Betul News: रिपोर्ट आने में देरी से बढ़ रहा खतरा : जब तक जांच पूरी होती, बिक जाती दूषित सामग्री
Betul News: Danger increasing due to delay in getting the report: By the time the investigation is completed, the contaminated material is sold

दीपावली में लिए खाद्य सेम्पलों की रिपोर्ट अब तक लंबित, लैब से आने का इंतजार
Betul News: बैतूल। आमजन के स्वास्थ्य से सीधे जुड़े खाद्य पदार्थों की जांच व्यवस्था इन दिनों गंभीर लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। हर वर्ष दीपावली त्यौहार के दौरान मिठाइयों, नमकीन, दूध से बने पदार्थों और तेल जैसे खाद्य पदार्थों की खपत में भारी इजाफा होता है। इसी कारण खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा नियमित रूप से सैंपलिंग की जाती है, ताकि मिलावटखोरी पर अंकुश लगाया जा सके, लेकिन स्थिति यह है कि जब तक जांच रिपोर्ट आती है, तब तक दूषित सामग्री बाजार में बिककर लोगों के पेट में जा चुकी होती है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति रह जाती है।
त्यौहार समाप्त हुए पखवाड़े से अधिक समय बीत चुका है, किंतु दीपावली पर लिए गए सैम्पलों की रिपोर्ट अबतक नहीं पहुंची है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष दीपावली सीजन के दौरान बैतूल जिले से लगभग 200 खाद्य सैम्पल लिए गए थे। इन्हें जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला में भेजा गया। लेकिन लगभग तीन सप्ताह होने के बाद भी एक भी सैम्पल की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं हो पाई है। इस स्थिति से यह साफ है कि यदि किसी सैम्पल में मिलावट पाई भी जाती है, तो भी दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई संभव नहीं है।
एक ही लेब पर निर्भरता बनी बड़ी समस्या
विभागीय अधिकारियों के अनुसार पूरे प्रदेश से हजारों की संख्या में सैंपल भोपाल लेब भेजे जाते हैं। लेब की संख्या सीमित है और संसाधन भी पर्याप्त नहीं। नतीजतन रिपोर्ट तैयार होने में महीनों का समय लग जाता है। सैंपल अधिक और जांच तंत्र कमजोर होने से मिलावटखोरों को खुली छूट मिल जाती है। त्यौहारों में अक्सर मिलावटी मावा, सिंथेटिक मिठाइयां व घटिया तेल की बिक्री बढ़ जाती है पर समय पर रिपोर्ट न आने से कार्रवाई धरातल पर नहीं उतर पाती।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन न सिर्फ फूड पॉयजनिंग का खतरा बढ़ाता है, बल्कि कैंसर, किडनी फेलियर और हार्मोनल समस्याओं जैसी गंभीर स्थितियों का भी कारण बन सकता है। इसलिए जांच में देरी सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य जोखिम को बढ़ा रही है। जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है- जब कार्रवाई ही नहीं होनी है, तो सैंपल लेने का क्या मतलब? बाजार में बिक चुकी मिठाइयों व खाद्य सामग्री की रिपोर्ट जब आती है, तब तक वे पेट में हजम भी हो चुकी होती हैं। ऐसे में आमजन के लिए यह व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इनका कहना….
दीपावली सीजन में लगभग 200 सैम्पल लिए गए हैं। अभी किसी भी सैम्पल की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट मिलते ही, यदि मिलावट पाई जाती है तो संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संदीप पाटिल, निरीक्षक, खाद्य एवं औषधि विभाग, बैतूल




