Betul Ki Khabar: 17 करोड़ का अस्पताल भवन बना मुसीबत, बारिश में खुली निर्माण की पोल

महिला एवं बाल रोग इकाई भवन की टपक रही छत, ड्रेनेज सिस्टम बार-बार हो रहा चोक

Betul Ki Khabar: बैतूल। जिला अस्पताल परिसर में करीब 17 करोड़ की लागत से निर्मित दो मंजिला महिला एवं बाल रोग इकाई भवन अब घटिया निर्माण कार्य का उदाहरण बनता नजर आ रहा है। करोड़ों खर्च कर तैयार किए गए इस भवन में बारिश के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आ गई हैं।

सबसे बड़ी समस्या भवन की छत से पानी टपकने और ड्रेनेज सिस्टम के बार-बार चोक होने की बताई जा रही है। इससे अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों, गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और स्वास्थ्य कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार केंद्रीय ट्राइबल विभाग की ओर से करीब 17 करोड़ की लागत से 150 बिस्तरों वाले अस्पताल भवन का निर्माण कराया गया है। इसी भवन में वर्तमान में महिला एवं बाल रोग इकाई संचालित हो रही है। लेकिन बारिश शुरू होते ही भवन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। कई स्थानों पर छत से पानी रिसने और टपकने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे वार्डों और गलियारों में असुविधा की स्थिति बन रही है।

ड्रेनेज सिस्टम बना सबसे बड़ी परेशानी

भवन में सबसे गंभीर खामी ड्रेनेज सिस्टम को लेकर सामने आई है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार पानी की निकासी की व्यवस्था ठीक नहीं होने से ड्रेनेज लाइन बार-बार चोक हो जाती है। इसके कारण गंदा पानी जमा होने की स्थिति बनती है और कर्मचारियों को लगातार मरम्मत करानी पड़ रही है। बार-बार सामने आ रही इस समस्या से यह आशंका भी जताई जा रही है कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।

निगरानी करने वाले विभाग पर भी उठ रहे सवाल

भवन निर्माण के दौरान कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी पीआईयू (प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट) के अधिकारियों को सौंपी गई थी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब निर्माण कार्य विभागीय निगरानी में हुआ, तब इतनी गंभीर तकनीकी खामियां कैसे रह गईं। यदि समय रहते निर्माण की गुणवत्ता की सही जांच की जाती तो करोड़ों रुपये की इस परियोजना में सामने आ रही समस्याओं से बचा जा सकता था।

अस्पताल परिसर में बने अब तक के भवनों में इस भवन के निर्माण को लेकर सबसे अधिक शिकायतें सामने आने के बाद अब इसकी तकनीकी जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि से बने भवन में यदि शुरुआत से ही इस तरह की खामियां सामने आ रही हैं, तो निर्माण एजेंसी और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

स्थानीय लोगों और अस्पताल से जुड़े लोगों ने मांग की है कि भवन की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो और मरीजों को सुरक्षित एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

इनका कहना…..

अभी भवन वारंटी में है। मेरे द्वारा सुधार कार्य को लेकर पीआईयू विभाग के अधिकारियों को पत्राचार किया है। 

डॉ जगदीश घोरे, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल बैतूल

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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