Betul News: धरमू को भैंसदेही में एंटी-इनकंबेंसी पड़ रही भारी
Betul News: Anti-incumbency is costing heavily to Dharmu in Bhainsdehi

पांच वर्षों में सक्रिय न रहने से मतदाताओं में आक्रोश
Betul News: (बैतूल)। आदिवासी विधानसभा भैंसदेही में इस समय भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। भले ही कांग्रेस अपनी जीत के लिए भाजपा समर्थित दो बागियों के मैदान में उतरने से आशान्वित नजर आ रही है, लेकिन ऐसा बिलकुल दिखाई नहीं दे रहा है। दरअसल पांच वर्ष में विधायक रहते हुए छुटमुट काम को छोड़ क्षेत्रीय विधायक ने आम लोगों को कोई बड़ी सौगात नहीं दी है। इतना ही नहीं अपने क्षेत्र के अधिकांश गांवों में विधायक के नहीं पहुंचने और मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं कराने से दोबारा टिकट से नवाजे गए धरमू सिंह को एंटी इनकंबेंसी से गुजरना पड़ रहा है, इसलिए कांगे्रस जितना सोच रही है, उतनी राह आसान नहीं है। इसके अलावा भाजपा और विरोधी दलों ने दो पंचायतों पर विधायक कार्यकाल के दौरान विधायक निधि की मेहरबानी के संगीन आरोप लगाकर घेरने का पूरा प्रयास कर लिया है।
घोड़ाडोंगरी के अलावा भैंसदेही अनुसूचित जन जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट है। यहां पर आजादी के बाद से कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस को स्थानीय मतदाताओं ने मौका दिया है। इस बार कांग्रेस ने अपने वर्तमान विधायक धरमू सिंह पर दोबारा दाव लगाया है। हालांकि सर्वे में उनकी स्थिति रामू टेकाम और एक अन्य दावेदार से कमजोर मानी गई थी, लेकिन कमलनाथ ने सीधे सरल विधायक को टिकट देने की बात भोपाल में प्रतिनिधि मंडल को कहकर हरीझंडी दे दी थी। हालांकि कमलनाथ रणनीति के तहत रामू को विधानसभा के बजाए अदिवासी कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद पूरे प्रदेश में उनका उपयोग करना चाह रहे थे, इसलिए वे टिकट से वंचित रह गए, लेकिन धरमू सिंह को टिकट देकर कांग्रेस ने अपनी परेशानी बढ़ा ली है।
एंटी-इनकंबेंसी से चुनावी पैतरे पर असर
राजनैतिक प्रेक्षकों का मानना है कि विपक्ष के विधायक होने के बाद धरमू सिंह की निष्क्रियता पूरे पांच वर्ष बनी रही। इसी का खामियाजा इस चुनाव में उन्हें भुगतना पड़ रहा है। जानकार बताते हैं कि वर्तमान विधायक को हमेशा एंटी-इनकंबेंसी के दौर से गुजरना पड़ता है। यही कांग्रेस प्रत्याशी के साथ भैंसदेही विधानसभा में हो रहा है। कहने को तो उनके साथ चुनाव में लंबी चौड़ी फौज लगी है, लेकिन पूरे पांच वर्ष छूटभैयों के भरोसे विधायकी निकल गई अब ग्रामीण क्षेत्र में मतदाताओं के बीच वे दोबारा वोट डालने का आग्रह करने पहुंच रहे हैं। कई जगह उन्हें ग्रामीणों की नाराजगी का भी सामना करना पड़ रहा है। यह बात उनके साथ प्रचार करने गए कार्यकर्ता भी बखूबी जानते हैं। सूत्र बताते हैं कि पांच वर्ष सक्रिय नहीं रहने का खामियाजा कांग्रेस को इस चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। लंबा क्षेत्र होने के कारण कांग्रेस विधायक धरमू सिंह पूरे क्षेत्र में पहुंच पाए इसको लेकर भी संशय दिखाई दे रहा है।




