Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: किस निकाय के साहब के तीखे तेवर से सब इंजीनियर की बनी घिग्गी?? थानेदार जिले से रवाना, लेकिन कौनसी यादें छोड़ने की चिंता??? इन साहब पर आखिर कौनसी मेहरबानी???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

साहब के तेवर से इंजीनियर की बनी घिग्घी

एक निकाय में नए युवा सीएमओ ने बदलाव के लिए कई परिवर्तन किए, लेकिन अधीनस्थ स्टाफ परिणाम देने के लिए गैर जिम्मेदाराना रवैया अपना रहा है। इसका ताजा उदाहरण हाल ही में देखने को मिला, जब युवा अधिकारी द्वारा हाल ही में पड़ोसी जिले से स्थानांतरित होकर आए सब इंजीनियर की कार्यप्रणाली पर जमकर फटकार लगाई।

चर्चा है कि युवा अधिकारी ने सब इंजीनियर को चार जिम्मेदारी थी, इसमें से अधिकांश पर काम नहीं हुआ। पिछले दिनों अफसर ने सब इंजीनियर को अपने चेंबर में तलब कर एक पुराने और जिले से स्थानांतरित हुए सब इंजीनियर का नाम लेकर उनकी तरह काम करने पर जमकर फटकारा। मामला निकाय से सटे और सबसे प्रमुख चौराहे के अतिक्रमण से जुड़ा था।

सब इंजीनियर ने न तो अतिक्रमण हटाया और न ही सौंदर्यीकरण के प्रयास किए। इससे नाराज युवा अधिकारी की नाराजगी के बाद सब इंजीनियर की घिग्घी बंध गई। अब देखना यह है कि अधिकारी की फटकार के बाद सब इंजीनियर सौंपे गए कामों का क्या परिणाम देते हैं।

थानेदार रवाना, यादें छोड़ गए

जिले के विभिन्न स्थानों पर पिछले ढाई वर्षों में पदस्थ रहे एक वरिष्ठ थानेदार की हाल ही में जिला मुख्यालय से सटे पड़ोसी जिले में तबादला हुआ है। थानेदार यहां अपनी कार्यप्रणाली के लिए काफी चर्चित थे। पुराने बड़े साहब के खास होने के कारण उन्हें जिला मुख्यालय का प्रमुख थाने का भी स्वाद ्रचखने का मौका मिला।

यही पदस्थापना के दौरान उन्होंने 40 लाख की लग्जरी वाहन भी खरीदकर सुर्खियां बटोरी। अब चर्चा है कि साहब पड़ोसी जिले में आमद दे चुके हैं, लेकिन उनकी एक प्रेमिका यही है। दूसरे जिले में जाने के कारण मेेल-मेल मुलाकात का सिलसिला कम हो गया, लेकिन चर्चा यह भी है कि जिले से सटी सीमा वाले जिले में थानेदार ही मिलने के बाद उन्हें दोबारा बैतूल आकर गुल खिलाने का मौका मिल रहा है। एक बार यही प्रेमिका उनकी शिकायत लेकर बड़ी मैडम के पास पहुंच गई थी।

चूंकि मामला थानेदार से जुड़ा था, इसलिए शिकायत करने वाली थानेदार की प्रेमिका को बमुश्किल समझाइश देकर वापस लौटाया गया। इसके बाद साहब को गलती का एहसास हुआ तो प्रेमिका को फीलगुड महसूस कराने में कमी नहीं छोड़ी। हालांकि चर्चा है कि दूसरे जिले में जाने से वह काफी परेशान बताई जा रही है। इससे परेशान थानेदार अपना फंडाफोड़ होने से बचने के लिए नई तरकीब ढूंढ रहे हैं।

इन पर कैसी मेहरबानी?

पिछले दिनों गृह विभाग ने जिले से तीन थानेदारों की दूसरे जिले में रवानगी के आदेश जारी किए। करीब दो माह पहले हुए इस आदेश में दो थानेदार तो अपने नई पदस्थापना पर पहुंच चुके हैं, लेकिन हाइवे किनारे के एक प्रमुख थाने के साहब पर अतिरिक्त मेहरबानी खासी चर्चा का केंद्र बनी है। सोशल मीडिया से लेकर अन्य प्लेटफार्मों के अलावा जनप्रतिनिधि भी दबी जुबान से इस थानेदार को रिलीव न करने पर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल रवानगी न मिलने पर थानेदार भी जमकर मलाई खाने में लगे हैं।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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