Betul Samachar: सतपुड़ा को चार माह में आधे से भी कम हो गई कोयले की आपूर्ति

Betul News: Coal supply to Satpura reduced to less than half in four months

जनवरी में 1 लाख 23 हजार 979 टन थी सप्लाई, अप्रैल में 48 हजार 317 टन ही रह गई

Betul Samachar:  सारनी (कालीदास चौरासे)। वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड पाथाखेड़ा क्षेत्र से कोयला उत्पादन लगातार प्रभावित हो रहा है। इससे कंपनी का नुकसान बढ़ता ही जा रहा है। वहीं मप्र पॉवर जनरेटिंग कंपनी के सतपुड़ा ताप गृह सारनी को भी खपत के अनुरूप कोयला नहीं मिल पा रहा। वेकोलि पाथाखेड़ा क्षेत्र से सतपुड़ा ताप गृह सारनी को किस तरह कोयला आपूर्ति कम होते जा रहा है। इसका अंदाजा जनवरी से अप्रैल माह के बीच हुई कोयले की सप्लाई से समझा जा सकता है।

वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड पाथाखेड़ा से सतपुड़ा ताप गृह को जनवरी माह में जहां 1 लाख 23 हजार 979 टन कोयला सप्लाई हुआ था। वहीं अप्रैल माह में आपूर्ति घटकर महज 48 हजार 317 टन ही रह गई। इन आंकाड़ों से स्पष्ट होता है कि वेकोलि पाथाखेड़ा से कोयला उत्पादन लगातार गिर रहा है। बताया जा रहा है कि पाथाखेड़ा क्षेत्र में तीन भूमिगत खदान है। जिनसे जी-7, जी-8 और जी-9 ग्रेड का कोयला उत्पादन होता है। खदानों में कोल कर्मियों के अलावा अत्याधुनिक कंटीन्युअस माइनर से भी कोयला उत्पादन किया जाता है। तीनों खदानों में सीएम मशीन है।

लेकिन बीते छह माह से तवा-टू खदान की सीएम मशीन बंद है। जिसे अब खदान से बाहर निकाल ली गई है। इसी तरह तवा-1 खदान की सीएम मशीन भी लगातार बंद रह रही है। इसके चलते भी उत्पादन पर असर पड़ रहा है। वहीं छतरपुर-1 खदान में हुए हादसे के बाद से यहां भी सीएम मशीन से पहले की तरह उत्पादन नहीं हो रहा। गौरतलब है कि साल 2024-25 में वेकोलि पाथाखेड़ा क्षेत्र को लगभग 300 करोड़ का घाटा हुआ है।

बदल गया ग्रेड बढ़ सकता है घाटा

वेकोलि पाथाखेड़ा क्षेत्र से बेहतर किस्म का कोयला निकलता है। जिसे ग्रेड में जी-7, जी-8 और जी-9 के रूप में गिना जाता है। बताया जा रहा है कि चेक सेंपल में इस बार छतरपुर खदान के कोयले की गुणवत्ता में बदलाव हुआ है। इससे कोयले के दाम में गिरावट आने से इंकार नहीं किया जा सकता। बताया जा रहा है कि अप्रैल माह में सीसीओ की टीम ने चेक सेंपल लेकर जांच की। जिसमें छतरपुर-1 खदान के कोयले की गुणवत्ता जी-8 से जी-9 हो गई है। कोयला के जानकार बताते हैं कि भूमिगत खदान से बेहतर किस्म का कोयला निकलता है। जबकि ओपन कास्ट माइन से जी-12, 13 किस्म का कोयला निकलता है।

डेढ़ दशक में बंद हो गई 6 खदानें

पाथाखेड़ा क्षेत्र से कभी 33 लाख मीट्रिक टन कोयला उत्पादन होता था जो अब सिमटकर 15 लाख मीट्रिक टन पर आ पहुंचा है। इस साल वेकोलि पाथाखेड़ा प्रबंधन द्वारा 17 लाख मीट्रिक टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक बीते डेढ़ दशक में पाथाखेड़ा क्षेत्र की 6 भूमिगत खदानें बंद हो गई है। जबकि इस बीच एक मात्र तवा-थ्री खदान खोलने की प्रक्रिया चल रही है। बताया जा रहा है कि साल 2008-09 में कोयला खदान बंद करने का सिलसिला पीके-1 खदान से शुरू हुआ जो छतरपुर-टू पर बंद हुआ है। 2008-09 से 2025 के बीच पीके-1, पीके-टू, सतपुड़ा-टू, शोभापुर, सारनी माइन और छतरपुर-टू बंद हुई है।

उजड़ गया शहर

जिले के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र सारनी, पाथाखेड़ा उजड़ सा गया है। दरअसल बीते डेढ़ दशक 9 बिजली इकाइयां और 6 भूमिगत खदान बंद हो गई है। इससे क्षेत्र में रोजगार का संकट गहरा गया और लोग रोजी-रोटी की तलाश में क्षेत्र से पलायन करते जा रहे हैं। इसका असर जिले की सबसे बड़ी नगरपालिका क्षेत्र के मतदाताओं पर इतना जबरदस्त पड़ा कि कभी 98 हजार मतदाता वाले नगरीय निकाय में अब महज 50 हजार मतदाता के आसपास ही बचे हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बसा बसाया शहर कितनी तेजी से उजड़ गया।

माह – कोयला सप्लाई
  • जनवरी – 123979
  • फरवरी – 90643
  • मार्च – 74417
  • अप्रैल – 48317

(नोट – कोयला सप्लाई टन में है।)

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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