Betul Samachar: माचना नदी किनारे बेनाम कॉलोनी पर सवाल, बाउंड्रीवाल के भीतर दिखा घाट

बिना टीएनसीपी की अनुमति के बेच डाले प्लाट, प्रशासन की निष्क्रियता पर उठे सवाल
Betul Samachar: बैतूल। शहर के माचना नगर क्षेत्र में माचना नदी से सटकर विकसित की जा रही एक बेनाम कॉलोनी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कॉलोनी निर्माण में सरकारी जमीन दबाने और नदी के प्राकृतिक प्रवाह से छेड़छाड़ के आरोप अब केवल दावों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि मौके की स्थिति भी इन आरोपों की पुष्टि करती नजर आ रही है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कॉलोनी की बनाई गई बाउंड्रीवाल के भीतर ही नदी का घाट स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि निर्माण कार्य नियमों को ताक पर रखकर किया गया है। कालोनी के लिए टीएनसीपी की अनुमति लिए बिना प्लॉट बेच डाले गए।
इस कालोनी में कोई बोर्ड तक नजर नहीं आ रहा किंतु बताया जा रहा है की यह कालोनी किसी टिम्बर व्यापारी और एक निजी बैंक में कार्यरत कर्मचारी द्वारा विकसित की जा रही है और प्रयास किए जा रहे हैं कि जल्द से जल्द इस कारनामे को ठिकाने लगा दिया जाए।
चौकाने वाली बात यह है कि कुछ दिनों पहले ही सांझवीर टाईम्स ने इस बारे में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था तब एसडीएम ने कहा था कि मौके पर जाकर देखेंगे, लेकिन वे हमलापुर क्षेत्र में माचना नदीं पर अवैध गतिविधियां देख लौट आएं और माचना नगर में जहां कालोनी बनी है उसकी तरफ मुडक़र नहीं देखा।
सूचना के बावजूद चैन की नींद सो रहा प्रशासन
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन दिन पहले एसडीएम अभिजीत सिंह को इसकी सूचना दी गई थी, लेकिन अब तक मौके का निरीक्षण तक नहीं किया गया है। प्रशासन की इस सुस्ती को लेकर स्थाई नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तब भी कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, नदी किनारे निर्माण के लिए निर्धारित 30 मीटर की दूरी का पालन नहीं किया गया प्रतीत हो रहा है। कॉलोनाइजर द्वारा इस नियम की अनदेखी करते हुए बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई है, जिससे न केवल सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की आशंका है, बल्कि नदी के प्रवाह पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि लकड़ी के कारोबार से जुड़े कॉलोनाइजर पर जिला प्रशासन के अधिकारी भी हाथ डालने से कतरा रहे हैं। अब अधिकारियों की मजबूरी क्या हो सकती है। ये तो अधिकारी और कॉलोनाइजर को ही पता है। लेकिन यह भी सच है कि ये पब्लिक है ये भी सब जानती है।
क्षेत्र में बाढ़, आपदाओं का बढ़ेगा खतरा,
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के निर्माण भविष्य में बाढ़ जैसी आपदाओं का कारण बन सकते हैं। स्थानीय रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि कॉलोनाइजर द्वारा प्लॉटों की बिक्री भी शुरू कर दी गई है। नदी किनारे के दो प्लॉट और सामने का एक प्लॉट बेचे जाने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, इस कॉलोनी के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अनुमति ली गई है या नहीं, इस पर भी संशय बना हुआ है। यह स्थिति केवल माचना नगर तक सीमित नहीं है। शहर में जहां-जहां से माचना नदी गुजरती है, वहां नदी किनारे अतिक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं।
आमतौर पर शिकायत और विरोध के बाद प्रशासन निरीक्षण तो करता है, लेकिन कार्रवाई फाइलों में ही दबकर रह जाती है। नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन और कॉलोनाइजर के बीच कथित सांठगांठ के चलते सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब तक सक्रिय होता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
इनका कहना…
हमलापुर में माचना नदी के पास पिछले दिनों निरीक्षण किया है। आप जिस जगह की बात कर रहे है सामूहिक विवाह निपटते ही माचना नगर में भी अवैध कॉलोनी स्थल का निरीक्षण करेंगे। आपके पास जो भी दस्तावेज, फोटो है सभी जानकारी मुझे भेंज दीजिएं मै दिखवाता हूॅ।
डॉ. अभिजीत सिंह
एसडीएम, बैतूल
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