Betul News: रेलवे जीएम के दौरे में जनप्रतिनिधियों की खामोशी पर सवालिया निशान

बैतूल में वार्षिक निरीक्षण के दौरान मांग पत्र न सौंपे जाने से रेल विकास की उपेक्षा पर बहस तेज
Betul News: बैतूल। मध्य रेलवे के मुंबई के महाप्रबंधक राजीव श्रीवास्वत के बैतूल आगमन की खबर भले चार दिन पुरानी हो गई हो, लेकिन न तो जिले के जागरूक जनप्रतिनिधियों और न ही रेलवे सलाहकार समिति के सदस्यों या पूर्व सदस्यों ने उनसे मुलाकात या मांग पत्र सौंपने के प्रयास क्यों नहीं किए? यह ज्वलंत प्रश्र कई तरह के सवाल कर रहा है।
हकीकत है कि रेलवे के जीएम बमुश्किल वर्ष में एक बार प्रवास पर आते हैं। इसे भी जिले के सत्ता पक्ष और विपक्षी पार्टियों के जनप्रतिनिधियों ने मौका भुनाने के प्रयास न हीं किए। पहली मर्तबा ऐसा हुआ कि रेलवे के जीएम बैतूल स्टेशन पहुंचे, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने उन्हें न मांग पत्र सौंपा और न मुलाकात करने के प्रयास किए। यह जिले के लिए बड़े हास्यप्रद है।
छोटे-छोटे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के नेता अपनी राजनीति चमकाते आ रहे हैं। हालात यह है कि सोशल मीडिया पर छोटी सी समस्याओं को लेकर बात का बतंगड़ बनाना आम बात हो गई है। इन्हीं मुद्दों पर लोग चुटकियां लेने से नहीं चुकते, लेकिन 20 मई को मध्य रेलवे मुंबई के महाप्रबंधक राजीव श्रीवास्तव का घोड़ाडोंगरी और बैतूल स्टेशन का वार्षिक निरीक्षण पहले से ही तय था।

इसकी जानकारी भी मीडिया के माध्यम से सभी को दी जा चुकी थी। सामान्य सी बात है कि वार्षिक निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक को जिले के सत्ता पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधि अपनी-अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन और मांग पत्र सौंपने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार ऐसा नजारा नहीं दिखा। यह चौकाने वाली स्थिति थी।
अब तक किसी भी पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने इस बारे में तर्क नहीं दिया कि आखिर रेलवे के महाप्रबंधक वार्षिक निरीक्षण के लिए बैतूल आए और उनसे मुलाकात के लिए हमारे जनप्रतिनिधि आखिर मिलने क्यों नहीं गए? तो चौकाने वाली बात है कि केवल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल को छोड़कर 20 मई को सभी प्रमुख जनप्रतिनिधि बैतूल जिले में ही मौजूद थे।
घोड़ाडोंगरी में समस्याओं के लिए लोग जागरूक
इटारसी से रेलवे के महाप्रबंधक स्पेशल ट्रेन से वार्षिक निरीक्षण के लिए जब घोड़ाडोंगरी रेलवे स्टेशन पहुंचे तो यहां बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों ने उन्हें कई समस्याओं से अवगत कराया। स्टेशन का निरीक्षण करने के बाद अमृत कार्य में तेजी लाने के भी निर्देश दिए। इसके बाद क्षेत्र के लोगों ने उन्हें समस्याओं से अवगत कराया। रेलवे महाप्रबंधक ने उन्हें समस्याओं के निदान का आश्वासन दिया है। घोड़ाडोंगरी के लोगों ने जागरूकता दिखाकर रेलवे के जीएम को अपनी समस्या बताई, लेकिन बैतूल इस मामले में पिछड़ गया।
45 मिनट बैतूल रूके पर नहीं पहुंचा कोई जनप्रतिनिधि
सबसे चौकाने वाली बात यह है कि रेलवे के महाप्रबंधक घोड़ाडोंगरी के बाद जिला मुख्यालय के स्टेशन पहुंचे। यहां पर उन्होंने करीब 45 मिनट तक अमृत योजना के कामों का सूक्ष्म निरीक्षण कर शेड निर्माण, ब्रिज निर्माण सहित अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने काम की गति को बढ़ाने और गुणवत्ता पूर्वक काम करने की हिदायत भी रेलवे के अधिकारियों को दी।
इतने देर रूकने के बावजूद भाजपा और कांग्रेस की ओर से कोई भी नेता रेलवे जीएम से मिलने नहीं पहुंचा। ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ जब रेलवे के जीएम वार्षिक निरीक्षण पर आए और जिले की लाखों आबादी के लिए स्टेशन पर सुविधाओं के लिए कोई मांग पत्र नहीं सौंपा गया, जबकि कई ट्रेनों के स्टापेज की मांग पूर्व में की जा चुकी है, लेकिन बैतूल के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
मंत्री-एक विधायक राज्यपाल के साथ, बाकी गृह क्षेत्र में थे
सांझवीर टाईम्स की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि 20 मई को जिस दिन महाप्रबंधक वार्षिक निरीक्षण के लिए आए थे, इसी दिन प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल का भी बैतूल के भीमपुर में एक कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्थानीय सांसद-केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके, क्षेत्रीय विधायक महेंद्र सिंह चौहान मौजूद थे। बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल भोपाल में थे, लेकिन आमला, घोड़ाडोंगरी और मुलताई विधायक गृह क्षेत्र में होने के बावजूद अपने क्षेत्र के स्टेशनों के लिए रेलवे समस्याओं के लिए जीएम से मिलना उचित नहीं समझा।
भले ही उक्त जनप्रतिनिधि तर्क दे कि राज्यपाल के कार्यक्रम में बीजी थे, लेकिन उनके प्रतिनिधियों के माध्यम से मांग पत्र रेलवे के जीएम तक पहुंचाया जा सकता था, लेकिन जिले के लाखों यात्रियों के साथ कुठाराघात करते हुए किसी भी जनप्रतिनिधि ने वार्षिक निरीक्षण पर आए रेलवे जीएम को मांग पत्र नहीं सौंपा। यह जिले की रेल यात्रियों के साथ पूरा अन्याय है, जबकि छोटे-छोटे मामले को लेकर स्थानीय सांसद किसी भी अपने प्रतिनिधियों केा रेलवे की बैठक में भेजते आए हैं, लेकिन जीएम के दौरे को नजरअंदाज करने को लेकर कई तर्क निकाले जा रहे हैं। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री उइके से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनके निज सहायक ने बताया कि वे दिल्ली में एक कार्यक्रम में व्यस्त है इसलिए रात को ही चर्चा हो सकेगी।
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