Betul Ki Khabar: दक्षिण वनमंडल बैतूल में ईएमडी नियमों पर सवाल: 10 लाख की निविदा में मांगी जा रही 1 लाख सुरक्षा राशि

नियम अनुसार बनती है, 3 प्रतिशत

Betul Ki Khabar: बैतूल। वन विभाग की निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता और समानता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। दक्षिण (सा.) वनमंडल बैतूल द्वारा जारी लोहे की सामग्री क्रय संबंधी ई-निविदा में निविदा सुरक्षा राशि (श्वरूष्ठ) को लेकर गंभीर विसंगति सामने आई है।

दस्तावेजों के अनुसार लगभग 10 लाख रुपये की अनुमानित निविदा में विभिन्न मदों पर कुल 1 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा कराने का प्रावधान रखा गया है, जबकि मध्यप्रदेश शासन के प्रचलित खरीद नियमों के अनुसार यह राशि सामान्यत: अनुमानित निविदा मूल्य का 3 प्रतिशत होनी चाहिए।

उधर, उत्तर (सा.) वनमंडल बैतूल द्वारा जारी एक अन्य ई-निविदा में 3 लाख रुपये की सामग्री आपूर्ति के लिए मात्र 9 हजार रुपये ईएमडी निर्धारित की गई है, जो कि 3 प्रतिशत के नियम के अनुरूप है। दोनों वनमंडलों की निविदाओं की तुलना से नियमों के अनुपालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

दक्षिण वनमंडल की निविदा में क्या है प्रावधान?

दक्षिण वनमंडल बैतूल की ई-निविदा में लोहे की विभिन्न श्रेणियों—6 मिमी, 8 मिमी, 10 मिमी, 12 मिमी एवं 16 मिमी टीएमटी सरिया तथा बाइंडिंग वायर—की खरीद प्रस्तावित है। निविदा दस्तावेज के अनुसार अनुमानित निविदा मूल्य 10 लाख रु है, लेकिन निविदा सुरक्षा राशि के कॉलम में प्रत्येक श्रेणी पर 20-20 हजार रुपये तथा बाइंडिंग वायर पर 5 हजार रुपये की सुरक्षा राशि निर्धारित की गई है।

यदि कोई आपूर्तिकर्ता सभी मदों में निविदा डालता है तो उसे लगभग 1 लाख 5 हजार रुपये तक की ईएमडी जमा करनी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कुल निविदा मूल्य 10 लाख रुपये है तो 3 प्रतिशत के हिसाब से ईएमडी लगभग 30 हजार रुपये बनती है। ऐसे में 1 लाख रुपये से अधिक सुरक्षा राशि मांगना नियमों और प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया की भावना के विपरीत माना जा सकता है।

उत्तर वनमंडल का उदाहरण

उत्तर (सा.) वनमंडल बैतूल द्वारा जारी ई-निविदा में 4500 किलोग्राम लोहे की आपूर्ति के लिए अनुमानित निविदा मूल्य 3 लाख रुपये दर्शाया गया है। इस निविदा में सुरक्षा राशि 9 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जो ठीक 3 प्रतिशत बैठती है। यानी एक ही जिले के दो वनमंडलों में समान प्रकृति की सामग्री खरीद के लिए ईएमडी निर्धारण के अलग-अलग तरीके अपनाए गए हैं। इससे निविदाकारों में असमंजस की स्थिति बन रही है।

ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं की चिंता

स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं का कहना है कि अत्यधिक ईएमडी राशि छोटे और मध्यम कारोबारियों की भागीदारी को प्रभावित कर सकती है। बड़ी सुरक्षा राशि जमा कराने की शर्त के कारण कई पात्र फर्में निविदा प्रक्रिया से दूर रह सकती हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा कम होने और विभाग को उचित दरें नहीं मिलने की आशंका बढ़ जाती है।

एक आपूर्तिकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि एक ही जिले में अलग-अलग कार्यालय अलग नियमों से ईएमडी तय करेंगे तो निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

नियमों के पालन पर उठे सवाल

मध्यप्रदेश भंडार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियमों में निविदा सुरक्षा राशि का निर्धारण स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार किए जाने की व्यवस्था है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि दक्षिण वनमंडल द्वारा निर्धारित सुरक्षा राशि किस आधार पर तय की गई है और क्या इसके लिए सक्षम स्तर से कोई विशेष अनुमति प्राप्त की गई है।

मामले में संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। निविदाकारों का कहना है कि यदि वास्तव में नियम अनुसार ईएमडी 3 प्रतिशत निर्धारित है, तो दक्षिण वनमंडल की निविदा में सुरक्षा राशि की पुनर्समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि सभी इच्छुक फर्मों को समान अवसर मिल सके और निविदा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे।

अब निगाहें वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं कि वे इस विसंगति पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या निविदा शर्तों में संशोधन किया जाता है या नहीं।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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