Privatization Of ITIs: आईटीआई के निजीकरण का विरोध: 8 किमी विद्यार्थियों ने निकाला पैदल मार्च
विद्यार्थियों ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन, शाहपुर-भीमपुर आईटीआई को निजी हाथों में देने का विरोध

Privatization Of ITIs: शाहपुर। जिले के शाहपुर और भीमपुर क्षेत्र की शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) को निजी संस्था को सौंपे जाने के निर्णय के विरोध में विद्यार्थियों और क्षेत्रवासियों की आवाज तेज होने लगी है। शासकीय आईटीआई शाहपुर (कुंडी) और शासकीय आईटीआई भीमपुर को निजी संस्था परम फाउंडेशन को सौंपने संबंधी आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग को लेकर विद्यार्थियों ने आंदोलन किया। विद्यार्थियों ने महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा।
शासकीय आईटीआई कुंडी के करीब एक सैकड़ा विद्यार्थियों ने आईटीआई परिसर से शाहपुर एसडीएम कार्यालय तक करीब 8 किलोमीटर पैदल मार्च निकाला। इस दौरान विद्यार्थियों ने सरकार के निर्णय के विरोध में नारेबाजी की। पैदल मार्च के बाद विद्यार्थियों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर दोनों आईटीआई को निजी हाथों में सौंपने के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।

गरीब और ग्रामीण विद्यार्थियों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
ज्ञापन में विद्यार्थियों ने कहा कि आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए शासकीय आईटीआई तकनीकी शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। इन संस्थाओं का निजीकरण होने से गरीब, आदिवासी और ग्रामीण विद्यार्थियों पर शुल्क एवं प्रवेश प्रक्रिया का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ने की आशंका है। विद्यार्थियों का कहना है कि शासकीय संस्थाओं के माध्यम से कम खर्च में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है, इसलिए इनका संचालन सरकारी नियंत्रण में ही रहना चाहिए।
16 आदिवासी आईटीआई के निजीकरण पर रोक की मांग
ज्ञापन में संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया कि अनुसूचित जाति, जनजाति और कमजोर वर्गों के शैक्षणिक एवं आर्थिक हितों को बढ़ावा देना तथा उन्हें सामाजिक अन्याय से बचाना सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसे में आदिवासी बहुल क्षेत्रों में संचालित शासकीय संस्थाओं को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय उचित नहीं है।विद्यार्थियों ने शाहपुर (कुंडी) और भीमपुर आईटीआई के निजीकरण का आदेश तत्काल निरस्त करने, दोनों संस्थाओं का संचालन एवं प्रबंधन शासकीय नियंत्रण में रखने, आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराने, पर्याप्त प्रशिक्षकों की नियुक्ति करने और रोजगारपरक ट्रेड शुरू करने की मांग की। साथ ही मध्यप्रदेश की 16 आदिवासी शासकीय आईटीआई के निजीकरण पर रोक लगाकर इन्हें बेहतर कौशल विकास केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग भी उठाई गई।




