Betul Samachar: जंगल में एक माह तक चलते रहे आरे, 50 सागौन के पेड़ कटे

शाहपुर की खोखरापूर्व बीट के कम्पार्टमेंट 234 का मामला, कटाई के बाद लकड़ी भी ठिकाने लगाने की चर्चा
Betul Samachar: बैतूल। उत्तर वन मंडल के शाहपुर परिक्षेत्र में सागौन कटाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कैम्पा प्लांटेशन में सागौन कटाई का मामला अभी सुर्खियों में ही था कि अब खोखरापूर्व बीट के कम्पार्टमेंट नंबर 234 में करीब 50 सागौन पेड़ों की कटाई की खबर सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक यहां पिछले करीब एक महीने से सागौन के पेड़ों पर आरे चलते रहे और काटी गई लकड़ी को जंगल से बाहर तक पहुंचा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी कटाई के बावजूद संबंधित वन अमले को इसकी जानकारी नहीं होने की बात सामने आ रही है।
मामला सामने आने के बाद वन विभाग की गश्ती और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर जंगल के जिस हिस्से की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग के कर्मचारियों की है, वहां लगातार एक महीने तक पेड़ काटे जाते रहे तो इसकी भनक किसी को क्यों नहीं लगी? यदि विभाग को जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि जानकारी नहीं थी तो नियमित गश्त और निगरानी व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही है?
पहले से चर्चा में रही है खोखरा बीट
खोखरा बीट क्षेत्र में सागौन कटाई को लेकर पहले भी चर्चाएं होती रही हैं। अब कम्पार्टमेंट 234 में करीब 50 पेड़ों की कटाई की सूचना ने मामले को और गंभीर बना दिया है। सूत्रों के अनुसार कटाई योजनाबद्ध तरीके से किए जाने की बात सामने आ रही है।
पेड़ों को काटने के बाद लकड़ी को जंगल से निकालकर अलग-अलग ठिकानों तक पहुंचाए जाने की भी चर्चा है। हालांकि, पेड़ों की वास्तविक संख्या और कटाई की अवधि की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में अब सबसे जरूरी यह है कि वन विभाग मौके पर पहुंचकर कटे हुए पेड़ों के ठूंठों की गिनती करे और उनकी वैधता की जांच करे।
50 पेड़ कटे तो जिम्मेदारी किसकी?
यदि कम्पार्टमेंट 234 में वास्तव में एक महीने के भीतर करीब 50 सागौन पेड़ काटे गए हैं तो यह महज अवैध कटाई का मामला नहीं, बल्कि वन सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक भी मानी जाएगी। इतने बड़े क्षेत्र में लगातार कटाई के लिए आरा, मजदूर और लकड़ी की ढुलाई की गतिविधियां हुई होंगी।
इसके बावजूद वन अमले को जानकारी नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। वन विभाग में बीट स्तर से लेकर रेंज स्तर तक गश्त और निरीक्षण की व्यवस्था है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित क्षेत्र में कितनी बार गश्त हुई, निरीक्षण के दौरान क्या स्थिति दर्ज की गई और कटाई की जानकारी क्यों नहीं मिली।
अब ठूंठ बताएंगे जंगल की कहानी
मामले में निष्पक्ष जांच के लिए कम्पार्टमेंट 234 का भौतिक सत्यापन जरूरी है। मौके पर कटे पेड़ों के ठूंठों की गणना, उनकी प्रजाति और आकार का मिलान करने के साथ यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि कटाई कब हुई और लकड़ी कहां पहुंचाई गई।
साथ ही उस अवधि में क्षेत्र की निगरानी के लिए जिम्मेदार वनकर्मियों की ड्यूटी और गश्ती रिकॉर्ड की भी जांच होनी चाहिए। अगर जांच में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई की पुष्टि होती है तो केवल पेड़ काटने वालों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। यह भी तय होना चाहिए कि इतनी बड़ी कटाई वन अमले की नजर से कैसे बची।
इनका कहना…
‘खोखरा पूर्व बीट में कटाई की जानकारी नहीं है। पता करवाया जाएगा। अधिकारियों को जांच के लिए निर्देशित किया जाएगा। ‘
उत्तम सिंह सस्त्या, एसडीओ, शाहपुर




