Betul Samachar: गड्ढों में डूबा विकास: बारिश में बंजर सड़कों से जूझने को तैयार शहरवासी

एक साल में भी नपा नहीं बना पाई वार्डों की दर्जनों सड़कें
Betul Samachar: बैतूल। शहर में मानसून की दस्तक के साथ ही सड़कों की बदहाल तस्वीर एक बार फिर सामने आ गई है। आजाद वार्ड, रामनगर, तिलक वार्ड, दुर्गा वार्ड, विवेकानन्द, देशबंधु सहित कई वार्डो में सड़क निर्माण के लिए वर्षों पहले वर्क ऑर्डर जारी किए गए थे, लेकिन अधिकांश जगहों पर काम शुरू ही नहीं हुआ या अधूरा छोड़ दिया गया।
नतीजतन बारिश के मौसम में वार्डों की सड़कें गड्ढों और कीचड़ में तब्दील हो गई हैं। बारिश का पानी गड्ढों में भरने से लोगों का पैदल निकलना तक मुश्किल हो गया है, जबकि दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसलकर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि पिछले वर्ष भी बारिश के दौरान यही स्थिति बनी थी। उस समय उम्मीद थी कि मानसून समाप्त होने के बाद सड़क निर्माण पूरा कर लिया जाएगा, ताकि इस वर्ष राहत मिल सके। लेकिन एक साल बीतने के बावजूद हालात जस के तस हैं। अब नई बारिश शुरू हो गई है और लोगों को फिर उसी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वर्क आर्डर जारी, ठेकेदार गायब
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन सड़कों के निर्माण के लिए नगर पालिका ने साल भर पहले ही वर्क ऑर्डर जारी कर दिए, उन पर समय पर काम क्यों नहीं कराया गया। वर्षों से ठेकेदार वर्क ऑर्डर लेकर बैठे हैं, लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ। इसके बावजूद संबंधित ठेकेदारों की जवाबदेही तय होती नजर नहीं आ रही।
न तो काम पूरा कराने की सख्ती दिखाई दे रही है और न ही देरी के लिए कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है। वार्डों के भीतर जगह-जगह बने गड्ढों में बारिश का पानी भरने से गंदगी फैल रही है। कीचड़ और जलभराव के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। कई मोहल्लों में घरों तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
डामर की कमी तो सीमेंट -कांक्रीट में तब्दील क्यों नहीं की सड़क?
खस्ताहाल वार्डों के स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कें नहीं बनने से उनके रोजमर्रा के कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। नगर पालिका की ओर से डामर की कमी को सड़क निर्माण में देरी का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। हालांकि इस दलील पर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि डामर उपलब्ध नहीं था तो इन प्रमुख सड़कों को सीमेंट-कंक्रीट (सीसी रोड) में परिवर्तित करने की योजना क्यों नहीं बनाई गई।
इससे सड़कें अधिक टिकाऊ भी होतीं और हर वर्ष बारिश में ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। शहरवासियों का कहना है कि विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। लोग वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर कोई असर दिखाई नहीं देता।
फिलहाल ऐसा लग रहा है कि पूरे बारिश के मौसम में शहरवासियों को इन्हीं बदहाल और कीचड़ भरी सड़कों से होकर गुजरना पड़ेगा। लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इसका जवाब जनता लोकतांत्रिक तरीके से जरूर देगी।
इनका कहना…..
डामर की सप्लाई बाधित और कीमतों में व्रद्धि होने से डामरीकरण प्रभावित हुआ है। सीमेंट कंक्रीट की सड़कें प्रस्ताव में ली जाएगी।
नवनीत पांडेय सीएमओ नपा बैतूल




