Politics: राजनीतिक हलचल: सड़क पर सियासी स्पीड ब्रेकर, श्रेय की रेस क्यों?? किस पार्टी में अभी तो ट्रेलर, पिक्चर बाकी के चर्चे जोरों पर??? किस नेता के दिल के अरमां आंसुओं में बह निकले???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…….

सड़क पर सियासी स्पीड ब्रेकर, श्रेय की रेस तेज
जिले के एक प्रमुख शहर को फोरलेन से जोड़ने वाली करीब 20 किमी लंबी सड़क अभी कागजों से निकलकर जमीन पर भी नहीं पहुंची है, लेकिन उसके श्रेय की गाड़ी सियासी हाईवे पर फुल स्पीड से दौड़ने लगी है। करीब 4.50 करोड़ की स्वीकृति की खबर क्या आई, स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समर्थकों ने इसे ऐसे लपका मानो सड़क नहीं, चुनावी बोनस मिल गया हो।
देखते ही देखते सोशल मीडिया पर बधाइयों के पोस्टर सज गए और फिर खबर मीडिया की सुर्खियों तक पहुंच गई। दिलचस्प बात यह रही कि केंद्र में मजबूत पकड़ रखने वाले एक जनप्रतिनिधि के समर्थक और जनसंपर्क तंत्र इस बार स्टार्टिंग लाइन पर ही पिछड़ गए। जब तक उन्हें सियासी ट्रैफिक की दिशा समझ आती, तब तक श्रेय का पहला माइलस्टोन दूसरे खेमे के नाम हो चुका था। अब हालात ऐसे हैं कि सड़क की डामर बिछने से पहले ही श्रेय की परतें चढ़ने लगी हैं।
हालांकि मामला ज्यादा गर्माता देख दोनों पक्ष अब एकजुटता का बोर्ड लगाते नजर आ रहे हैं। मंचों पर मुस्कानें साझा की जा रही हैं और संदेश दिया जा रहा है कि विकास किसी एक का नहीं, सबका है। मगर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सड़क भले एक ही बने, लेकिन उसके श्रेय की लेनें कई हैं और हर कोई अपनी गाड़ी सबसे आगे निकालने की जुगत में लगा है। आखिर चुनावी मौसम दूर सही, सियासत में श्रेय की सड़क कभी सुनसान नहीं रहती।
अभी तो ट्रेलर, पिक्चर बाकी!
एक प्रमुख विपक्षी पार्टी में पिछले दिनों हुए हंगामेदार घटनाक्रम की गूंज प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक सुनाई दी। मामले के बाद पार्टी नेतृत्व ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को बयानबाजी से बचने और अनुशासन बनाए रखने की नसीहत भी दी, लेकिन लगता है कि कुछ समर्थकों ने इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया।
चर्चा है कि एक दिग्गज नेता के समर्थक सोशल मीडिया पर दूसरे गुट के नेताओं पर लगातार कटाक्ष कर रहे हैं और इशारों-इशारों में अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। मजेदार बात यह है कि पार्टी के भीतर की तल्खी अब चौक-चौराहों तक पहुंच गई है। राजनीतिक अड्डों पर कुछ समर्थक खुलेआम कहते फिर रहे हैं कि अभी तो ट्रेलर देखा है, पिक्चर बाकी है। इस एक संवाद ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को हवा दे दी है।
लोग इसका मतलब आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर और बड़े घटनाक्रम की संभावना से जोड़कर देख रहे हैं। राजनीति के जानकार मानते हैं कि यदि अंदरूनी खींचतान और बयानबाजी का दौर नहीं थमा, तो चुनाव से पहले पार्टी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल नेतृत्व डैमेज कंट्रोल में जुटा है, लेकिन समर्थकों की बातें संकेत दे रही हैं कि पार्टी में सब कुछ अभी सामान्य नहीं हुआ है।
दिल के अरमां आंसुओं में बह गए…
सत्तारूढ़ पार्टी के एक युवा संगठन में हाल ही में नए अध्यक्ष की ताजपोशी हुई है। समर्थक जश्न में डूबे हैं। बधाइयों के पोस्टर लग रहे हैं और सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की बाढ़ आई हुई है। लेकिन इस खुशी के माहौल के बीच संगठन के पूर्व अध्यक्ष की सियासी पीड़ा भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एक पुराने विवाद के बाद युवा नेता की सियासी गाड़ी ऐसी पटरी से उतरी कि अब तक वापस ट्रैक पर नहीं लौट पाई है। न प्रदेश संगठन में जगह मिली और न ही किसी बड़े दायित्व का दरवाजा खुल सका। नई नियुक्ति के बाद उनके समर्थकों के बीच भी मायूसी साफ दिखाई दे रही है। इधर पिछले दिनों हुए एक विवाद के बाद युवा नेता ने अपनी नाराजगी खुलकर सोशल मीडिया पर जाहिर की।
उन्होंने अपने राजनीतिक नुकसान और बीते घटनाक्रमों के लिए विपक्ष के एक प्रभावशाली नेता को जिम्मेदार ठहराते हुए जमकर निशाना साधा। पोस्ट और टिप्पणियों के जरिए निकली यह भड़ास अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। सियासी जानकारों का कहना है कि राजनीति में मौके बार-बार नहीं आते और छूटे हुए पद की कसक अक्सर लंबे समय तक बनी रहती है।
फिलहाल नए अध्यक्ष के स्वागत का शोर ज्यादा है, लेकिन पुराने अध्यक्ष की खामोशी और सोशल मीडिया पर छलकती पीड़ा भी कम सुर्खियां नहीं बटोर रही है। इसलिए राजनीतिक गलियारों में लोग गुनगुना रहे हैं दिल के अरमां आंसुओं में बह गए..।
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