Prashasnik Kona : प्रशासनिक कोना: थानेदार का यह कैसा याराना?? जिसकी खूब हो रही चर्चा??? कौनसे साहब कुर्सी बचाने अपना रहे संघम-शरणम- गच्छामि की रणनीति???? आखिर किस थाना प्रभारी को लेकर खूब चल रही कानाफूसी????? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…..
Administrative Corner: What kind of friendship is this between the police officer? Which is being widely discussed??? Which officer is adopting the strategy of Sangham-Sharanam-Gachhami to save his chair????

थानेदार का यह कैसा याराना?
कुछ दिनों पहले ही एक शहर के छोटे कहलाएं जाने वाले थाने से बड़े थाने भेजे गए कार्यवाहक थानेदार के याराना के इन दिनों खूब चर्चा हो रही है। इसकी जानकारी शायद कप्तान को भी नहीं है। कहा जा रहा है कि यदि कप्तान उक्त थाना प्रभारी के 15 दिनों की व्हाट्सएप कॉल चेक कर ले तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। चर्चा है कि इन थानेदार साहब का एक ठग और ब्लैकमेलर टाइप के व्यक्ति से जमकर याराना है। इसी वजह उस थाने में पोस्टिंग के बाद शहर के कई सट्टा खबाड़ संबंधित ठग और ब्लैकमेलर को फोन लगाकर फिल्डिंग जमाने की कवायद कर रहा है। कहा तो यह भी जा रहा है कि थानेदार साहब ने ब्लैकमेलर और मुखबिर की बात को नजर अंदाज न करते हुए बड़े थाने में भी फिल्डिंग जमा ली है। अब कप्तान साहब की नजर तिरछी हुई तो थानेदार पर गाज गिरने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
कुर्सी बचाने के लिए संघम शरणम गच्छामि की रणनीति
कुर्सी बचाने के लिए संघम-शरणम-गच्छामि करने वाले प्रभारी तहसीलदार अपने अधीनस्थ एक महिला नायब तहसीलदार को लेकर सख्त रवैया दिखा रहे हैं। इस रवैए का कारण पूर्व में अन्य विभाग की पदस्थापना का है, जहां यह प्रभारी तहसीलदार खुद नायब तहसीलदार हुआ करते थे और उस महिला नायब तहसीलदार के पास प्रभारी तहसीलदार का पद था। बस इसी कड़वड़ाहट के कारण अपने आप को स्मार्ट समझने वाले प्रभारी तहसीलदार अधीनस्थ तहसीलदार को लेकर सख्ती दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। वैसे भी इनकी पटरी अपने शीर्ष अधिकारियों से नहीं बैठ रही है। वे जनप्रतिनिधियों की भी स्मार्टनेस दिखाने के चक्कर में खासी किरकिरी करा चुके हैं।
थाना प्रभारी को लेकर कानाफूसी
एक फसाद के बाद शालीन कहे जाने वाले थानेदार को दो अन्य उपनिरीक्षकों के साथ लाइन अटैच होना पड़ा। इनके स्थान पर जिस थानेदार को जिम्मा दिया गया है, उन्हें लेकर खूब कानाफूसी हो रही है। दरअसल पदस्थापना के बाद उनके क्षेत्र में दो चोरी की वारदात हुई तो एफआईआर लिखने की जगह साहबगिरी झाड़ते हुए उन्होंने केवल आवेदन लेकर रख लिया। एक चोरी तो किसी ठेकेदार के साइट पर हुई थी और दूसरी एक ढाबे पर बस से उतरकर भोजन करने वाले महिला का पर्स गायब होने की चोरी से जुड़ा मामला है। दोनों ही मामले में थानेदार इसे सामान्य मानकर चल रहे हैं। यह मामला निपटा ही था कि उनके क्षेत्र में एक युवक की नृशंस हत्या का मामला तूल पकड़ गया। पूर्व में जरा से मामले में थानेदार समेत दो उपनिरीक्षक को हटाने के बाद अब नृशंस हत्या पर लोगों का आक्रोश पनप रहा है कि पुलिस की कार्रवाई चेहरा देखकर होती है।




