Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: किस प्रशिक्षु अधिकारी के नई पदस्थापना पर सारथी भी साथ गया?? कौनसे साहब है, जिनका पारा क़भी भी बढ़ने से खौफ़जदा रहते है सभी??? रिटायरमेंट के बाद बैतूल से ही घर वापसी की तैयारी में ये साहब???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

अगले पड़ाव पर मैडम के साथ गया सारथी
वर्दी वाले विभाग की एक महिला प्रशिक्षु अधिकारी ट्रेनिंग पीरियड का पहला चरण पूरा होने के बाद अगले पड़ाव पर चली गई। बीते दिनों विभागीय तबादलों की सूची में उनका भी नाम था, लेकिन उनके अगले पड़ाव पर जाने की उतनी चर्चा नहीं हुई, जितनी अपने वाहन चालक को साथ ले जाने पर हो रही है। यह समझ से परे हैं कि जो वाहन चालक था, वह पुरानी पदस्थापना का स्थाई था, लेकिन नई जिम्मेदारी के बाद प्रशिक्षु अधिकारी उसे अपने साथ लेकर गई तो विभाग के साथ अन्य लोगों की भौंहे खड़ी होना स्वभाविक है।
चर्चा है कि पुरानी पदस्थापना के दौरान चाय-पीने सिस्टम की अर्थ व्यवस्था इसी सारथी को दे रखी है। अगले पड़ाव पर यही व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए महिला अधिकारी नियम के विरूद्ध सारथी को लेकर चली गई है। नई पदस्थापना पर मैडम को सारथी को ले जाने पर विभाग में जमकर कानाफुसी हो रही है।
साहब का पारा कब चढ़ जाए, कहना मुश्किल
एक बड़े साहब का पारा कब चढ़ जाए, कहा नहीं जा सकता है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि साहब के दफ्तर में समस्या को लेकर आवेदन के साथ पहुंची महिला वापसी में काफी आहत दिख रही है। इस दौरान यहां पर कुछ मीडियाकर्मी भी मौजूद थे।
महिला के आहत होने पर उनसे चर्चा की गई तो वह कह पड़ी की समस्या को लेकर कई बार आवेदन देने आए, लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि साहब ने जिस तरह आवेश में आकर कई तरह की बात कही, यह पहली बार देखा है। यह पहला अवसर नहीं है, जब महिला को साहब का पारा चढ़ने पर ऐसी बातें सुनते देखा गया। अधीनस्थों पर भी वे कब बरस पड़े, कह पाना मुश्किल है। वैसे साहब के बारे में कहा जाता है कि कहीं गई बात को परिणाम तक पहुंचाते हैं।
रिटायरमेंट के बाद घर वापसी की तैयारी
बैतूल के बारे में कहा जाता है कि जो अफसर यहां रच-बस जाता है, उसे दूसरी जगह पदस्थापना होने पर बेहिचक जाने का मन नहीं करता है। ऐसे अफसरों की संख्या अंगुली पर गिनी जा सकती है। इनमें से एक अफसर ऐसे हैं जो शासन को जमीन, जायजाद को लेकर खासा राजस्व दे रहे हैं। वे कई वर्षों से बैतूल में टिके हैं।
करीब 8-9 वर्षों में दो बार तबादला भी हुआ, लेकिन अपनी राजनीतिक एप्रोच का जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए उन्होंने दोनों बार तबादलों को रूकवा दिया। चूंकि अगले वर्ष उनका रिटायरमेंट है, इसलिए वरिष्ठ अधिकारियों ने भी तबादले निरस्त करने में बिना कोई देरी किए आदेश जारी कर दिए। साहब अभी फ्रंटफुट पर बैतूल के साथ हरदा में भी जमकर बैटिंग कर रहे हैं। इनके बारे में यह भी कहा जा रहा है कि दूसरों की जमीन- जायजाद के लिए मेहनत करते-करते खुद के लिए भी अच्छी तादाद में यह एकत्रित कर लिया है।




