Betul Samachar: गिरने से घायल हुई थी राष्ट्रीय खिलाड़ी, बीमा कम्पनी ने नहीं दिया क्लेम, फोरम ने लगाया तगड़ा जुर्माना, अब क्लेम भी मिलेगा

Betul Samachar: बैतूल। स्वास्थ्य बीमा दावा निरस्त करने के मामले में उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी स्टार हैल्थ एंड एलाइड कम्पनी की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए परिवादिया के पक्ष में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। फोरम ने बीमा कंपनी को निर्देशित किया है कि वह नियमों के अनुसार देय उपचार व्यय की राशि का भुगतान ब्याज सहित करे, साथ ही मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए मुआवजा भी प्रदान करे।
प्रकरण के अनुसार, परिवादिया अनन्या अवस्थी, जो कि जूडो-कराटे की राष्ट्रीय खिलाड़ी हैं, उनके परिवार द्वारा 24,465 रुपये प्रीमियम देकर 19 अप्रैल 2022 से 18 अप्रैल 2023 तक की अवधि के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली गई थी। इस पॉलिसी के अंतर्गत 5 लाख रुपये का फ्लोटर सम एश्योर्ड, 1.75 लाख रुपये बोनस, कुल 6.75 लाख रुपये की कवरेज लिमिट तथा 1.50 लाख रुपये का रिचार्ज बेनिफिट शामिल था।
4 अप्रैल 2023 को अनन्या अपने घर की छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें नागपुर स्थित मेडिट्रिना इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में भर्ती कराया गया, जहां उनका लंबे समय तक इलाज चला और कई ऑपरेशन किए गए। 27 अप्रैल 2023 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई। इलाज के दौरान अस्पताल और दवाओं पर कुल मिलाकर लगभग 9.88 लाख रुपये खर्च हुए। परिजनों द्वारा कैशलेस सुविधा के लिए बीमा कंपनी से संपर्क किया गया, लेकिन बाद में उन्हें स्वयं भुगतान कर क्लेम प्रस्तुत करने को कहा गया।
सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ 9 मई 2023 को दावा प्रस्तुत किया गया, परंतु 3 जून 2023 को बीमा कंपनी ने पॉलिसी की शर्तों का हवाला देते हुए क्लेम निरस्त कर दिया। बीमा कंपनी का तर्क था कि अस्पताल का पंजीयन 31 मार्च 2023 को समाप्त हो चुका था, इसलिए दावा अस्वीकृत किया गया। हालांकि, आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद यह माना कि बीमा कंपनी द्वारा दावा निरस्त करना अनुचित था।
आयोग के अध्यक्ष विजय कुमार पांडेय एवं सदस्य चंद्रशेखर मकोड़े ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी नियमानुसार देय उपचार व्यय का भुगतान 27 सितंबर 2023 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करे। साथ ही, परिवादिया को मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए 15,000 रुपये और वाद व्यय के लिए 5,000 रुपये भी दो माह के भीतर देने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का पालन न करने पर अतिरिक्त ब्याज भी देय होगा। आदेश का पालन न करने पर अतिरिक्त ब्याज भी देय होगा।इस मामले में परिवादी की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रजकिशोर पांडे और मनीष शुक्ला ने की।
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