Betul Samachar: खाद-बीज के लिए भटक रहे किसान, जिम्मेदार अधिकारी नहीं उठा रहे फोन

खरीफ सीजन से पहले किसानों की बढ़ी चिंता, कृषि विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
Betul Samachar: बैतूल। जिले में खरीफ सीजन की तैयारियां तेज हो गई हैं। किसान खेतों की जुताई, मेढ़बंदी और बोवनी की तैयारी में जुटे हुए हैं, लेकिन समय पर खाद और बीज उपलब्ध नहीं होने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि खाद-बीज की व्यवस्था को लेकर वे लगातार कृषि विभाग से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हालात यह हैं कि कई किसानों को अपनी समस्या बताने के लिए विभागीय अधिकारियों को बार-बार फोन करना पड़ रहा है, लेकिन फोन तक नहीं उठाए जा रहे हैं।
प्री-मानसून गतिविधियों के बीच किसान खरीफ फसलों की बोवनी की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले दिनों में मानसून की बारिश शुरू होते ही खेतों में बोवनी का कार्य तेज हो जाएगा। इसके लिए किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक और प्रमाणित बीज की आवश्यकता है।
किसानों का आरोप है कि खाद-बीज की उपलब्धता को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है और विभागीय स्तर पर समुचित मार्गदर्शन भी नहीं दिया जा रहा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।
अधिकारियों की उदासीनता से बढ़ी परेशानी
किसानों का कहना है कि कृषि विभाग को उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना चाहिए, लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण उन्हें भटकना पड़ रहा है। शिकायत है कि कई बार फोन लगाने के बावजूद अधिकारी कॉल रिसीव नहीं करते। ऐसे में किसानों को अपनी समस्याएं रखने का अवसर भी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले किसानों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे समय और आर्थिक नुकसान दोनों हो रहे हैं।
भगवान भरोसे चल रहा कृषि विभाग
किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि जिले में कृषि विभाग की व्यवस्था इन दिनों भगवान भरोसे चल रही है। उप संचालक कृषि आनंद बड़ोनियां के भोपाल भेजा है, इसके बाद विभागीय कामकाज प्रभावित है। वर्तमान में कृषि उपसंचालक का प्रभार सुरेन्द्र पराते के पास है, जबकि एसडीओ रामवीर सिंह राजपूत भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि दोनों अधिकारी किसानों के फोन तक उठाना उचित नहीं समझते है। जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि यदि बोवनी से पहले खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हुई तो इसका सीधा असर खरीफ उत्पादन पर पड़ सकता है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि कृषि विभाग को किसानों की समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाया जाए और अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाए ताकि समय रहते किसानों को राहत मिल सके। बताया जा रहा है कि पिछले तीन-चार दिनों से लगातार विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन फोन का जवाब नहीं मिल रहा।
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