Prashasnik Kona : प्रशासनिक कोना: कौनसे साहब है, जो महीने के आखरी में हिसाब- किताब करना नहीं भूल रहे?? आखिर मैडम का सिस्टम ऑफ़ लाइन होने से स्टॉफ की फाइलें कैसे हो रही पेंडिंग????? बात के धनी यह साहब, इशारा मिला और बदल दी व्यवस्था…. विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

महीने के आखिरी दिनों में हिसाब-किताब नहीं भूलते अधिकारी
बारिश के मौसम में चारों ओर फैली हरियाली जहां प्रकृति की खूबसूरती बढ़ा रही है, वहीं हरे-भरे विभाग में इन दिनों एक अलग तरह के ‘हिसाब-किताबÓ की चर्चा जोरों पर है। विभाग के एक मंडलीय अधिकारी अपने मासिक लेखा- जोखा को लेकर कर्मचारियों के बीच खासे चर्चित बताए जा रहे हैं। चर्चा के मुताबिक प्रमोटी अधिकारी पूरे महीने अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा पास किए गए वाउचरों का बारीकी से रिकॉर्ड अपनी निजी डायरी में दर्ज करते हैं। जैसे ही महीने के अंतिम दिन नज़दीक आते हैं, संबंधित अधिकारियों को बुलाकर पूरा हिसाब सामने रख दिया जाता है।
इसके बाद इशारों-इशारों में यह संदेश भी दे दिया जाता है कि अपने-अपने क्षेत्र में पास हुए वाउचरों के अनुसार ‘व्यवस्थाÓ समय रहते कर दी जाए। चर्चा है कि अधिकारी के गृह नगर रवाना होने से पहले यह पूरा हिसाब निपटाने का दबाव अधीनस्थ अधिकारियों पर बना रहता है। ऐसे में ‘मरता क्या न करताÓ वाली स्थिति के चलते कई अधिकारी पहले से ही व्यवस्था बनाकर चलने को मजबूर बताए जा रहे हैं, ताकि महीने के अंत में किसी तरह की नाराज़गी का सामना न करना पड़े। उक्त अधिकारी की बैतूल वृत में यह दूसरी पदस्थापना है। इसके पहले भी वह हरे भरे विभाग की शोभा बढ़ा चुके हैं।
मैडम का सिस्टम ऑफलाइन, स्टाफ की फाइलें भी पेंडिंग!
खाकी वाले विभाग में हाल ही में पदस्थ हुईं एक प्रमुख अधिकारी इन दिनों अपने ही सिस्टम को लेकर चर्चा में हैं। दफ्तर के गलियारों में कानाफूसी है कि मैडम की सिस्टम में ज्यादा रुचि नहीं है। नतीजा यह है कि अधीनस्थ कर्मचारी भी असमंजस में हैं। उनका दर्द कुछ यूं है जब मैडम ही सिस्टम नहीं लेंगी तो हमें कौन देगा।
ऐसे में कई काम अटक रहे हैं और कार्यालय की रफ्तार भी प्रभावित होने लगी है।विभागीय जानकारों का कहना है कि यह मैडम की पहली बड़ी पदस्थापना है। नए माहौल, नई जिम्मेदारियों और विभागीय प्रक्रियाओं को समझने में थोड़ा वक्त लगना स्वाभाविक है। उम्मीद यही है कि शुरुआती झिझक दूर होते ही सिस्टम भी चालू होगा और दफ्तर की गाड़ी फिर से पटरी पर दौड़ने लगेगी। फिलहाल तो खाकी महकमे में यही चर्चा गर्म है कि सिस्टम अपडेट का इंतजार सिर्फ कंप्यूटर को नहीं, पूरे स्टाफ को है। ‘
बात के धनी साहब, इशारा मिला और व्यवस्था बदल गई
खाकी महकमे के बड़े साहब की एक खासियत इन दिनों खूब चर्चा में है—वे सिर्फ सुनते नहीं, बात में दम हो तो तुरंत उस पर अमल भी कर देते हैं। यही वजह है कि करीब एक साल के उनके कार्यकाल में विभाग ही नहीं, बाहर के लोग भी उनकी इस कार्यशैली के कायल हो गए हैं। बीते दिनों इसी कोने में खाकी विभाग और मीडिया के बीच बढ़ती दूरी का जिक्र हुआ था। चर्चा थी कि प्रेस नोट तो जारी हो रहे हैं, लेकिन पत्रकार वार्ताओं पर जैसे ताला लग गया है।
कहते हैं, बात साहब तक पहुंची तो उन्होंने बिना देर किए अधीनस्थों को साफ संदेश दे दिया कि संवाद का सिलसिला थमना नहीं चाहिए। नतीजा भी फौरन दिख गया। लंबे समय से बंद पड़ी पत्रकार वार्ताएं फिर शुरू हो गईं। अब खबरों के साथ स्वल्पाहार की मिठास भी लौट आई है और विभाग व मीडिया के रिश्तों में फिर गर्मजोशी नजर आने लगी है। महकमे में अब यही चर्चा है कि ‘साहब के यहां बात अगर तथ्य वाली हो, तो फाइल की तरह दबती नहीं, सीधे कार्रवाई में बदल जाती है। ‘
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