित बयान को लेकर चर्चा है कि नौकरी के बाद पेंशन और ग्रेच्युटी मिलेगी या नहीं, इसका भरोसा नहीं है, इसलिए जंगल से कमाई कर लेनी चाहिए। यदि यह कथन सही है, तो यह वन विभाग की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब देखना यह है कि विभाग शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं, कथित भर्ती अनियमितताओं पर स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं और वन संपदा को नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर जवाबदेही तय होती है या नहीं। जंगलों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले को लेकर मुख्य वन संरक्षक मधु वी राजू के मोबाइल नम्बर 942479300 तथा दक्षिण वन मंडल डीएफओ अरिहंत कोचर के नम्बर 9424790400 पर उनका पक्ष लेने सम्पर्क किया गया, लेकिन दोनों अधिकारियों ने फोन रिसीव नहीं किया।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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