Betul Samachar: चार महीने तक तबादला आदेश को ठेंगा, अब जाकर ज्वाइन की नई पदस्थापना!

राजनीतिक रसूख के आगे झुकने को तैयार नहीं हुए डीएफओ, वन रक्षक की गैरहाजिरी के चार माह के वेतन पर उठे सवाल
Betul Samachar: बैतूल। दक्षिण वन मंडल बैतूल में तबादला आदेश के पालन को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमला परिक्षेत्र में पदस्थ एक वन रक्षक का तबादला जून में भैंसदेही किया गया, लेकिन नई पदस्थापना पर ज्वाइन करने में उसे करीब चार महीने लग गए।
विभागीय चर्चाओं में वन रक्षक के राजनीतिक रसूख और तबादला निरस्त कराने के कथित प्रयासों की चर्चा है। अब वन रक्षक ने नई पदस्थापना पर आमद तो दे दी है, लेकिन इन चार महीनों के वेतन का हिसाब क्या होगा, यह बड़ा सवाल बन गया है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दक्षिण वन मंडल के आमला परिक्षेत्र अंतर्गत लादी सर्किल की चुटकी बीट में पदस्थ वन रक्षक भीमराव सातनकर का तबादला 15 जून 2026 को डीएफओ अरिहंत कोचर ने भैंसदेही परिक्षेत्र की पूर्व कसई बीट में किया था। बताया जा रहा है कि आदेश जारी होने के बाद वन रक्षक ने तबादला निरस्त कराने के प्रयास किए।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए भाजपा के कुछ नेताओं के माध्यम से भी दबाव बनवाने की कोशिश की गई, लेकिन आदेश में बदलाव नहीं हुआ। विभागीय चर्चाओं के अनुसार, वन रक्षक ने करीब चार महीने तक नई पदस्थापना पर आमद नहीं दी। इस दौरान आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ और संबंधित कर्मचारी की अनुपस्थिति को लेकर विभाग ने क्या कार्रवाई की, यह स्पष्ट होना बाकी है। आखिरकार करीब पांच दिन पहले वन रक्षक ने भैंसदेही परिक्षेत्र में ज्वाइन कर लिया।
अब चार माह के वेतन का हिसाब कौन देगा?
मामले में सबसे बड़ा सवाल पिछले चार महीने के वेतन को लेकर है। यदि संबंधित कर्मचारी इस अवधि में ड्यूटी पर उपस्थित नहीं था, तो उसका वेतन किस आधार पर निकाला जाएगा? क्या अनुपस्थिति दर्ज की गई, कोई अवकाश स्वीकृत हुआ या विभाग ने अन्य कोई व्यवस्था की?
इन सवालों का जवाब विभागीय रिकॉर्ड से ही सामने आ सकेगा। नियमों के मुताबिक, वेतन का निर्णय वास्तविक उपस्थिति, स्वीकृत अवकाश और लागू सेवा नियमों के आधार पर होना चाहिए। इस संबंध में डीएफओ अरिहंत कोचर से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बैठक में व्यस्त होने के कारण उनसे चर्चा नहीं हो सकी।
वहीं वन रक्षक भीमराव सातनकर का कहना है, ‘मेरे द्वारा हाल ही में भैंसदेही परिक्षेत्र ज्वाइन कर लिया गया है। माताजी के बीमार होने की वजह से अभी तक ज्वाइन नहीं किया गया था। अब देखना यह है कि वन विभाग चार महीने की इस अवधि का रिकॉर्ड सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करता है या मामला विभागीय चर्चाओं तक ही सीमित रहता है।
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