Betul Politics News: जिला मुख्यालय की सीट जिसने जीती, अधिक विधायक उसी पार्टी के

Betul Politics News: Whoever won the district headquarters seat, more MLAs are from the same party.

संयोग ऐसा कि अधिकांश मर्तबा सरकार भी उसी पार्टी की बनी

Betul Politics News : (बैतूल)। मतगणना के पहले चुनाव परिणामों पर सबकी नजर लगी हुई, लेकिन कुछ मिथक ऐसे भी है जो जीत-हार को लेकर निर्णायक साबित होते आए हैं, इसलिए इस बार भी सबकी नजर पुराने मिथक पर टिकी हुई है। जिला मुख्यालय की बैतूल विधानसभा सीट पर अक्सर जीत-हार को लेकर सबकी नजर टिकी रहती है। दरअसल यहां से जीत हासिल करने वाले प्रत्याशी की शेष अन्य उम्मीदवार भी जीत हासिल करते आए हैं। इसे गजब का संयोग भी कहे कि अधिकांश मर्तबा उसी पार्टी की सरकार भी प्रदेश में बनी है। यही वजह है कि जिला मुख्यालय की सीट पर इस बार भी सबकी नजर टिकी हुई है।

मप्र के गठन के बाद सबसे पहले पंडित रविशंकर शुक्ल मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद से मप्र मेें कुल 35 मुख्यमंत्री ने पदभार ग्रहण किया है। इस दौरान बैतूल जिले की पूर्व में 6 सीट और बाद में 5 सीटों पर हुए चुनाव और उपचुनाव में अक्सर चौकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। बैतूल को लेकर कई मिथक ऐसे हैं, जिनकी प्रदेश तक चर्चा होते आई है। पहला तो यह है कि बैतूल सीट से अब तक जिस पार्टी का विधायक ने जीत हासिल की है, प्रदेश में उसकी सरकार बनते आ रही है। यह मिथक लगातार बरकरार है। इस बीच एक और मिथक सामने आ रहा है कि जिला मुख्यालय की सीट जीतने वाले विधायक की पार्टी अन्य विधानसभाओं पर भी अधिक सीट जीत हासिल करते आ रही है। यानी जिस पार्टी ने बैतूल विधानसभा सीट पर फतेह हासिल कर ली। अक्सर उसी के अधिकांश विधायक विधानसभा पहुंचे हैं। संयोग से उसी पार्टी की सरकार लगातार बनते आ रही है। देखने लायक यह रहेगा कि इस मर्तबा यह मिथक टूटता है या कायम रहता है।

वर्ष 1990 (Betul Politics News)

वर्ष 1990 के विधानसभा चुनाव में भाजपा भगवत पटेल ने बैतूल सीट से जीत हासिल की थी। तब सरकार सुंदरलाल पटवा की बनी। इस दौरान बैतूल जिले की मुलताई से मनीराम बारंगे, आमला से कन्हैयालाल ढोलेकर, घोड़ाडागरी से रामजीलाल उइके, भैंसदेही से केशर सिंह चौहान और मासोद से वासुदेव ठाकरे ने जीत हासिल की थी। यानी 1990 में बैतूल जीतने पर सभी 6 विधायक भाजपा के बने और सरकार भी इसी पार्टी की बनी।

वर्ष 1993 (Betul Politics News)

वर्ष 1993 में फिर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ। वर्ष 1992 तक राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था। इसके बाद हुए चुनाव में दिग्विज सिंह की सरकार बनी और जिला मुख्यालय से डॉ. अशोक साबले ने जीत हासिल कर मंत्री पद भी हासिल किया। इस दौरान बैतूल जिले की मुलताई से पीआर बोड़खेे, आमला से गुरुबक्स अतुलकर, घोड़ाडागरी से प्रताप सिंह उइके, भैंसदेही से गंजन सिंह कुमरे, मासोद से रामजी महाजन ने जीत हासिल की थी। 1993 में भी जिला मुख्यालय की सीट जीतने पर 6 विधायक कांग्रेस के बने।

वर्ष 1998 (Betul Politics News)

वर्ष 1998 में एक बार फिर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह की सरकार सत्ता में आई। बैतूल से विनोद डागा विधायक चुने गए थे। इस दौरान बैतूल जिले की मुलताई से निर्दलीय डॉ सुनीलम जीत हासिल करने में सफल रहे, लेकिन जिले की शेष सीट आमला से भाजपा के हीराचंद चंदेलकर, घोड़ाडागरी से कांग्रेस के प्रताप सिंह, भैंसदेही से महेंद्र सिंह चौहान, मासोद से भाजपा के चंद्रशेखर देशमुख ने जीत हासिल की थी। इस वर्ष मिथक जरूर टूटा।

वर्ष 2003 (Betul Politics News)

वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में दस साल से काबिज दिग्विजय सिंह सरकार का पतन हुआ और उमा भारती मुख्यमंत्री बनी। बैतूल से जहां शिवप्रसाद राठौर विधायक चुने गए। इस दौरान बैतूल जिले की मुलताई से फिर निर्दलीय डॉ सुनीलम जीत हासिल करने में कामयाब रहे। आमला से कांग्रेस की सुनीता बेले, घोड़ाडागरी से भाजपा के सज्जन सिंह उइके, भैंसदेही से भाजपा के महेंद्र सिंह चौहान और मासोद से कांग्रेस के सुखदेव पांसे ने जीत हासिल की थी। इस बार कांग्रेस के चार विधायक चुने गए और सरकार इसी पार्टी की बनी।

वर्ष 2008 (Betul Politics News)

वर्ष 2008 में फिर प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। इस बार बैतूल से अलकेश आर्य विधायक चुने गए। इस दौरान बैतूल जिले की मुलताई से कांग्रेस के सुखदेव पांसे, आमला से भाजपा के चैतराम मानेकर, घोड़ाडागरी से गीता उइके, भैंसदेही से कांग्रेस के धरमू सिंह ने जीत हासिल की। इस बार बैतूल समेत तीन विधायक भाजपा के बने और सरकार भी इसी पार्टी की बनी।

वर्ष 2013 (Betul Politics News)

वर्ष 2013 में फिर से शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में सत्ता हासिल की। बैतूल से हेमंत खंडेलवाल ने चुनाव में जीत हासिल की तो शेष चार सीट मुलताई से चंद्रशेखर देशमुख, आमला से चैतराम मानेकर, घोड़ाडागरी से सज्जन सिंह उइके, भैंसदेही से महेंद्र सिंह चौहान ने जीत हासिल की। इस तरह भाजपा ने पांचों सीट जीतकर इतिहास रचा। बैतूल सीट जीतने पर इस बार भाजपा सभी सीट पर फतह हासिल करने में कामयाब रही।

वर्ष 2018 (Betul Politics News)

वर्ष 2018 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ। कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी तो जिला मुख्यालय की सीट पर कांग्रेस के निलय डागा विधायक चुने गए। मुलताई से सुखदेव पांसे, घोड़ाडोंगरी से बह्मभलावी, भैंसदेही धरमू सिंह सिरसाम विधायक बने। केवल आमला सीट भाजपा के खाते में गई। कांग्रेस की सरकार बनने पर भी मिथक बरकरार रहा। चार विधायक पार्टी के बने और सरकारी भी इसी पार्टी की बनी।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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