Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: कौनसे साहब दिन भर गायब, शाम को सज रहा दरबार?? किस साहब ने गरीब परिवार का 1 साल का चक्कर 5 मिनट में सुलझाया??? जिले से रवानगी के पहले किस मोहतरमा के तेवर और अधिक तेज हुए???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…..

दिनभर गायब, शाम को सज रहा साहब का दरबार
जिला मुख्यालय के एक राजस्व कार्यालय में इन दिनों कामकाज का अजब ही ढर्रा चर्चा में है। चर्चा है कि संबंधित अधिकारी दिनभर कार्यालय में नजर नहीं आते और शाम करीब 6-7 बजे के आसपास कार्यालय में बैठना पसंद करते हैं। ऐसे में सरकारी कामकाज के लिए दिन में कार्यालय पहुंचने वाले आम लोगों को इंतजार ही हाथ लगता है। बताया जा रहा है कि अधिकारी की शाम की मौजूदगी में आम फरियादियों की बजाय चुनिंदा खास लोगों से मेल-मुलाकात ज्यादा होती है।
इससे राजस्व से जुड़े कामों के लिए आने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है और कई मामलों में उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सवाल यह है कि जब सरकारी कार्यालय के लिए निर्धारित समय दिन में है, तो अधिकारी शाम को बैठकर किसके काम निपटा रहे हैं?
यदि दिनभर अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध नहीं रहते तो आम जनता अपनी समस्या लेकर किसके पास जाए? अब निगाह प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों पर है कि वे इस ‘शाम के दरबारÓ की हकीकत जांचते हैं या फिर आम आदमी इसी तरह कार्यालय के चक्कर काटता रहेगा।
साहब ने पांच मिनट में सुलझाया सालभर का चक्कर
एक प्रमुख निकाय में कुछ माह पहले पदस्थ हुए सीएमओ इन दिनों अपने कामकाज के साथ-साथ मृदुभाषी व्यवहार और संवेदनशीलता को लेकर भी चर्चा में हैं। हाल ही में उनकी सहृदयता का ऐसा मामला सामने आया, जिसकी निकाय में खूब चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि एक गरीब परिवार का सदस्य आधार और समग्र आईडी लिंक नहीं होने के कारण करीब एक वर्ष से निकाय के चक्कर काट रहा था। योजना का लाभ नहीं मिलने से परेशान परिवार को हर बार उम्मीद और इंतजार ही हाथ लग रहा था। आखिरकार वह अपनी समस्या लेकर सीएमओ के पास पहुंचा।
साहब ने फरियादी की बात सुनी और उसे टालने के बजाय तत्काल कर्मचारियों को बुलाया। इतना ही नहीं, फरियादी के लिए चाय-पानी की व्यवस्था भी कराई गई।
इसके बाद कर्मचारियों से जरूरी प्रक्रिया पूरी करवाकर करीब एक मिनट में वह काम करा दिया, जिसके लिए परिवार एक साल से कार्यालय के चक्कर लगा रहा था। सालभर की परेशानी पांच मिनट में खत्म हुई तो गरीब परिवार के चेहरे पर राहत साफ नजर आई। परिवार साहब की कार्यशैली और व्यवहार का इतना कायल हुआ कि जाते-जाते दुआएं देता हुआ खुशी-खुशी चेम्बर से बाहर निकला।
अब निकाय में इस ‘पांच मिनट वाले साहबÓ की चर्चा इसलिए भी है कि सरकारी दफ्तर में यदि अधिकारी फरियादी की समस्या को सुनने और तत्काल समाधान की इच्छाशक्ति रखें, तो एक साल का चक्कर भी पांच मिनट में खत्म हो सकता है।
रवानगी के पहले भी मैडम के तेवर तीखे!
इस्तीफा देकर नई पारी की तैयारी, लेकिन दफ्तर में तेवरों से कर्मचारी अब भी सहमे
एक जनपद की महिला अधिकारी इन दिनों अपनी रवानगी से ज्यादा अपने तीखे तेवरों को लेकर चर्चा में हैं। चर्चा है कि सीईओ का पद छोड़कर हाल ही में पीएससी के परिणाम में एक प्रमुख पद हासिल करने वाली मैडम ने शासन को इस्तीफा सौंप दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक माह का वेतन भी जमा कर दिया है और अब किसी भी समय जिले से रवानगी डाल सकती हैं।
नई जिम्मेदारी की तैयारी के बीच माना जा रहा था कि मैडम के तेवर कुछ नरम होंगे, लेकिन दफ्तर में हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि मैडम के कड़क अंदाज के कारण कर्मचारी फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। चर्चा तो यहां तक है कि मैडम के तेवरों का असर फाइलों की रफ्तार पर भी पड़ रहा है।
कर्मचारी किसी फाइल को आगे बढ़ाने से पहले कई बार सोच रहे हैं कि कहीं अगला सवाल उन पर ही न आ जाए। ऐसे में कुछ फाइलों की रफ्तार थमने की चर्चा भी दफ्तर के गलियारों में खूब हो रही है। अब मैडम की रवानगी कब होती है, यह तो शासन के आदेश पर निर्भर है, लेकिन जाते-जाते भी उनके ‘तेवरÓ जनपद कार्यालय में चर्चा का विषय जरूर बने हुए हैं। कर्मचारियों को शायद अब इंतजार सिर्फ मैडम की रवानगी का नहीं, बल्कि दफ्तर में माहौल के थोड़ा सहज होने का भी है।
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