Betul News: सड़क किनारे हरियाली में छिपी हुई है अज्ञात मौत

सप्तपर्णी-कोनोकार्पस पेड़ मानवजीवन के लिए खतरनाक , शहर में जगह-जगह लगे सैकड़ों पेड़
Betul News: बैतूल। शहर की सड़कों पर हरियाली का प्रतीक माने जाने वाले सप्तपर्णी और कोनोकार्पस के पेड़ अब विवादों के घेरे में हैं। जहां एक ओर ये पेड़ छांव और सुंदरता प्रदान करते हैं, वहीं दूसरी ओर इन्हें मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया गया है।
मध्यप्रदेश नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त द्वारा जारी एक पत्र ने इस मुद्दे को ज्यादा गंभीर बना दिया है, जिसमें प्रदेश की सभी नगरपालिकाओं को ऐसे पेड़ों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। बैतूल शहर के कई प्रमुख मार्ग ऐसे हैं जहां सड़क के आजू बाजू यह पेड़ लगे हुए हैं, लेकिन 4 माह बीतने को आये हैं इन पेड़ों को हटाए जाने की सरगर्मी अभी तक नजर नही आ रही हैं।
पुराने पेड़ हटाकर नई प्रजाति के लगाने हैं पेड़
9 जनवरी को जारी इस आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि क्षेत्र में पहले से लगे सप्तपर्णी और कोनोकार्पस के पेड़ों को तत्काल हटाकर उनकी जगह पर्यावरण के अनुकूल प्रजातियों का रोपण किया जाए। हालांकि, आदेश जारी होने के कई महीनों बाद भी बैतूल शहर में इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। स्थिति यह है कि न तो पेड़ों का सर्वे किया गया है और न ही उन्हें चिन्हित करने की प्रक्रिया पूरी हो सकी है। शहर के प्रमुख मार्गों जैसे कोतवाली थाना रोड, नेहरू पार्क से कारगिल चौक जाने वाले रास्तों सहित कई स्थानों पर इन पेड़ों की भरमार देखी जा सकती है।
तीखी दुर्गंध मानव श्वसन तंत्र पर करती है सीधा असर
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इन पेड़ों के फूलों से निकलने वाली गंध बेहद तीखी और असहनीय होती है, जो आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती है। खासतौर पर अक्टूबर-नवंबर के दौरान जब ये फूल खिलते हैं, तब यह समस्या और बढ़ जाती है। इसके अलावा, इन पेड़ों की सूखी फलियां फटने पर उनमें से कपास जैसा पदार्थ निकलता है, जो हवा में फैलकर श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकता है।
इससे अस्थमा, एलर्जी, सर्दी-खांसी और सिरदर्द जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। संवेदनशील लोगों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कोनोकार्पस और सप्तपर्णी जैसे पेड़ों को शहरी क्षेत्रों में लगाने का निर्णय दीर्घकालिक दृष्टि से उचित नहीं था।
यही कारण है कि अब नगरीय प्रशासन ने इन्हें अपनी एसओआर सूची से भी हटा दिया है और भविष्य में इनकी जगह स्थानीय एवं पर्यावरण अनुकूल प्रजातियों को प्राथमिकता देने की बात कही है। शहरवासियों का कहना है कि यदि ये पेड़ वास्तव में स्वास्थ्य के लिए खतरा हैं, तो प्रशासन को जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए। फिलहाल, सैकड़ों की संख्या में खड़े ये पेड़ न केवल सवाल खड़े कर रहे हैं, बल्कि लोगों की चिंता भी बढ़ा रहे हैं।
इनका कहना…
इस सम्बंध में पूर्व में प्रस्ताव पारित हुआ है। शासन के पत्र अनुरूप जो भी निर्देश दिए गए हैं उनका पालन किया जाएगा।
नवनीत पांडेय,सीएमओ नपा बैतूल
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