Twisha Sharma Suicide Case: ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले की आरोपी पूर्व जज गिरिबाला का बैतूल से भी नाता!

जिला एवं सत्र न्यायाधीश के चार माह में कार्यकाल में तेज तर्रार कार्यप्रणाली के लिए चर्चा में रही
Twisha Sharma Suicide Case: बैतूल। राजधानी भोपाल की एक्ट्रेस और चर्चित माडल ट्विशा शर्मा की तथाकथित मौत के मामले में सीबीआई ने रिटायर्ड जल गिरिबाला सिंह को भी आरोपी बनाया है। तीन दिन पहले रिटायर्ड जज गिरिबाला को सीबीआई न्यायालय ने उनके पुत्र और हत्या के मुख्य आरोपी समर्थ सिंह के साथ स्पेशल कोर्ट में पेश किया तो बैतूल में भी अचानक चर्चा तेज हो गई।
दरअसल शासकीय सेवा के दौरान गिरिबाला सिंह 2019 से 31 जुलाई 2019 तक जिला एवं सत्र न्यायाधीश रही है। महज चार माह के अल्प कार्यकाल के दौरान अधिकवक्ताओं के बीच तेज तर्रार कार्यप्रणाली के लिए जानी जाती थी। जैसे ही उन्हें अपनी बहू की हत्या का आरोपी बनाया, बैतूल के अधिवक्ताओं में भी खासी चर्चा है।
भोपाल की ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में राज्य सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। ट्विशा के पति समर्थ सिंह को मुख्य आरोपी बनाकर जबलपुर से गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया। इस बीच रिटायर्ड जल गिरिबाला सिंह को भी आरोपी बनाकर उनके गिरफ्तारी के प्रयास तेज किए थे। बताया जाता है कि इस मामले में पूर्व जज ने अपनी अग्रिम जमानत भी लगाई थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।
तीन दिन पहले ही उन्हें अपनी बहू की हत्या के मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई ने पिछले दिनों अपने पीआर आदेश में एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की तथाकथित मौत के आरोपी समर्थ सिंह के अलावा गिरिबाला सिंह से पूछताछ कर रही है। इस मामले में रिमांड के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
बैतूल में चार माह रही पदस्थ
चर्चित ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में बैतूल का कहीं से कहीं तक कोई स्थान नहंीं था, लेकिन जैसे ही रिटायर्ड जल गिरिबाला सिंह को सीबीआई ने आरोपी बनाया, अचानक बैतूल भी लाइम लाइट हो गया। दरअसल शासकीय सेवा के दौरान जबलपुर उच्च न्यायालय ने उन्हें जिला एवं सत्र न्यायाधीश बैतूल बनाया था।
3 मार्च 2019 को उन्होंने बैतूल में पदभार ग्रहण किया था, तब उम्मीद की जा रही थी कि वे लंबे समय तब बैतूल में पदस्थ रहेगी, लेकिन 31 जुलाई को उन्हें उच्च न्यायालय ने जबलपुर स्थानांतरित कर दिया। वे महज चार माह का कार्यकाल ही बैतूल में पूरा कर पाई।
अधिवक्ताओं की अलग-अलग राय
ट्विशा शर्मा मौत के मामले में जैसे ही गिरिबाला को आरोपी बनाया तो बैतूल के अधिवक्ताओं को सात वर्ष पूर्व का पूर्व जल गिरिबाला सिंह का कार्यकाल याद आ गया। बताया जाता है कि वे काफी तेज तर्रार थी और कड़े न्यायिक फैसले लेती थी। जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष अशोक वर्मा बताते हैं कि गिरिबाला सिंह कम समय पदस्थ रही, लेकिन वे तेज तर्रार कार्यप्रणाली के लिए अधिवक्ताओं में जानी जाती थी।
उनका कार्यकाल मिश्रित कहा जा सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रजकिशोर पांडे ने कहा कि पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह का कार्यकाल अल्प था, लेकिन उसे बेहतर कहा जा सकता है। अनुभव के साथ वे अच्छे फैसले लेने के लिए जानी जाती थी। उन्होंने ट्विशा शर्मा मामले में आरोपी बनाए जाने पर कहा कि यह पारिवारिक मामला है।
एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता अजय सिंह चौहान ने कहा कि पूर्व जल गिरिबाला सिंह काफी बेहतर जज थी। वे काफी अनुभवी होने के कारण फैसलों का अध्ययन कर निर्णय देती थी। अधिवक्ता कम समय में भी उनके कार्यकाल को याद करते हैं।
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