Betul News : घोड़ाडोंगरी में योजना बनेगी जीत की संजीवनी, गत चुनाव में कर्जमाफी ने कांग्रेस को बनाया था सिरमौर, इस बार लाड़ली बहना और नारी सम्मान पर टिकी नजर
Betul News: Plan will be the lifeline of victory in Ghoradongri

Betul News : (बैतूल)। जिले की सबसे बड़ी और एसटी वर्ग के लिए आरक्षित घोड़ाडोंगरी विधानसभा पर भी सबकी नजर टिकी हुई है। यहां मुख्यमंत्री की पसंद की उम्मीदवार गंगा बाई उइके को भाजपा से टिकट मिला है तो कमलनाथ की गुडबुक में शामिल घोड़ाडोंगरी जनपद अध्यक्ष राहुल उइके मैदान में है। यानी यहां भी मुकाबला शिवराज और कमलनाथ के बीच कहा जा सकता है। दोनों ने ही इस विधानसभा में आमसभा ली है। अब वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्री की योजनाओं पर मतदाता क्या गुल खिलाते है, यह तो 3 दिसंबर को मतगणना के बाद ही पता चलेगा, लेकिन घोड़ाडोंगरी विधानसभा का चुनावी फैक्टर है कि जिसकी योजना आदिवासी मतदाताओं को पसंद आई उस पार्टी के उम्मीदवार के सिर जीत का सेहरा बंध जाता है।
घोड़ाडोंगरी विधानसभा में सर्वाधिक मतदाता मौजूद है। संयोगवश 17 नवंबर को हुए मतदान में यहां भैंसदेही के बाद सर्वाधिक 83.43 प्रतिशत मतदान हुआ है। बंपर मतदान के बाद भाजपा और कांग्रेस अपने जीत के दावे कर रही हो, लेकिन बढ़ा हुआ मत प्रतिशत किसके खाते में जाएगा, यह दावा अभी नहीं किया जा सकता। वैसे भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी के रणनीतिकार बढ़े हुए मतदान को अपने पक्ष में मानकर चल रहे हैं। चुनावी जानकार भी दावे से यह नहीं कह रहे हैं कि यहां ऊंट किस करवट बैठेगा। शुरू में जरूर भाजपा यहां कांग्रेस की अपेक्षा थोड़ी मजबूत बताई जा रही थी, लेकिन मतदान की तिथि आने तक मुकाबला बराबरी का हो गया। यही वजह है कि इस आदिवासी सीट पर सभी आंकलन गड़बड़ा रहे हैं।
योजना हमेशा पड़ रही भारी
पिछले दो चुनावों में देखने को मिला है कि आदिवासी अंचल के मतदाता योजनाओं को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। वर्ष 2013 में सज्जन सिंह उइके की जीत के दौरान भी सरकार की योजनाओं का खासा योगदान था। बीते चुनाव की बात करें तो कांग्रेस ने कर्जमाफी की योजना का तुरूप का इक्का फेंका था। आंकलन करने वाले घोड़ाडोंगरी में अंत तक भाजपा की ही जीत बता रहे थे, जब परिणाम सामने आए तो कांग्रेस उम्मीदवार बह्मा भलावी ने 92 हजार 106 वोट लेकर 179227 वोटों से जीत हासिल की थी। भाजपा प्रत्याशी गीता उइके को 74 हजार 179 वोटे मिले थे। इस बार गांवों में भाजपा की लाड़ली बहना और कांग्रेस की नारी सम्मान योजना में प्रतिस्पर्धा है। किसान हित की सरकार की योजनाओं की भी खूब चर्चा हो रही है, जबकि कांग्रेस की नारी सम्मान योजना के अलावा शिक्षा योजना को लेकर भी चर्चाएं चल रही है। यही कारण है कि घोड़ाडोंगरी में मतदाता फिलहाल मौन है, लेकिन कटु सत्य यह है कि जिसकी योजना मतदाताओं को पसंद आई, वहीं यहां पर जीत हासिल करेगा।
मूलभूत सुविधाओं से सरोकार नहीं
पिछले चुनाव में भी बिजली, पानी, सड़क को छोड़ जिले के सबसे बड़े विधानसभा घोड़ाडोंगरी में मतदाताओं ने बिजली, पानी और सड़क की समस्याओं को दरकिनार करते हुए, कर्जमाफी की योजना पर ठपा लगाकर कांग्रेस को जीत दिलाई थी। यहां के क्षेत्र के ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं की अपेक्षा सरकार की योजनाएं अधिक पसंद है।
क्षेत्र में ऐसा है चुनावी गणित
सबसे बड़ा विधानसभा होने के साथ यहां तीन निकाय क्षेत्र घोड़ाडोंगरी, शाहपुर और चिचोली शामिल हैं। इनके करीब बीस हजार मतदाता शहरी होने के कारण निर्णायक भूमिका में रहते हैं। हालांकि जीत-हार ग्रामीण क्षेत्रों से ही होते आई है , लेकिन शहरी क्षेत्र की लीड भी घोड़ाडोंगरी में काफी मायने रखती है। जानकार बताते हैं कि रानीपुर, घोड़ाडोंगरी, चोपना, शाहपुर-भौंरा, बीजादेही, चिचोली, चिरापाटला जैसे अंचलों तक फैले घोड़ाडोंगरी में मतदाताओं के अलग-अलग फैक्टर है। कांग्रेस और भाजपा के इन क्षेत्रों में अलग-अलग मतदाता है, इसलिए शहरी वोटों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में लीड भी जीत- हार का कारण बन सकती है। फासला इस बार कम वोटों होने की संभावना भी दिखाई दे रही है।




