Betul Ki Khabar : नपा की गौशाला में गायों को इल्ली लगा आहार, इसलिए हो रही लगातार मौंते
Betul Ki Khabar: Cows fed on caterpillars in Napa's cow shed, that is why they are continuously dying.

सांझवीर की पड़ताल में भी तथ्य उजागर, पशु चिकित्सकों से जांच कराने आगे आए नपा के जिम्मेदार
Betul Ki Khabar : बैतूल। नपा के अधीन आने वाली कामधेनु गौशाला एक बार फिर सुर्खियों में है। नगर पालिका परिषद से एनजीओ के हवाले होते ही यहां मवेशियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। हैरानी की बात यह है कि मौतों के पीछे अलग-अलग तर्क और कारण पेश किए जा रहे हैं। जहां एनजीओ और जिम्मेदार पन्नी और प्लास्टिक खाने को वजह बता रहे हैं, वहीं हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
गौशाला में गौमाताओं को जो पशु आहार दिया जा रहा है, उसमें गुणवत्ता का घोर अभाव है। मौके पर देखने से साफ हुआ कि पशु आहार में हजारों की संख्या में इल्लियां बिलबिला रही थीं। ऐसे सड़े-गले और कीड़ों से भरे चारे को जब गौमाताएं खाएंगी तो उनका बीमार पड़ना और मौत होना स्वाभाविक है।
प्लास्टिक पन्नियों को बताया जा रहा गौमाताओं की मौत जिम्मेदार
गौशाला में रोजाना गौमताओं की मौत ने इस स्थिति पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब यही मवेशी शहर की गलियों में भटकते हुए पन्नी और प्लास्टिक खाते हैं, तब ऐसी मौतें क्यों नहीं हुईं? गौशाला पहुंचने के बाद ही अचानक थोक के भाव मौतें होना इस बात की ओर इशारा करता है कि असली वजह आहार की गुणवत्ता है, न कि पन्नी या प्लास्टिक।

दूसरा बड़ा सवाल यह भी है कि जब तक गौशाला का संचालन नगर पालिका परिषद के हाथों में था, उस दौरान इस तरह की घटनाएं सामने क्यों नहीं आईं? नपा द्वारा मवेशियों को उच्च गुणवत्ता का आहार दिया जा रहा था। मौके पर इसके प्रमाण भी नजर आए। यहां छप्पन भोग ब्रांड की आधा दर्जन बोरियां रखी नजर आई। जो 100 प्रतिशत शुद्ध और पौष्टिक होने के साथ साथ प्राकृतिक पोषक तत्वों से भरपूर है। जबकि यह जानकारी सामने आई है कि, एनजीओ द्वारा इटारसी से जो पशु आहार बुलवाया जा रहा है।

यह आहार मक्के के पेड़ों की पत्तियों से तो बना हुआ है, लेकिन मौके पर पड़े करीब 10 बैगों को जब खोलकर देखा गया तो इस आहार में हजारों की संख्या में बड़ी बड़ी इल्लियां रेंगती नजर आई हैं। यह साफ करता है कि व्यवस्थाओं में गिरावट आई है और एनजीओ द्वारा पशुओं की देखरेख में गम्भीर लापरवाही बरती जा रही है। प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी यदि केवल पन्नी खाने का बहाना बनाकर मामले को टालते रहे तो यह मूक मवेशियों के साथ अन्याय होगा।
मूक पशुओं की मौत पर अधिकारियों की चुप्पी
इस गम्भीर मामले के सामने आने के बाद नपा की तरफ से अभी तक कोई विशेष कार्यवाही सामने नहीं आ पाई है। जबकि आवश्यक है कि गौशाला का तुरंत निरीक्षण कर वास्तविकता सामने लाई जाए। पशु आहार की गुणवत्ता की जांच हो और यदि एनजीओ दोषी पाया जाए तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही, मवेशियों की सुरक्षा और देखभाल के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों। लेकिन मवेशियों की मौत को देखते हुए नपा ने पशु चिकित्सालय के डॉक्टरों से संपर्क कर मौतों की केवल वजह जानने तक ही कार्यवाही सीमित रखी है।
यदि एनजीओ द्वारा दिये जा रहे आहार की गुणवत्ता की जांच की जाए तो मौत का यह कारण भी सामने आ जाएगा। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर जब जिम्मेदारी पशुओं की सेवा की हो, तो ऐसे गैर-जिम्मेदाराना रवैये की गुंजाइश आखिर कैसे छोड़ी जा सकती है। गौमाता की सेवा के नाम पर चल रहे इस ढर्रे को बदलना अब समय की मांग बन चुका है।
इनका कहना….
पशु चिकित्सकों से इस संबंध में चर्चा की गई है। मौतों की वजह जानने के प्रयास किए जा रहे हैं। एनजीओ द्वारा दिए जा रहे पशु आहार की जांच भी कराई जाएगी।
सतीश मटसेनिया, सीएमओ नपा बैतूल




