Heart Transplant: 15-20 साल तक दिल की गंभीर बीमारी से जूझते रहे

हार्ट फंक्शन 10-15′ तक पहुंचा; अहमदाबाद में हुआ सफल हार्ट ट्रांसप्लांट
Heart Transplant: बैतूल | जिले के आठनेर क्षेत्र के ग्राम पुसली निवासी 40 वर्षीय अलकेश डडोरे ने गंभीर हृदय रोग से लंबे संघर्ष के बाद नया जीवन पाया है। अहमदाबाद स्थित यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में उनका सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया है। सर्जरी के करीब एक माह बाद उनकी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक है और वे अस्पताल से डिस्चार्ज होकर स्वस्थ जीवन की ओर लौट रहे हैं। संभवत: बैतूल जिले के किसी मरीज का यह पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण माना जा रहा है।
बचपन से था जटिल जन्मजात हृदय रोग
अलकेश डडोरे बचपन से ही Ebstein’s Anomaly नामक दुर्लभ और जटिल जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थे। इस बीमारी में हृदय की संरचना प्रभावित होती है। उनके हृदय में दाहिने वेंट्रिकल का एट्रियलाइजेशन, गंभीर ट्राइकसपिड रिगर्जिटेशन और एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट जैसी जटिल समस्याएं थीं।
बार-बार पड़ते थे जानलेवा दौरे
पिछले 15 से 20 वर्षों में उन्हें कई बार वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (VT) के खतरनाक दौरे पड़े। इस दौरान कई बार उन्हें बैतूल में भर्ती करना पड़ा और अनेक मौकों पर डीसी कार्डियोवर्जन (इलेक्ट्रिक शॉक) देकर उनकी जान बचाई गई।
पहले भी हो चुकी थी सर्जरी
स्थिति बिगड़ने पर पहले ट्राइकसपिड वाल्व रिपेयर और एएसडी क्लोजर की पेलिएटिव सर्जरी भी की गई थी, जिससे कुछ समय तक राहत मिली। हालांकि बाद में फिर से हृदय विफलता और अनियमित धड़कनों की समस्या बढ़ने लगी।
हार्ट फंक्शन घटकर 10-15′ रह गया
समय के साथ उनकी हृदय क्षमता लगातार कम होती गई और अंततः हार्ट फंक्शन लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक पहुंच गया। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें उन्नत उपचार के लिए अहमदाबाद भेजा गया।
चार माह तक डोनर हृदय का इंतजार
अहमदाबाद स्थित यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने जांच के बाद हार्ट ट्रांसप्लांट की सलाह दी। अलकेश डडोरे ने साहस के साथ यह चुनौती स्वीकार की और करीब चार माह तक अस्पताल में रहकर डोनर हृदय की प्रतीक्षा की।
पिछले महीने हुआ सफल प्रत्यारोपण
पिछले महीने उन्हें उपयुक्त डोनर हृदय मिला और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने उनका सफल हार्ट ट्रांसप्लांट कर दिया। एक माह की निगरानी के बाद उनकी स्थिति स्थिर पाई गई और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इलाज में नहीं लगा कोई खर्च
लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने और जटिल सर्जरी के बावजूद उनका पूरा इलाज शून्य खर्च में हुआ। यह देश में उपलब्ध उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और जनहितकारी स्वास्थ्य योजनाओं का उदाहरण माना जा रहा है।
डॉ. अनुज लश्करे का रहा सहयोग
इस पूरी उपचार प्रक्रिया में डॉ. अनुज लश्करे, जो वर्तमान में उसी संस्थान में कार्यरत हैं, ने भी सक्रिय सहयोग दिया और उपचार व प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अलकेश डडोरे का संघर्ष और उनकी हिम्मत बैतूल जिले के लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। यह घटना गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद का संदेश भी देती है।




